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हवाई किले बना रहे हैं ट्रंप ईरान ने परमाणु डील के दावों को किया खारिज, अमेरिका को दी हकीकत में रहने की सलाह

News India Live, Digital Desk: अमेरिका और ईरान के बीच चल रही कूटनीतिक जंग ने एक नया मोड़ ले लिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के साथ परमाणु समझौते (Nuclear Deal) के करीब होने और ‘यूरेनियम संवर्धन’ (Enrichment) रोकने के दावों पर ईरान ने जोरदार पलटवार किया है। ईरान के सरकारी मीडिया (IRIB) ने ट्रंप के बयानों का मज़ाक उड़ाते हुए उन्हें ‘हवाई किले’ करार दिया है। ईरान का साफ कहना है कि अमेरिका अपनी घरेलू राजनीति को साधने के लिए झूठी उम्मीदें परोस रहा है, जबकि धरातल पर सच्चाई इसके बिल्कुल उलट है।’न्यूक्लियर डस्ट’ और समझौते के दावों पर छिड़ा विवादहाल ही में राष्ट्रपति ट्रंप ने दावा किया था कि ईरान ने अपने परमाणु कार्यक्रम को छोड़ने और ‘न्यूक्लियर डस्ट’ (संवर्धित यूरेनियम) को अमेरिका को सौंपने पर सहमति जता दी है। ट्रंप ने इसे अपनी बड़ी कूटनीतिक जीत बताया था। लेकिन ईरान की सरकारी एजेंसी ने इन दावों को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा कि तेहरान अपने ‘संप्रभु अधिकार’ और शांतिपूर्ण परमाणु कार्यक्रम पर कोई समझौता नहीं करने वाला है। ईरान ने स्पष्ट किया कि जब तक प्रतिबंध पूरी तरह नहीं हटते, तब तक किसी भी शर्त को मानना नामुमकिन है।वार्ता की मेज पर फंसा ’20 साल’ का पेंचसूत्रों के मुताबिक, अमेरिका ने ईरान के सामने 20 साल तक यूरेनियम संवर्धन पर पूरी तरह रोक लगाने का प्रस्ताव रखा है। ट्रंप का दावा है कि ईरान इस पर ‘शक्तिशाली’ तरीके से सहमत हो गया है। हालांकि, ईरानी विदेश मंत्रालय के करीबी सूत्रों का कहना है कि वे केवल 3 से 5 साल के ‘पॉज’ पर विचार कर रहे हैं, न कि पूर्ण बंदी पर। ईरान के मीडिया ने ट्रंप के बयानों को ‘तथ्यों से परे’ बताते हुए कहा कि वॉशिंगटन को भ्रम की दुनिया से बाहर आना चाहिए।सीजफायर और कूटनीति के बीच बढ़ता तनावयह जुबानी जंग ऐसे समय में हो रही है जब इज़रायल-लेबनान और अमेरिका-ईरान के बीच अस्थायी युद्धविराम (Ceasefire) की खबरें आ रही हैं। पाकिस्तान की मध्यस्थता में चल रही बातचीत को लेकर ट्रंप काफी उत्साहित नजर आ रहे हैं, यहां तक कि उन्होंने इस्लामाबाद जाने के भी संकेत दिए हैं। लेकिन ईरानी नेतृत्व का कड़ा रुख बताता है कि आने वाले दिनों में यह राह उतनी आसान नहीं होगी जितनी व्हाइट हाउस की ओर से पेश की जा रही है।क्या होगा ‘मिशन ईरान’ का भविष्य?इतिहास गवाह है कि ईरान के साथ परमाणु वार्ता हमेशा से ‘एक कदम आगे, दो कदम पीछे’ वाली रही है। ट्रंप प्रशासन जहां सैन्य दबाव और ब्लॉकहेड (Blockade) के जरिए ईरान को झुकाने का दावा कर रहा है, वहीं तेहरान इसे अपनी अर्थव्यवस्था के खिलाफ ‘आर्थिक युद्ध’ बता रहा है। जानकारों का मानना है कि अगर यह कूटनीतिक बातचीत विफल होती है, तो पश्चिम एशिया एक बार फिर भीषण सैन्य टकराव की ओर बढ़ सकता है, जिसका असर ग्लोबल ऑयल मार्केट और सप्लाई चेन पर पड़ना तय है।