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रूस और यूक्रेन की जंग में 10 भारतीयों की मौत, सुप्रीम कोर्ट सख्त केंद्र से पूछा-अपनों की वापसी का क्या है प्लान?

News India Live, Digital Desk: रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे भीषण युद्ध के मोर्चे से भारत के लिए बेहद दुखद और चिंताजनक खबर सामने आई है। विदेश मंत्रालय (MEA) द्वारा सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की गई ताजा रिपोर्ट के अनुसार, इस युद्ध में अब तक कम से कम 10 भारतीय नागरिकों की जान जा चुकी है। इस खुलासे के बाद देश में हड़कंप मच गया है और सर्वोच्च अदालत ने केंद्र सरकार से फंसे हुए भारतीयों की सुरक्षित वतन वापसी को लेकर जवाब तलब किया है।विदेश मंत्रालय का चौंकाने वाला खुलासासुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने स्वीकार किया कि कई भारतीय नागरिक, जिन्हें कथित तौर पर रूसी सेना में ‘सहायक’ के रूप में भर्ती किया गया था, अब युद्ध की अग्रिम पंक्ति में फंस गए हैं। मंत्रालय की रिपोर्ट के मुताबिक, युद्ध की विभीषिका के बीच 10 भारतीयों ने दम तोड़ दिया है। सरकार ने अदालत को बताया कि वह रूसी अधिकारियों के साथ लगातार संपर्क में है ताकि इन शवों को सम्मानपूर्वक भारत लाया जा सके और जीवित बचे लोगों को जल्द से जल्द डिस्चार्ज कराया जा सके।सुप्रीम कोर्ट ने दिखाई सख्ती, सरकार को दिए निर्देशचीफ जस्टिस की अध्यक्षता वाली पीठ ने इस मामले को “अत्यंत संवेदनशील” करार देते हुए केंद्र सरकार से पूछा कि अभी भी कितने भारतीय वहां फंसे हुए हैं और उनकी वापसी के लिए अब तक क्या ठोस कदम उठाए गए हैं? कोर्ट ने सख्त लहजे में कहा कि नागरिकों की सुरक्षा सर्वोपरि है और सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि किसी भी भारतीय को उसकी इच्छा के विरुद्ध युद्ध क्षेत्र में न धकेला जाए। अदालत ने विदेश मंत्रालय को अगली सुनवाई तक फंसे हुए भारतीयों की सही संख्या और उनकी वापसी की स्थिति पर विस्तृत रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है।धोखे से भर्ती करने वाले एजेंटों पर कसता शिकंजाजांच में यह भी सामने आया है कि कई भारतीयों को मोटी कमाई और ‘आसान नौकरी’ का लालच देकर एजेंटों ने रूस भेजा था। वहां पहुंचने के बाद उन्हें कथित तौर पर सैन्य प्रशिक्षण दिया गया और युद्ध के मैदान में उतार दिया गया। सीबीआई और अन्य जांच एजेंसियां अब उन एजेंटों और ट्रैवल फर्मों के खिलाफ देशव्यापी छापेमारी कर रही हैं, जो इस मानव तस्करी जैसे गंभीर खेल के पीछे शामिल हैं। पीड़ितों के परिवारों ने सरकार से गुहार लगाई है कि उनके बच्चों को मौत के मुंह से वापस निकाला जाए।