News India Live, Digital Desk: बिहार की राजनीति में एक नया इतिहास रचा जा चुका है। भारतीय सेना में 14 साल तक देश की सेवा करने वाले फौजी इंजीनियर शकुनी चौधरी अपनी तीन दशक लंबी राजनीतिक पारी में जिस मुकाम तक नहीं पहुँच पाए, उनके बेटे सम्राट चौधरी ने मात्र 26 साल के करियर में बिहार की सत्ता के शिखर (मुख्यमंत्री पद) को हासिल कर लिया है।सम्राट चौधरी की ताजपोशी पर उनके पिता शकुनी चौधरी ने भावुक होते हुए कहा, “जो बाप नहीं कर पाता है, उसे अगर बेटा कर दे, तो यह बहुत बड़ा ऐतिहासिक काम है।”शकुनी चौधरी: ‘लव-कुश’ समीकरण के शिल्पकार और संघर्ष की कहानीशकुनी चौधरी बिहार की राजनीति का एक ऐसा नाम हैं जिन्होंने कुशवाहा समाज को एक नई पहचान दी। उनके राजनीतिक सफर के प्रमुख पड़ाव:शुरुआत: 1985 में मुंगेर की तारापुर सीट से निर्दलीय विधायक चुने गए।समता पार्टी का गठन: 1994 में जब नीतीश कुमार और जॉर्ज फर्नांडीस ने लालू यादव के खिलाफ ‘बिहार बचाओ रैली’ की, तब शकुनी कांग्रेस छोड़कर उनके साथ खड़े हुए। यहीं से ‘लव-कुश’ (कुर्मी-कुशवाहा) की राजनीतिक जोड़ी बनी।संसद और मंत्रालय: वह खगड़िया से सांसद रहे और लालू-नीतीश दोनों की सरकारों में कद्दावर मंत्री रहे।अधूरा सपना: 2015 के चुनाव में ‘हम’ (HAM) के प्रदेश अध्यक्ष रहते हुए उन्हें और उनके परिवार को करारी हार का सामना करना पड़ा, जिसके बाद उन्होंने संन्यास की घोषणा कर दी।सम्राट चौधरी: बगावत से ‘सम्राट’ बनने तक का सफरसम्राट चौधरी का करियर उतार-चढ़ाव और रणनीतिक दांव-पेंचों से भरा रहा है:कम उम्र में मंत्री बनने का विवाद: 1999 में बिना सदन के सदस्य बने राबड़ी देवी सरकार में मंत्री बने, लेकिन उम्र कम होने के कारण उन्हें बर्खास्त कर दिया गया।नीतीश का भरोसा और 2014 की बगावत: सम्राट ने 2014 में आरजेडी (RJD) को तोड़कर नीतीश कुमार की डूबती नैया को सहारा दिया था। तभी से नीतीश के साथ उनके निजी संबंध बेहद प्रगाढ़ रहे।भाजपा में कद का बढ़ना: 2017 में बीजेपी में शामिल होने के बाद सम्राट ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। पार्टी को एक ऐसे ओबीसी चेहरे की तलाश थी जो आक्रामक हो और नीतीश के विकल्प के रूप में उभर सके।पगड़ी का संकल्प: 2022 में नीतीश के पाला बदलने के बाद सम्राट ने पगड़ी (मुरैठा) बांधी और प्रण लिया कि जब तक नीतीश को कुर्सी से नहीं हटाएंगे, पगड़ी नहीं खोलेंगे। 2024 में समीकरण ऐसे बदले कि नीतीश ने खुद उन्हें मुख्यमंत्री की कुर्सी सौंप दी।पिता का दर्द और बेटे की उपलब्धि: “मोदी-नीतीश का आशीर्वाद भगवान का गिफ्ट”90 वर्षीय शकुनी चौधरी आज अपने बेटे की सफलता पर गर्व महसूस कर रहे हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री चयन के पीछे की केमिस्ट्री को साझा करते हुए कहा:”नरेंद्र मोदी और नीतीश कुमार का आशीर्वाद सम्राट को मिला है, यह कोई साधारण बात नहीं है। दो अलग धुरियों (BJP और JDU) के नेता अगर एक ही नाम पर सहमत हो जाएं, तो उस युवा में कोई तो गुण होगा। सम्राट ने जनता और नेताओं दोनों का दिल जीता है।”सम्राट सरकार का नया ढांचाबिहार के मुख्यमंत्री के रूप में सम्राट चौधरी ने प्रशासन पर अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए 29 विभाग अपने पास रखे हैं, जबकि अन्य महत्वपूर्ण विभाग उपमुख्यमंत्री विजय चौधरी और बिजेंद्र यादव के बीच बांटे गए हैं।
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