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पटना में एनडीए महिला मोर्चा का हल्ला बोल ,महिला आरक्षण रोकने पर विपक्ष के खिलाफ सड़कों पर उतरीं हजारों महिलाएं

News India Live, Digital Desk: बिहार की राजधानी आज ‘नारी शक्ति’ के नारों से गूंज उठी। संसद में महिला आरक्षण बिल के गिर जाने से नाराज एनडीए (भाजपा, जेडीयू, हम और लोजपा-आर) की महिला कार्यकर्ताओं ने पटना में विशाल ‘जन-आक्रोश महिला पदयात्रा’ निकाली। यह मार्च विपक्षी दलों के उस ‘Conservatism’ (रूढ़िवादी सोच) के खिलाफ था, जिसने कथित तौर पर महिलाओं के संवैधानिक हक को बीच राह में रोक दिया।1. सड़कों पर उतरा ‘नारी शक्ति’ का सैलाबसोमवार सुबह पटना के ऐतिहासिक गांधी मैदान से शुरू हुई यह पदयात्रा डाकबंगला चौराहा होते हुए भाजपा प्रदेश मुख्यालय तक पहुँची।नारेबाजी: प्रदर्शनकारी महिलाओं ने “महिला विरोधी विपक्ष, होश में आओ” और “नारी शक्ति का अपमान, नहीं सहेगा हिंदुस्तान” जैसे नारे लगाए।बड़ी भागीदारी: मार्च में बिहार सरकार की महिला मंत्री, विधायक और बड़ी संख्या में स्थानीय निकायों की महिला प्रतिनिधि शामिल हुईं। लोक गायिका और भाजपा विधायक मैथिली ठाकुर ने भी इसमें हिस्सा लेते हुए विपक्ष के चेहरे को ‘महिला विरोधी’ करार दिया।2. क्यों भड़का है एनडीए का गुस्सा?एनडीए नेताओं का आरोप है कि 17 अप्रैल को लोकसभा में हुए मतदान के दौरान विपक्ष ने एकजुट होकर बिल के खिलाफ वोट दिया, जिससे यह विधेयक दो-तिहाई बहुमत प्राप्त करने में विफल रहा।सम्राट चौधरी का हमला: मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि यह विपक्षी दलों की सामंती मानसिकता को दर्शाता है। उन्होंने पूछा कि आखिर क्यों विपक्ष केवल अपने परिवार की महिलाओं को ही संसद भेजने में विश्वास रखता है, साधारण महिलाओं को नहीं।विजय चौधरी की प्रतिक्रिया: जेडीयू नेता और उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी ने कहा कि देश की महिलाएं इस अपमान को कभी नहीं भूलेंगी और आने वाले चुनाव में विपक्ष को इसका करारा जवाब देंगी।3. विपक्ष का तर्क: “बिल नहीं, चुनावी जाल था”दूसरी ओर, आरजेडी और कांग्रेस ने एनडीए के इन प्रदर्शनों को ‘मगरमच्छ के आंसू’ बताया है।तेजस्वी यादव का पलटवार: नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने कहा कि भाजपा महिला आरक्षण की आड़ में ‘परिसीमन’ (Delimitation) का खेल खेल रही थी। विपक्ष का तर्क है कि बिल को परिसीमन और जनगणना से जोड़ना दक्षिण भारत और उत्तर पूर्व के राज्यों की राजनीतिक ताकत को कम करने की साजिश है।स्टैंडअलोन बिल की मांग: विपक्षी दलों का कहना है कि वे आरक्षण के पक्ष में हैं, लेकिन इसे बिना किसी शर्त के तुरंत लागू किया जाए और इसमें OBC महिलाओं के लिए अलग से कोटा सुनिश्चित हो।4. बिहार की राजनीति पर असरबिहार वह राज्य है जिसने सबसे पहले पंचायतों में महिलाओं को 50% आरक्षण दिया था। अब इस मुद्दे को लेकर एनडीए पूरे प्रदेश में ब्लॉक स्तर तक आंदोलन ले जाने की योजना बना रहा है। आज के मार्च ने साफ कर दिया है कि 2029 के आम चुनाव से पहले ‘महिला वोट बैंक’ बिहार में सबसे बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनने जा रहा है।