News India Live, Digital Desk: बिहार की राजनीति में 15 अप्रैल 2026 का दिन भौगोलिक और क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व के लिहाज से भी ऐतिहासिक रहा। सम्राट चौधरी के मुख्यमंत्री बनने के साथ ही बिहार की सत्ता का केंद्र अब मगध और सारण से निकलकर अंग (Anga) क्षेत्र पहुंच गया है। सम्राट चौधरी इस क्षेत्र से आने वाले बिहार के तीसरे मुख्यमंत्री हैं।अंग क्षेत्र के मुख्यमंत्रियों का इतिहासअंग क्षेत्र (भागलपुर, मुंगेर, बांका, लखीसराय और जमुई) को लंबे इंतजार के बाद प्रदेश का नेतृत्व करने का मौका मिला है। सम्राट चौधरी से पहले इस क्षेत्र से केवल दो नेता मुख्यमंत्री बने थे, वे दोनों ही कांग्रेस के दौर में थे:चंद्रशेखर सिंह (जमुई): 14 अगस्त 1983 से 12 मार्च 1985 तक (कुल 1 साल 210 दिन)। उन्हें तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने खुद मुख्यमंत्री बनवाया था।भागवत झा आजाद (भागलपुर): 14 फरवरी 1988 से 10 मार्च 1989 तक। उनके कार्यकाल के ठीक एक साल बाद 1990 में लालू प्रसाद यादव (सारण क्षेत्र) मुख्यमंत्री बने और कांग्रेस का दौर समाप्त हो गया।अब 37 साल बाद, मुंगेर जिले की तारापुर विधानसभा से विधायक सम्राट चौधरी ने इस सूखे को खत्म किया है।क्षेत्रीय राजनीति का बदलता समीकरणपिछले तीन दशकों से बिहार की राजनीति मुख्य रूप से दो क्षेत्रों के इर्द-गिर्द घूम रही थी:सारण इलाका: यहाँ से लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी ने लंबे समय तक शासन किया।मगध इलाका: यहाँ से नीतीश कुमार (नालंदा) और जीतनराम मांझी (गया) ने मुख्यमंत्री के रूप में बागडोर संभाली।सम्राट चौधरी का मुख्यमंत्री बनना अंग क्षेत्र के लिए गौरव की बात है, क्योंकि इस क्षेत्र में विधानसभा की 21 सीटें आती हैं। 2025 के चुनाव में एनडीए ने इनमें से 20 सीटों पर जीत दर्ज की थी, जिसका ईनाम अब इस क्षेत्र को मुख्यमंत्री के रूप में मिला है।अंग क्षेत्र के लिए क्या मायने हैं?विकास को गति: भागलपुर और मुंगेर जैसे जिलों में बुनियादी ढांचे, सिल्क उद्योग और गंगा पुल परियोजनाओं को नई गति मिलने की उम्मीद है।राजनीतिक वजन: सम्राट चौधरी के रूप में इस इलाके को न केवल एक मजबूत ओबीसी चेहरा मिला है, बल्कि कैबिनेट में भी अंग क्षेत्र का दबदबा बढ़ने की संभावना है।
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