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होर्मुज जलडमरूमध्य बंद होने की खबरों पर ईरान का बड़ा बयान, जानिए क्या है जमीनी हकीकत

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) को लेकर सोशल मीडिया और कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में चल रही दावों पर अब ईरान सरकार ने खुद सामने आकर स्थिति साफ की है। ईरान ने उन सभी खबरों को सिरे से खारिज कर दिया है जिनमें कहा जा रहा था कि इस बेहद महत्वपूर्ण समुद्री रास्ते को दोबारा बंद कर दिया गया है।

ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने सरकारी ब्रॉडकास्टर 'प्रेस टीवी' से बातचीत में इन अफवाहों को "बेबुनियाद" और पूरी तरह गलत बताया है। उन्होंने साफ किया कि 18 जून को अमेरिका के साथ हुए युद्धविराम समझौते (MoU) के तहत इस रास्ते से कमर्शियल जहाजों की आवाजाही पूरी तरह सामान्य है और ईरान ने यहां सुरक्षित सफर के लिए जरूरी इंतजाम किए हैं।

क्या दावा किया जा रहा था रिपोर्ट्स में?

दरअसल, पिछले कुछ घंटों से इंटरनेट पर ऐसी खबरें तैर रही थीं कि ईरान के सैन्य संगठन IRGC (इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स) ने अमेरिका पर वादाखिलाफी का आरोप लगाते हुए होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद कर दिया है। इन रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि जब तक इजरायल लेबनान से अपनी सेना नहीं हटाता और अमेरिकी सेना फारस की खाड़ी खाली नहीं करती, तब तक यह रास्ता बंद रहेगा। अफवाहों में यह भी कहा जा रहा था कि इस आदेश को न मानने वाले जहाजों को सीधे निशाना बनाया जाएगा।

लेबनान पर इजरायल के हमले से बढ़ा तनाव

भले ही ईरान ने रास्ता बंद करने की बात को अफवाह बताया हो, लेकिन इस इलाके में तनाव चरम पर है। इसकी वजह है लेबनान पर इजरायल के ताजा हवाई हमले, जिसमें कई लोगों की जान गई है। अमेरिका-ईरान के बीच हुए समझौते के बाद माना जा रहा था कि इजरायल और हिजबुल्लाह के बीच भी शांति बनेगी, लेकिन इजरायली पीएम बेंजामिन नेतन्याहू ने साफ कर दिया है कि उनकी सेना अभी लेबनान में ही रहेगी। इस बयानबाजी के बाद ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराक्ची ने इजरायली सरकार की कड़ी आलोचना की है।

अमेरिका और ट्रैकिंग एजेंसियों का क्या कहना है?

दूसरी तरफ, अमेरिकी सेंट्रल कमांड का कहना है कि उन्होंने समझौते के तहत ईरानी बंदरगाहों से अपनी नाकाबंदी हटा ली है। वहीं जहाजों की मूवमेंट पर नजर रखने वाली ग्लोबल एजेंसी 'AXSMarine' के डेटा के मुताबिक, समझौते के बाद गुरुवार को रिकॉर्ड 25 कमर्शियल जहाज इस रास्ते से सुरक्षित गुजरे।

क्यों जरूरी है यह रास्ता?

आपको बता दें कि दुनिया भर के कुल तेल और गैस व्यापार का लगभग 20% (पांचवां हिस्सा) इसी 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' से होकर गुजरता है। अगर यह रास्ता प्रभावित होता है, तो पूरी दुनिया में पेट्रोल, डीजल और गैस की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच सकती हैं। फिलहाल ईरान के ताजा बयान ने वैश्विक बाजारों और शिपिंग कंपनियों को बड़ी राहत दी है।