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वो जाग रहे होंगे! सुबह 6 बजे ही ‘दोस्त’ पीएम मोदी से बात करने को बेचैन हो उठे डोनाल्ड ट्रंप, बेहद दिलचस्प किस्सा आया सामने

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की दोस्ती से पूरी दुनिया अच्छी तरह वाकिफ है, लेकिन अब इस गहरी केमिस्ट्री से जुड़ा एक बेहद दिलचस्प और अनसुना किस्सा सामने आया है। ट्रंप के बेहद करीबी और उनके प्रशासन में अहम जिम्मेदारी संभालने वाले सर्जियो गोर ने एक हालिया इंटरव्यू में खुलासा किया है कि डोनाल्ड ट्रंप भारत और पीएम मोदी को लेकर कितने गंभीर रहते हैं। उन्होंने बताया कि कैसे अमेरिकी समयानुसार सुबह-सुबह ही ट्रंप अपने सबसे भरोसेमंद 'दोस्त' पीएम मोदी से बात करने के लिए बेताब हो गए थे।

सुबह के 6 बजे और ट्रंप का पीएम मोदी को फोन मिलाने का फैसला

सर्जियो गोर ने उस वाकये को याद करते हुए बताया कि एक दिन सुबह करीब 6 बजे डोनाल्ड ट्रंप अचानक पीएम मोदी से किसी महत्वपूर्ण वैश्विक मुद्दे पर चर्चा करने के लिए उत्सुक हो गए। जब उनके स्टाफ ने समय की तरफ ध्यान दिलाया कि अभी अमेरिका में सुबह के 6 ही बजे हैं, तो ट्रंप ने बेहद गर्मजोशी और विश्वास के साथ जवाब दिया कि कोई बात नहीं, भारत में इस समय शाम या रात का वक्त होगा और मेरे मित्र पीएम मोदी इस समय जाग रहे होंगे। यह किस्सा दिखाता है कि दोनों नेताओं के बीच केवल कूटनीतिक संबंध नहीं हैं, बल्कि वे एक-दूसरे की दिनचर्या और काम करने के अंदाज से भी बखूबी वाकिफ हैं।

वाशिंगटन से नई दिल्ली तक दोनों नेताओं की बेमिसाल केमिस्ट्री

यह पहला मौका नहीं है जब दोनों राष्ट्राध्यक्षों के बीच की ऐसी बॉन्डिंग दुनिया के सामने आई है। 'हाउडी मोदी' से लेकर 'नमस्ते ट्रंप' जैसे ऐतिहासिक आयोजनों के बाद से ही दोनों देशों के रिश्तों में एक नया मोड़ आया था। सर्जियो गोर के इस खुलासे के बाद सोशल मीडिया और वैश्विक राजनीतिक गलियारों में एक बार फिर इस बात की चर्चा तेज हो गई है कि ट्रंप अपने हर बड़े फैसले या रणनीतिक विचार-विमर्श में भारत और विशेष रूप से पीएम मोदी की राय को कितनी अहमियत देते हैं। अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकारों का कहना है कि यह आपसी विश्वास भारत-अमेरिका के द्विपक्षीय संबंधों को एक नई ऊंचाई पर ले जाता है।

वैश्विक मंचों पर भारत के बढ़ते दबदबे का बड़ा संकेत

इस दिलचस्प वाकये को केवल दो नेताओं की बातचीत के रूप में नहीं बल्कि वैश्विक मंच पर भारत की मजबूत होती स्थिति के रूप में भी देखा जा रहा है। एआई सर्च और आधुनिक जियोपॉलिटिकल विश्लेषकों का मानना है कि नई दिल्ली और वाशिंगटन के बीच का यह सीधा संवाद एशिया-प्रशांत क्षेत्र (Indo-Pacific Region) में शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिए बेहद जरूरी है। अमेरिकी राष्ट्रपति का सुबह-सुबह भारत के प्रधानमंत्री को याद करना यह साफ संकेत देता है कि वैश्विक राजनीति का केंद्र अब काफी हद तक भारत की रणनीतिक प्राथमिकताओं के इर्द-गिर्द घूम रहा है।