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बिहार में सम्राट युग की शुरुआत गिरिराज सिंह की 3 साल पुरानी भविष्यवाणी हुई सच, लव-कुश राजनीति का नया अध्याय

News India Live, Digital Desk: बिहार के 24वें मुख्यमंत्री के रूप में कार्यभार संभालने के बाद सम्राट चौधरी अब पूरी तरह एक्शन मोड में हैं। शपथ ग्रहण के तुरंत बाद सचिवालय पहुंचकर मुख्य सचिव और आला अधिकारियों के साथ बैठक करना और फिर भाजपा कार्यालय में ‘बुलडोजर बाबा’ जैसे नारों के बीच कार्यकर्ताओं का उत्साह बढ़ाना, यह साफ संकेत है कि बिहार की राजनीति में अब एक नए और आक्रामक दौर की शुरुआत हो चुकी है।जब गिरिराज सिंह ने पहली बार दिया था ‘सम्राट’ नाराआज सम्राट चौधरी मुख्यमंत्री की कुर्सी पर हैं, लेकिन इसकी नींव 2 मई 2023 को ही रख दी गई थी। बेगूसराय के दिनकर भवन में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने मंच से खुलेआम भविष्यवाणी की थी:नारा: गिरिराज सिंह ने पूछा, “बिहार का नेता कैसा हो?”, जिस पर कार्यकर्ताओं ने एक स्वर में कहा, “सम्राट चौधरी जैसा हो!”योगी मॉडल की मांग: उस वक्त गिरिराज सिंह ने स्पष्ट कहा था कि बिहार को उत्तर प्रदेश के योगी आदित्यनाथ जैसा एक मजबूत और आक्रामक मुख्यमंत्री चाहिए, जो ‘सबका साथ, सबका विकास’ के साथ-साथ सुशासन की नई इबारत लिख सके।सम्राट की खुद की भविष्यवाणी: “लव-कुश समाज ही बैठेगा सत्ता पर”संयोग देखिए कि 13 अप्रैल 2023 को प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद अपने एक अभिनंदन समारोह में सम्राट चौधरी ने लव-कुश समाज को एक गारंटी दी थी। उन्होंने कहा था:”अगर आपके बीच से एक व्यक्ति (नीतीश कुमार) राजनीतिक तौर पर जाएगा, तो कोई दूसरा व्यक्ति (बाहरी) सत्ता में नहीं बैठेगा। कोई लव-कुश समाज का बेटा ही सत्ता की बागडोर संभालेगा।”15 अप्रैल 2026 को जब नीतीश कुमार के पद छोड़ने के बाद सम्राट सीएम बने, तो उनकी यह बात अक्षरशः सच साबित हुई। बिहार की सत्ता ‘लव’ (कुर्मी) के हाथ से निकलकर ‘कुश’ (कोइरी/कुशवाहा) के हाथ में सुरक्षित रही।नीतीश और शकुनी की विरासत का नया चेहराबिहार में ‘लव-कुश’ समीकरण की नींव 1994 में नीतीश कुमार और शकुनी चौधरी ने मिलकर रखी थी।नीतीश कुमार: ‘लव’ (कुर्मी) समाज के नेता के रूप में उभरे लेकिन बाद में महिलाओं, अति पिछड़ों और महादलितों के सर्वमान्य नेता बने।सम्राट चौधरी: अपने पिता शकुनी चौधरी और उपेंद्र कुशवाहा की विरासत को आगे बढ़ाते हुए अब ‘कुश’ (कुशवाहा) समाज के सबसे बड़े नायक बनकर उभरे हैं।मुख्यमंत्री का पहला दिन: मिशन ‘सुशासन’सचिवालय में हुई पहली बैठक में मुख्यमंत्री ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि उनकी सरकार का फोकस कानून-व्यवस्था और विकास योजनाओं की गति पर होगा। भाजपा कार्यालय में लगे ‘बुलडोजर’ के नारों से यह भी कयास लगाए जा रहे हैं कि बिहार में अब अपराधियों के खिलाफ यूपी की तर्ज पर कड़ी कार्रवाई देखने को मिल सकती है।