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खादी एवं ग्रामोद्योग की योजनाओं ने सशक्त किये सोनभद्र की निर्मला के विभिन्न व्यवसाय

उत्तर प्रदेश शासन द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक समृद्धि, स्वरोजगार और पारंपरिक कलाओं को पुनर्जीवित करने के लिए लगातार अभूतपूर्व कदम उठाए जा रहे हैं। राज्य के ग्रामीण अंचलों में आर्थिक विकास को गति देने और स्थानीय स्तर पर आजीविका के नए अवसरों का सृजन करने में उत्तर प्रदेश खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड एक मजबूत स्तंभ के रूप में स्थापित हुआ है। शासन की मंशा के अनुरूप यह विभाग सुदूर गांवों में रहने वाले युवाओं, महिलाओं और पारंपरिक कामगारों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए निरंतर कार्य कर रहा है। उत्तर प्रदेश जैसे विशाल राज्य में, जहां की एक बड़ी आबादी गांवों में निवास करती है, वहां कृषि के उपरांत आजीविका को सुदृढ़ करने के लिए खादी और ग्रामोद्योग की नीतियां अत्यधिक प्रभावी साबित हो रही हैं। प्रशासन द्वारा संचालित इन लोक कल्याणकारी योजनाओं का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में छिपी हुई उद्यमिता संबंधी प्रतिभाओं को पहचानना और उन्हें आधुनिक बाजार की आवश्यकताओं के अनुकूल ढालना है। यह प्रयास न केवल ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ कर रहा है, बल्कि गांवों से शहरों की ओर होने वाले पलायन को रोकने में भी अत्यंत मददगार साबित हुआ है।
शासन द्वारा प्रत्येक जनपद में मुख्यमंत्री ग्रामोद्योग रोजगार योजना और प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम जैसी महत्वपूर्ण नीतियों के माध्यम से नए उद्यम स्थापित करने के लिए व्यापक वित्तीय और तकनीकी सहायता प्रदान की जा रही है। इसके तहत ग्रामीण उद्यमियों को बेहद कम ब्याज दरों पर तथा भारी सब्सिडी के साथ ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है, जिससे संसाधनों के अभाव में कोई भी इच्छुक उद्यमी पीछे न छूटे। इसके साथ ही प्रशासन द्वारा तकनीकी रूप से पिछड़ रहे कामगारों को आधुनिक टूलकिट और उन्नत मशीनें उपलब्ध कराई जा रही हैं, जिससे उत्पादन की गुणवत्ता और मात्रा दोनों में आशातीत वृद्धि हो रही है। इस व्यवस्था के अंतर्गत तैयार उत्पादों को सही बाजार दिलाने के लिए राज्यव्यापी नेटवर्क और प्रदर्शनियों का आयोजन किया जाता है, जिससे ग्रामीण अंचलों के हस्तनिर्मित उत्पाद सीधे बड़े शहरों के उपभोक्ताओं तक सुलभ हो रहे हैं। जैविक उत्पाद, हस्तनिर्मित सामग्री और विभिन्न प्रकार के खाद्य प्रसंस्कृत सामानों की बढ़ती मांग ने ग्रामीण आत्मनिर्भरता को एक नया आयाम दिया है।
इस व्यवस्था का एक अत्यंत प्रेरक और प्रत्यक्ष उदाहरण जनपद सोनभद्र के राबर्ट्सगंज ब्लॉक के अंतर्गत ग्राम बिचपई में देखने को मिलता है। इस गांव का वातावरण अत्यंत शांतिपूर्ण और सौहार्दपूर्ण है, जहां मुख्य रूप से पिछड़ी जाति एवं आदिवासी समुदाय के लोग निवास करते हैं और यहां की प्रचलित भाषाएं भोजपुरी तथा हिंदी हैं। इसी परिवेश में रहने वाली 38 वर्षीय बी.ए. स्नातक उत्तीर्ण महिला उद्यमी निर्मला जी ने शासन की विभिन्न जनपदीय योजनाओं का कुशल लाभ उठाकर सफलता की एक नई कहानी लिखी है। एक समय था जब उनकी पारिवारिक आर्थिक स्थिति अत्यंत दयनीय थी और उन्हें घरेलू जिम्मेदारियों के निर्वहन तथा बच्चों की अच्छी परवरिश के लिए मजदूरी तक करनी पड़ती थी। छह सदस्यों के इस परिवार में पति-पत्नी, तीन बेटियां और एक बेटा शामिल हैं, जिनकी शिक्षा-दीक्षा के लिए कड़े आर्थिक संघर्ष की आवश्यकता थी। ऐसी विपरीत परिस्थितियों में भी हार न मानते हुए, निर्मला जी ने प्रशासन द्वारा संचालित राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत ‘शीतला आजीविका महिला स्वयं सहायता समूह‘ से जुड़ने का सराहनीय निर्णय लिया। इसके उपरांत वे ‘महाबीर ग्राम संगठन‘ और ‘संगम प्रेरणा महिला संकुल समिति‘ (सीएलएफ) जैसी सामुदायिक संस्थाओं में सक्रिय रूप से प्रतिभाग करने लगीं।
समूह से जुड़ने के पश्चात प्रशासन के सहयोग से उन्हें आरसेटी के माध्यम से मोमबत्ती निर्माण का विधिवत और व्यावसायिक प्रशिक्षण प्राप्त हुआ। प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद, उन्होंने प्रारंभिक स्तर पर स्वयं का योगदान देते हुए सांचे मंगाकर दीपावली और होली जैसे बड़े त्योहारों पर मोमबत्तियां बनाने का कार्य आरंभ किया। महिला उद्यमिता विकास कार्यक्रम के अंतर्गत शासन द्वारा आयोजित विभिन्न बैठकों और सामुदायिक संगोष्ठियों में भाग लेकर उन्होंने अपने व्यवसाय की समझ को और अधिक विकसित किया। प्रशासन की परियोजना टीम ने उनकी प्रतिबद्धता और उद्यम की क्षमता को देखते हुए साठ हजार रुपये की सीड मनी (प्रारंभिक सहायता राशि) स्वीकृत की। इस वित्तीय सहयोग की मदद से उन्होंने बनारस से विभिन्न प्रकार के आकर्षक, रंगीन, चमकदार और उच्च गुणवत्ता वाले मोमबत्ती के सांचे खरीदे, जिससे उनके उत्पाद बाजार में प्रतिस्पर्धा करने योग्य बन सके। वर्तमान में उनके द्वारा निर्मित मोमबत्तियों की मांग स्थानीय बाजारों में निरंतर बनी हुई है।
व्यवसाय के विविधीकरण और आमदनी को और बढ़ाने के उद्देश्य से, उन्होंने खादी ग्रामोद्योग विभाग से पॉपकॉर्न मशीन प्राप्त करने के लिए एमडीएसएस टीम की सहायता से आवेदन किया। शासन द्वारा उन्हें शीघ्र ही पॉपकॉर्न मशीन उपलब्ध करा दी गई, जिससे उनके उद्यम को एक नई दिशा मिली। इसके अतिरिक्त, उन्होंने आय के स्रोतों को सुदृढ़ करने के लिए विकास भवन के समीप एक फ्रूट जूस कॉर्नर की भी स्थापना की, जिससे उनकी दैनिक आय में और अधिक स्थिरता आई। शासन के खाद्य सुरक्षा एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग द्वारा ग्रामीण महिलाओं के कौशल विकास हेतु चलाए जा रहे विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम के तहत उन्होंने देशी गुलाब से सिरप बनाने और गाजर से मुरब्बा तैयार करने का दो महीने का उन्नत प्रशिक्षण भी प्राप्त किया। इस तकनीकी ज्ञान का उपयोग करते हुए वे अब मौसम के अनुकूल गुलाब सिरप और गाजर के मुरब्बे का भी सफल उत्पादन और विपणन कर रही हैं।
इन बहुआयामी सरकारी प्रयासों और स्वयं के अटूट जज्बे के कारण निर्मला जी की मासिक आय, जो कभी मात्र आठ हजार रुपये हुआ करती थी, अब बढ़कर बीस हजार रुपये से अधिक हो गई है। पांच वर्षों के इस व्यावसायिक अनुभव के बाद वर्तमान में वे पूरी तरह से आत्मनिर्भर हैं और उनके इस उद्यम में उनके पति का भी निरंतर और सराहनीय सहयोग प्राप्त हो रहा है। वे दोनों मिलकर इस व्यवसाय का अत्यंत कुशलता से संचालन कर रहे हैं। इस उद्यम की सबसे बड़ी सफलता यह है कि निर्मला जी ने स्वयं को आर्थिक रूप से सुदृढ़ करने के साथ-साथ समाज की अन्य महिलाओं के लिए भी रोजगार के द्वार खोले हैं। उनके इस उद्यम में तीन अन्य स्थानीय महिलाओं को प्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिला है, जो मोमबत्ती निर्माण के कार्य में सहयोग करती हैं। इस अनुकरणीय प्रयास और प्रशासनिक सुविधाओं के कुशल उपयोग को देखकर क्षेत्र की लगभग 12 से 15 अन्य महिलाएं भी अत्यंत प्रेरित हुई हैं और वे भी आत्मनिर्भर बनने की दिशा में गंभीर विचार कर रही हैं।
ग्रामीण परिवेश में आया यह बदलाव केवल आर्थिक स्तर तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसके सामाजिक और व्यवहारिक परिणाम भी अत्यंत सुखद हैं। पूर्व में जहां महिलाएं झिझक और संकोच के कारण घर से बाहर निकलने में कतराती थीं, वहीं अब वे पूरी तरह से आत्मविश्वास से सराबोर होकर व्यावसायिक गतिविधियों का संचालन कर रही हैं। बच्चों को अच्छे स्कूलों में शिक्षा मिल रही है, जिससे उनके पारिवारिक जीवन स्तर में व्यापक सुधार आया है। डिजिटल इंडिया के दौर में कदम मिलाते हुए इस ग्रामीण इकाई में डिजिटल भुगतान को पूरी तरह अपना लिया गया है, जिसके तहत दुकान पर बार कोड स्थापित किया गया है और सभी प्रकार के लेनदेन पारदर्शी तरीके से डिजिटल माध्यम से किए जा रहे हैं। वर्ष 2023 से शुरू हुए इस सफल सफर में उनके उत्कृष्ट योगदान और प्रशासनिक योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन को देखते हुए शासन द्वारा उन्हें 15 अगस्त के पावन अवसर पर दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय परेड में शामिल होने का गौरवमयी अवसर भी प्रदान किया गया, जो पूरे क्षेत्र के लिए एक अत्यंत सम्मान का विषय है।
इस प्रकार, शासन और प्रशासन के संयुक्त तत्वावधान में जनपदों में चलाई जा रही विभिन्न तकनीकी, वित्तीय और विपणन संबंधी सुविधाएं ग्रामीण अंचल की महिलाओं को स्वावलंबी बनाने में मील का पत्थर साबित हो रही हैं। बिचपई गांव जैसी पिछड़ी तथा आदिवासी बाहुल्य आबादी वाले क्षेत्रों में इन योजनाओं का प्रभावी ढंग से पहुंचना इस बात का साक्ष्य है कि विकास की मुख्यधारा समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक पहुंच रही है। भविष्य में इन ग्रामीण उत्पादों को ऑनलाइन मार्केटप्लेस और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म से जोड़ने की योजना पर भी प्रशासन द्वारा गंभीरता से कार्य किया जा रहा है, ताकि स्थानीय स्तर पर तैयार होने वाले इन उच्च गुणवत्तायुक्त सामानों को एक बड़ा मंच मिल सके और ग्रामीण उद्यमियों की आय का दायरा और अधिक विस्तृत हो सके। यह संपूर्ण प्रयास उत्तर प्रदेश को एक समृद्ध और आत्मनिर्भर राज्य बनाने की दिशा में शासन का एक अत्यंत सराहनीय और युगांतरकारी कदम है।