
नेपाल के हिमालयी इलाकों में कुदरत का जो कहर टूटा है, उसकी तस्वीरें और कहानियां किसी का भी कलेजा दहला देने के लिए काफी हैं। मूसलाधार बारिश, पहाड़ों के दरकने और नदियों के उफान के बीच तबाही का ऐसा सैलाब आया कि बस्तियों की बस्तियां ताश के पत्तों की तरह ढह गईं। इस भयावह प्राकृतिक आपदा के बीच एक ऐसी जांबाज और चमत्कारी दास्तान सामने आई है, जिसे सुनकर लोग दांतों तले उंगली दबा रहे हैं। जलप्रलय के तेज बहाव में जब चारों तरफ सिर्फ चीख-पुकार और मौत का सन्नाटा था, तब एक मजदूर ने एक मजबूत आम के पेड़ की डाल को कसकर पकड़कर 14 घंटे से अधिक समय तक जिंदगी और मौत के बीच जंग लड़ी और मौत के मुंह से सुरक्षित बाहर निकल आया।
मौत का खौफनाक मंजर: जब पलक झपकते ही सब कुछ बह गया
प्रभावित इलाके में मजदूरी करने वाले इस शख्स ने अस्पताल के बिस्तर से कांपती आवाज में उस रात की पूरी दास्तान बयां की। मजदूर के मुताबिक, रोजाना की तरह दिनभर की कड़ी मशक्कत के बाद सभी कामगार अपने अस्थायी शिविर (लेबर शेड) में सो रहे थे। आधी रात के करीब अचानक पहाड़ों से बादलों के फटने जैसी गड़गड़ाहट सुनाई दी। इससे पहले कि कोई कुछ समझ पाता या भागने की कोशिश करता, ऊपर से पानी, भारी पत्थरों और मलबे का एक विशाल सैलाब तिनके की तरह शिविर को बहा ले गया। उसने बताया कि पानी का बहाव इतना तेज था कि पैरों तले जमीन खिसक गई और चारों तरफ अंधेरे में सिर्फ पानी की गरज और लोगों की चीखें सुनाई दे रही थीं।
'आम का पेड़ बना भगवान का हाथ': 14 घंटे जिंदगी और मौत से जंग
मजदूर ने रोते हुए बताया कि तेज बहाव उसे करीब आधा किलोमीटर दूर तक बहाकर ले गया था। वह लगातार पानी में डूब-उतर रहा था और सांस लेना दूभर हो गया था। तभी अंधेरे में उसके हाथों में किसी पेड़ की एक मजबूत टहनी आ टकराई। यह एक आम का पुराना और विशाल पेड़ था, जो तेज बहाव के बीच भी मजबूती से अपनी जड़ें जमाए खड़ा था। उसने बिना एक पल गंवाए दोनों हाथों और पैरों से उस पेड़ की मुख्य शाखा को कसकर जकड़ लिया। पानी का स्तर लगातार बढ़ रहा था और उसके सीने तक पानी की लहरें थपेड़े मार रही थीं। मजदूर ने बताया कि ठंड से उसका पूरा शरीर सुन्न पड़ चुका था, लेकिन उसने मन में ठान लिया था कि वह अपनी पकड़ ढीली नहीं होने देगा। उसने कहा कि अगर वह आम का पेड़ वहां नहीं होता, तो आज उसकी लाश का भी पता नहीं चलता; वह पेड़ उसके लिए साक्षात भगवान का सहारा बन गया।
आंखों के सामने बहे साथी: मजदूर की जुबानी दर्दनाक दास्तान
इस चमत्कारिक बचाव के बीच उस मजदूर की आंखों में अपने साथियों को खोने का गहरा दर्द साफ दिखाई दे रहा था। उसने बताया कि जब वह पेड़ से लटका हुआ था, तो उसने अपने कई साथियों को पानी के तेज बहाव में बहते और मदद के लिए पुकारते देखा, लेकिन वह इतना बेबस था कि किसी का हाथ नहीं पकड़ सका। कई लोग सामान, गाड़ियां और कंक्रीट के पिलर पानी के साथ बहते चले गए। वह पूरी रात केवल ईश्वर से अपनी जान और अपने परिवार के पास लौटने की प्रार्थना करता रहा। सुबह की पहली किरण फूटने तक पानी का स्तर थोड़ा थमा, लेकिन बहाव की तीव्रता अभी भी इतनी थी कि कोई नीचे उतरने की हिम्मत नहीं कर सकता था।
एनडीआरएफ और नेपाली सेना का रेस्क्यू ऑपरेशन: ऐसे बची जान
सुबह जब उजाला हुआ, तो राहत और बचाव कार्य में जुटी नेपाली सेना, सशस्त्र पुलिस बल (APF) और आपदा प्रबंधन के जवानों की नजर पेड़ पर अटके इस मजदूर पर पड़ी। चारों तरफ उफनती नदी और दलदल होने के कारण नाव से वहां पहुंचना नामुमकिन था। इसके बाद रेस्क्यू टीम ने आधुनिक ड्रोन और हेलीकॉप्टर की मदद से अभियान शुरू किया। एक जवान ने रस्सी के सहारे नीचे उतरकर मजदूर को लाइफ जैकेट पहनाई और एयरलिफ्ट कर सुरक्षित बाहर निकाला। सुरक्षित जमीन पर कदम रखते ही मजदूर फफक-फफक कर रो पड़ा और उसने रेस्क्यू टीम के पैर छू लिए।
मेडिकल कैंप में इलाज और परिजनों से भावुक संपर्क
बचाव दल ने तुरंत उसे सीमावर्ती क्षेत्र में स्थापित आपातकालीन मेडिकल बेस कैंप में भर्ती कराया। डॉक्टरों के अनुसार, घंटों तक बर्फीले पानी में रहने के कारण मजदूर हाइपोथर्मिया और अत्यधिक मानसिक आघात (Trauma) का शिकार हो गया था। उसके शरीर पर पत्थरों और लकड़ियों से टकराने के कारण कई जगह गहरे घाव भी आए थे। प्राथमिक उपचार और ग्लूकोज चढ़ाने के बाद उसकी हालत अब खतरे से बाहर बताई जा रही है। प्रशासन ने सैटेलाइट फोन के जरिए उसके परिजनों से बात करवाई, जिसके बाद घर में मातम की जगह खुशी के आंसू छलक पड़े।
हिमालयी नदियों का कहर और भारत-नेपाल सीमा पर हाई अलर्ट
नेपाल के इन पहाड़ी जलक्षेत्रों में आई तबाही का असर सिर्फ नेपाल तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे जुड़ी गंडक, कोसी, राप्ती और शारदा जैसी नदियां भारत के उत्तर प्रदेश और बिहार के मैदानी इलाकों में भी उफान पर हैं। सीमावर्ती जिलों जैसे महाराजगंज, सिद्धार्थनगर, पश्चिमी चंपारण और सुपौल में प्रशासन ने हाई अलर्ट जारी कर दिया है। राहत आयुक्तों ने तटबंधों की निगरानी बढ़ा दी है और निचले इलाकों में रहने वाले ग्रामीणों को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं। दोनों देशों की आपदा एजेंसियां लगातार समन्वय बनाकर ऐसे फंसे हुए लोगों और मजदूरों की तलाश में महा-रेस्क्यू ऑपरेशन चला रही हैं।
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