
पाकिस्तान से अल्पसंख्यकों के धार्मिक स्थलों को निशाना बनाए जाने की एक बेहद हैरान करने वाली और दर्दनाक खबर सामने आई है। पिछले कुछ समय से 'कृष्ण गली' और 'राम गली' जैसे ऐतिहासिक इलाकों के नाम बदलने को लेकर चल रहे ड्रामे के बीच, अब पाकिस्तानी प्रशासन ने अपना असली रंग दिखा दिया है। सदियों पुरानी सांस्कृतिक विरासत को पूरी तरह से दरकिनार करते हुए, वहां करीब 125 साल पुराने एक ऐतिहासिक गुरुद्वारे को जमींदोज कर दिया गया है। इस कार्रवाई के बाद न केवल पाकिस्तान में रहने वाले सिख और हिंदू परिवारों में दहशत का माहौल है, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी मानवाधिकार संगठनों ने इस पर गहरी नाराजगी जताई है।
रातों-रात मलबे में तब्दील कर दी गई सदियों पुरानी सिख विरासत
स्थानीय सूत्रों और सोशल मीडिया से मिली जानकारी के मुताबिक, इस ऐतिहासिक गुरुद्वारे को बिना किसी पूर्व सूचना या कानूनी नोटिस के बेहद गुपचुप तरीके से ढहाया गया। स्थानीय प्रशासन ने भारी सुरक्षा बलों की तैनाती के बीच इस पूरी कार्रवाई को अंजाम दिया, ताकि कोई भी इसका विरोध न कर सके। विभाजन से पहले के बने इस गुरुद्वारे से न केवल सिख समुदाय की धार्मिक भावनाएं जुड़ी थीं, बल्कि यह उस इलाके की ऐतिहासिक पहचान का एक बेहद अहम हिस्सा था। इस प्राचीन ढांचे को मलबे में तब्दील किए जाने की तस्वीरों और वीडियो ने दुनिया भर के सिख और अल्पसंख्यक समुदायों को झकझोर कर रख दिया है।
नाम बदलने के विवाद की आड़ में रची गई बड़ी साजिश
विशेषज्ञों का मानना है कि पिछले कुछ दिनों से कृष्ण गली और राम गली के नाम बदलने को लेकर जो विवाद खड़ा किया गया था, वह असल में इस ऐतिहासिक ढांचे को हटाने की एक सोची-समझी साजिश का हिस्सा था। पाकिस्तान में अक्सर अल्पसंख्यकों के प्राचीन और ऐतिहासिक धार्मिक स्थलों को भू-माफियाओं और स्थानीय प्रशासन की मिलीभगत से निशाना बनाया जाता रहा है। इस बार भी विकास और अतिक्रमण हटाने के नाम पर इस पूरी कार्रवाई को अंजाम दिया गया है, जिसने पाकिस्तान के धर्मनिरपेक्षता और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा के दावों की पूरी तरह से पोल खोलकर रख दी है।
अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पाकिस्तान को घेरने की तैयारी तेज
इस क्रूर और दमनकारी कदम के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान की चौतरफा थू-थू हो रही है। भारत सहित दुनिया भर के विभिन्न मानवाधिकार और सिख संगठनों ने संयुक्त राष्ट्र (UN) और वैश्विक कूटनीतिक मंचों से पाकिस्तान के इस कदम पर सख्त कार्रवाई करने की मांग की है। विशेषज्ञों के अनुसार, प्राचीन और धार्मिक विरासतों को इस तरह नष्ट करना अंतरराष्ट्रीय नियमों का खुला उल्लंघन है। इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि पड़ोसी देश में अल्पसंख्यकों के धार्मिक और नागरिक अधिकार कितने असुरक्षित और गंभीर खतरे में हैं।
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