News India Live, Digital Desk: बिहार की सड़कों पर अब ट्रैफिक नियम तोड़ना आपकी जेब पर भारी पड़ने वाला है। राज्य परिवहन विभाग ने सड़क दुर्घटनाओं पर लगाम लगाने और यातायात व्यवस्था को चुस्त-दुरुस्त करने के लिए आर्टिफीसियल इंटेलिजेंस (AI) का सहारा लिया है। बिहार के 700 सबसे जोखिम वाले और व्यस्त चौराहों पर अब ‘इंटीग्रेटेड ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम’ (ITMS) तैनात किया जाएगा। इस हाई-टेक सिस्टम की सबसे बड़ी खासियत यह है कि नियम टूटते ही बिना किसी मानवीय हस्तक्षेप के सीधे आपके मोबाइल पर ई-चालान का मैसेज आ जाएगा।तीसरी आँख की पैनी नजर: बिना हेलमेट और ट्रिपलिंग पर गिरेगी गाजयह नया सिस्टम केवल साधारण कैमरा नहीं है, बल्कि यह एक ‘स्मार्ट सर्विलांस’ यूनिट है। ये कैमरे ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (ANPR) तकनीक से लैस हैं। अगर कोई चालक रेड लाइट जंप करता है, हेलमेट नहीं पहनता, कार में सीट बेल्ट का प्रयोग नहीं करता या बाइक पर तीन लोग बैठकर चलते हैं, तो सिस्टम तुरंत उसकी फोटो खींच लेगा। वाहन का नंबर प्लेट स्कैन होते ही ‘वाहन’ डेटाबेस से मालिक का विवरण निकाला जाएगा और चंद सेकंडों में चालान जेनरेट होकर घर पहुँच जाएगा।28 अप्रैल को लगेगी मुहर: रफ्तार के सौदागरों पर भी शिकंजापरिवहन विभाग के सचिव राज कुमार के अनुसार, इस परियोजना को लेकर 28 अप्रैल को एक महत्वपूर्ण बैठक होने जा रही है, जिसकी अध्यक्षता विकास आयुक्त करेंगे। इस बैठक में सिस्टम के क्रियान्वयन और तकनीकी पहलुओं पर अंतिम फैसला लिया जाएगा। यह सिस्टम विशेष रूप से ‘ओवरस्पीडिंग’ यानी तेज रफ्तार पर लगाम लगाने के लिए डिजाइन किया गया है, जो राज्य में होने वाली अधिकांश सड़क दुर्घटनाओं का मुख्य कारण है। राज्य और राष्ट्रीय राजमार्गों के साथ-साथ प्रमुख शहरों के एंट्री पॉइंट्स पर भी ये कैमरे लगाए जाएंगे।भ्रष्टाचार पर लगाम और पारदर्शी व्यवस्था की ओर कदमएआई आधारित इस व्यवस्था से न केवल ट्रैफिक अनुशासन बढ़ेगा, बल्कि भ्रष्टाचार और आपसी बहस की गुंजाइश भी खत्म हो जाएगी। अब सड़क पर कोई पुलिसकर्मी आपको नहीं रोकेगा, बल्कि कैमरों के जरिए हुई निगरानी के आधार पर साक्ष्य (फोटो और वीडियो) के साथ चालान भेजा जाएगा। परिवहन विभाग का लक्ष्य है कि इस तकनीक के जरिए बिहार की सड़कों को सुरक्षित बनाया जाए और लोगों के बीच ट्रैफिक नियमों के प्रति जवाबदेही तय की जाए।
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