
News India Live, Digital Desk: मध्य पूर्व (Middle East) से इस वक्त की सबसे बड़ी और राहत भरी खबर सामने आ रही है। महीनों से जारी भारी बमबारी और खूनी संघर्ष के बीच इजरायल और लेबनान ने 10 दिनों के संघर्ष विराम (Ceasefire) पर सहमति जता दी है। अमेरिका की मध्यस्थता में हुए इस समझौते ने दुनिया को तीसरे विश्व युद्ध की आहट से फिलहाल बड़ी राहत दी है। जानकारों का मानना है कि लेबनान के साथ हुआ यह समझौता ईरान और इजरायल के बीच जारी तनाव को भी ठंडा करने की दिशा में पहला और निर्णायक कदम साबित हो सकता है।अमेरिका की ‘बैकडोर’ डिप्लोमेसी लाई रंग, डोनाल्ड ट्रंप का दावाइस ऐतिहासिक सीजफायर के पीछे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सक्रिय कूटनीति को मुख्य वजह माना जा रहा है। ट्रंप ने हाल ही में घोषणा की है कि इजरायल और लेबनान न केवल युद्ध रोकने पर सहमत हुए हैं, बल्कि इस सीजफायर को आगे तीन हफ्तों के लिए बढ़ाने पर भी बातचीत चल रही है। वाशिंगटन का मानना है कि अगर यह शांति वार्ता सफल रहती है, तो इसे पूरे क्षेत्र में एक व्यापक शांति समझौते के रूप में बदला जा सकता है।होर्मुज जलडमरूमध्य से हटेगा ‘संकट का साया’?इजरायल और लेबनान के बीच युद्ध विराम होते ही ईरान ने भी अपने तेवर कुछ नरम किए हैं। तेहरान ने संकेत दिए हैं कि जब तक लेबनान में शांति बनी रहेगी, तब तक वैश्विक व्यापार के लिए महत्वपूर्ण ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ (Strait of Hormuz) से वाणिज्यिक जहाजों की आवाजाही को खुला रखा जाएगा। हालांकि, ईरान ने यह चेतावनी भी दी है कि यदि अमेरिका ने अपनी नौसैनिक घेराबंदी नहीं हटाई, तो वह दोबारा इस रास्ते को बंद कर सकता है। फिलहाल, इस खबर से वैश्विक बाजार और कच्चे तेल की कीमतों में स्थिरता आने की उम्मीद है।ग्राउंड जीरो पर क्या हैं हालात?भले ही आधिकारिक तौर पर सीजफायर लागू हो गया है, लेकिन सीमा पर तनाव अभी भी बरकरार है। संयुक्त राष्ट्र (UN) ने दोनों देशों से इस समझौते का पूरी तरह पालन करने की अपील की है। लेबनान के दक्षिणी हिस्सों से विस्थापित हुए लाखों लोग अब अपने घरों की ओर लौटने की उम्मीद कर रहे हैं। वहीं, इजरायली सेना ने साफ किया है कि वह सीजफायर का सम्मान करेगी, लेकिन किसी भी उकसावे की स्थिति में करारा जवाब देने के लिए तैयार है।ईरान-इजरायल संघर्ष पर क्या होगा असर?रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि लेबनान में हिजबुल्लाह और इजरायल के बीच शांति स्थापित होने से ईरान काफी हद तक दबाव में आएगा। चूंकि हिजबुल्लाह को ईरान का सीधा समर्थन प्राप्त है, इसलिए इस समझौते को ईरान की रणनीति में बदलाव के रूप में भी देखा जा रहा है। क्या यह अस्थायी शांति एक स्थायी समझौते का रूप लेगी? यह आने वाले कुछ दिनों में तय होगा, लेकिन फिलहाल दुनिया ने राहत की सांस ली है।
UK News