
पड़ोसी देश नेपाल में आई विनाशकारी और प्रलयकारी बाढ़ ने तबाही का एक ऐसा मंजर पैदा कर दिया है जिसने पूरे दक्षिण एशिया को झकझोर कर रख दिया है। इस भयानक प्राकृतिक आपदा के बाद नेपाल के विदेश मंत्री ने भारत और चीन जैसे शक्तिशाली पड़ोसियों को एक बहुत बड़ी और गंभीर चेतावनी जारी की है। नेपाल में आई इस तबाही के दौरान लगभग 300 भारतीय नागरिकों के लापता होने की खबर सामने आ रही है, जिससे दोनों देशों की सरकारों में हड़कंप मच गया है। हिमालयी क्षेत्रों में ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन के कारण लगातार पिघलते ग्लेशियर अब इस पूरे उपमहाद्वीप के लिए एक बड़ा खतरा बनते जा रहे हैं, जिस पर समय रहते ठोस कदम उठाना बेहद जरूरी हो गया है।
नेपाल में प्रलयकारी बाढ़ का तांडव और आपदा का भयानक मंजर
नेपाल के विभिन्न हिस्सों में हाल ही में फटी बादल और लगातार मूसलाधार बारिश के बाद आई बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है। नदियां अपने उफान पर हैं और पानी का तेज बहाव अपने रास्ते में आने वाले मकानों, पुलों और सड़कों को बहाकर ले गया है। इस आपदा के कारण नेपाल के कई इलाके देश के बाकी हिस्सों से पूरी तरह कट चुके हैं और राहत एवं बचाव कार्य में भी भारी बाधा आ रही है। स्थानीय प्रशासन और आपदा प्रबंधन टीमें दिन-रात जुटी हुई हैं, लेकिन तबाही का दायरा इतना बड़ा है कि स्थिति को नियंत्रित करना बेहद चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है। इस आपदा की चपेट में केवल स्थानीय लोग ही नहीं आए, बल्कि वहां यात्रा या काम के सिलसिले में मौजूद सैकड़ों विदेशी नागरिक भी इसका शिकार बने हैं।
300 भारतीय नागरिकों के लापता होने से बढ़ी चिंता
इस भीषण प्राकृतिक आपदा के बीच सबसे चिंताजनक बात यह सामने आई है कि नेपाल में अलग-अलग जगहों पर लगभग 300 भारतीय नागरिक लापता बताए जा रहे हैं। ये सभी लोग तीर्थयात्रा, पर्यटन या रोजगार के सिलसिले में नेपाल के विभिन्न क्षेत्रों में मौजूद थे। जैसे ही बाढ़ और भूस्खलन की खबरें भारत तक पहुंचीं, केंद्र सरकार और विदेश मंत्रालय ने तुरंत हरकत में आते हुए नेपाली प्रशासन के साथ संपर्क साधना शुरू कर दिया है। लापता भारतीयों की सुरक्षित वापसी के लिए भारतीय दूतावास लगातार स्थानीय अधिकारियों के संपर्क में है और रेस्क्यू ऑपरेशन तेज कर दिए गए हैं। परिवार के लोग अपने अपनों की सलामती की दुआ कर रहे हैं, और प्रशासन हरसंभव मदद पहुंचाने का प्रयास कर रहा है।
'हिमालय में जो पिघलता है': विदेश मंत्री की भारत और चीन को दो टूक चेतावनी
नेपाल के विदेश मंत्री ने इस गंभीर आपदा के बाद एक तीखा बयान देते हुए कहा है कि 'हिमालय में जो पिघलता है, उसका असर सिर्फ नेपाल पर नहीं बल्कि पूरे क्षेत्र पर पड़ता है।' उन्होंने भारत और चीन दोनों महाशक्तियों को चेतावनी दी है कि वे हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र यानी इकोसिस्टम की अनदेखी करना बंद करें। नेपाल का तर्क है कि दोनों देशों की तरफ से होने वाले बेतहाशा औद्योगिक विकास, पर्यावरण प्रदूषण और अनियंत्रित निर्माण कार्यों के कारण ग्लोबल वार्मिंग की रफ्तार कई गुना बढ़ गई है, जिसका सीधा और भयानक खामियाजा नेपाल जैसे छोटे हिमालयी देशों को भुगतना पड़ रहा है। यह चेतावनी इस बात की याद दिलाती है कि प्रकृति के साथ खिलवाड़ अब क्षेत्रीय सीमाओं को पार कर चुका है।
जलवायु परिवर्तन और हिमालयी क्षेत्रों पर मंडराता हुआ बड़ा खतरा
वैज्ञानिक और पर्यावरणविद लंबे समय से यह चेतावनी देते आ रहे हैं कि हिंदू कुश हिमालय श्रृंखला दुनिया के सबसे संवेदनशील क्षेत्रों में से एक है। यहां तापमान वैश्विक औसत से कहीं अधिक तेजी से बढ़ रहा है, जिसके कारण ग्लेशियर बहुत तेजी से पिघल रहे हैं और ग्लेशियर लेक आउटबस्ट फ्लड यानी ग्लॉफ जैसी खतरनाक घटनाएं सामने आ रही हैं। नेपाल की यह बाढ़ इस बात का प्रमाण है कि आने वाले समय में जलवायु परिवर्तन के दुष्परिणाम और भी अधिक भयानक हो सकते हैं। भारत, नेपाल और चीन को आपसी राजनीतिक मतभेदों को दरकिनार करके इस साझा पर्यावरणीय संकट से निपटने के लिए एक मजबूत क्षेत्रीय रणनीति बनानी होगी, अन्यथा आने वाली पीढ़ियों को और भी बड़ी तबाही का सामना करना पड़ेगा।
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