
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से एक ऐसा हैरान करने वाला और गंभीर मामला सामने आया है, जिसने पूरे शहर की कानून व्यवस्था और प्रशासनिक मुस्तैदी पर बड़े सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं। कुछ समय पहले लखनऊ पुलिस ने एक साजिश के तहत एक प्रसिद्ध मौलाना की हत्या करने की खतरनाक योजना बनाने वाले मुख्य आरोपियों को धर दबोचा था। पुलिस ने इस हाई-प्रोफाइल मामले का खुलासा करते हुए प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी और दावा किया था कि उन्होंने एक बड़े खतरे को टाल दिया है। आम जनता और स्थानीय नागरिकों को लगा कि पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों ने अपराधियों पर शिकंजा कस दिया है, लेकिन इसके तुरंत बाद जो हुआ उसने सबको चौंका कर रख दिया। जिन आरोपियों को पुलिस ने हत्या जैसी गंभीर साजिश रचने के आरोप में जेल भेजा था, वे महज 24 घंटे के भीतर ही कानूनी प्रक्रिया और जमानत के रास्ते बाहर आ गए, जिससे न्याय व्यवस्था को लेकर लोगों के मन में कई तरह की शंकाएं पैदा होने लगीं।
जेल से बाहर आते ही आरोपियों ने निकाला गाड़ियों का बड़ा काफिला
कानून के शिकंजे से इतनी जल्दी रिहा होने के बाद आरोपियों के मन में कानून का डर या पछतावा दिखने के बजाय उनका दुस्साहस और अधिक बढ़ हुआ नजर आया। जेल की सलाखों से बाहर आते ही इन आरोपियों ने अपनी ताकत का प्रदर्शन करने के लिए लखनऊ की सड़कों पर लग्जरी गाड़ियों का एक लंबा-चौड़ा काफिला निकाल लिया। इस काफिले के दौरान न केवल ट्रैफिक नियमों की धज्जियां उड़ाई गईं, बल्कि खुली गाड़ियों में बैठकर जश्न मनाया गया और इस पूरे वाकये का एक भड़काऊ वीडियो भी सोशल मीडिया पर धड़ल्ले से वायरल कर दिया गया। वायरल हो रहे इस वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि किस तरह से आरोपी पुलिस प्रशासन को खुली चुनौती दे रहे हैं और उनके समर्थकों द्वारा हुड़दंग मचाया जा रहा है। राजधानी की व्यस्त सड़कों पर इस तरह के खौफनाक और दबंगई भरे प्रदर्शन ने आम नागरिकों के दिलों में डर पैदा कर दिया है और लोग यह सोचने पर मजबूर हो गए हैं कि क्या अपराधियों के मन से पुलिस का खौफ पूरी तरह से खत्म हो चुका है।
पुलिस प्रशासन की कार्यशैली और सुरक्षा व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल
इस पूरी घटना के सामने आने के बाद लखनऊ कमिश्नरेट की पुलिस कार्यशैली पर चारों तरफ से तीखे सवाल दागे जा रहे हैं। विपक्षी दलों और स्थानीय लोगों का कहना है कि जब पुलिस को पहले से ही यह पता था कि ये आरोपी कितने खतरनाक हैं और वे एक मौलाना की हत्या की बड़ी साजिश में शामिल थे, तो फिर उनकी जमानत का पुरजोर विरोध क्यों नहीं किया गया या फिर रिहाई के बाद इतनी आसानी से उन्हें सड़कों पर शक्ति प्रदर्शन करने की छूट कैसे मिल गई। क्या प्रशासन की खुफिया विंग (Intelligence) इस बात से पूरी तरह अनजान थी कि जेल से छूटने के बाद ये लोग इस तरह का जुलूस निकालने वाले हैं। जनता और पीड़ित पक्ष अब यह मांग कर रहा है कि इस मामले की उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए और उन तमाम लापरवाह अधिकारियों पर भी कार्रवाई की जानी जिनकी वजह से अपराधियों के हौसले इतने बुलंद हो गए हैं।
मौलाना और उनके समर्थकों में खौफ का माहौल, सुरक्षा की मांग तेज
इस सनसनीखेज घटना के बाद से निशाने पर आए मौलाना और उनके परिवार के साथ-साथ उनके समर्थकों में भी गहरी दहशत और असुरक्षा का माहौल बना हुआ है। जिस तरह से हत्या की साजिश रचने वाले आरोपी बिना किसी खौफ के खुलेआम जश्न मना रहे हैं, उससे इस बात की आशंका और अधिक बढ़ गई है कि वे दोबारा किसी बड़ी वारदात को अंजाम दे सकते हैं। मौलाना के करीबियों ने प्रशासन से गुहार लगाई है कि उन्हें तुरंत कड़ी सुरक्षा मुहैया कराई जाए, क्योंकि उनकी जान को लगातार खतरा बना हुआ है। इस पूरे प्रकरण ने एक बार फिर से यह साबित कर दिया है कि अपराधी किस तरह से कानूनी दांव-पेंच का फायदा उठाकर कानून को ठेंगा दिखा रहे हैं। अब देखना यह होगा कि लखनऊ पुलिस इस वायरल वीडियो और खुलेआम हुए शक्ति प्रदर्शन के बाद क्या कड़ा कदम उठाती है और दोबारा इन आरोपियों पर क्या कानूनी शिकंजा कसा जाता है।
UK News