News India Live, Digital Desk: बांग्लादेश में इस्कॉन (ISKCON) के पूर्व सदस्य और हिंदू आध्यात्मिक गुरु चिन्मय कृष्ण दास ब्रह्मचारी को लेकर एक बड़ी खबर सामने आई है। चटगांव की एक अदालत ने राजद्रोह के मामले में फंसे चिन्मय कृष्ण दास को जमानत दे दी है। हालांकि, कोर्ट के इस आदेश के बावजूद उन्हें फिलहाल जेल में ही रात काटनी होगी। जमानत मिलने के बाद भी उनकी रिहाई न होने की खबरों ने उनके समर्थकों और मानवाधिकार संगठनों के बीच बेचैनी बढ़ा दी है।कोर्ट से राहत, लेकिन जेल की दीवारें अब भी बरकरारचटगांव की सत्र अदालत में सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के वकीलों ने चिन्मय दास की जमानत के लिए पुरजोर दलीलें पेश कीं। अभियोजन पक्ष के कड़े विरोध के बावजूद अदालत ने उन्हें जमानत दे दी। लेकिन कानूनी प्रक्रियाओं और कुछ तकनीकी अड़चनों की वजह से उनकी रिहाई का परवाना समय पर जेल नहीं पहुंच सका। सूत्रों का कहना है कि प्रशासन और पुलिस कुछ अन्य पुराने मामलों या कागजी कार्रवाई का हवाला देकर उनकी रिहाई को टालने की कोशिश कर रहे हैं, जिससे मामला और पेचीदा हो गया है।राजद्रोह का आरोप और देशव्यापी प्रदर्शनबता दें कि चिन्मय कृष्ण दास को पिछले दिनों ढाका एयरपोर्ट से उस समय गिरफ्तार किया गया था, जब वे एक कार्यक्रम में शामिल होने जा रहे थे। उन पर बांग्लादेश के राष्ट्रीय ध्वज का अपमान करने और राजद्रोह जैसी गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया था। उनकी गिरफ्तारी के बाद बांग्लादेश के चटगांव, ढाका और खुलना जैसे शहरों में बड़े पैमाने पर हिंसक प्रदर्शन हुए थे, जिसमें एक वकील की जान भी चली गई थी। भारत सरकार ने भी इस मामले में अपनी चिंता जताते हुए बांग्लादेश से हिंदुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की थी।समर्थकों में भारी आक्रोश, सुरक्षा एजेंसियां अलर्टजमानत के बावजूद रिहाई न होने की खबर फैलते ही चटगांव कोर्ट परिसर के बाहर और जेल के पास भारी संख्या में श्रद्धालु और समर्थक जमा होने लगे हैं। स्थिति को देखते हुए बांग्लादेशी सुरक्षा एजेंसियों ने इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी है। हिंदू संगठनों का आरोप है कि चिन्मय दास को जानबूझकर निशाना बनाया जा रहा है और जमानत मिलने के बाद भी उन्हें जेल में रखना मानवाधिकारों का उल्लंघन है।अंतरराष्ट्रीय दबाव और भारत की पैनी नजरचिन्मय कृष्ण दास का मामला अब केवल बांग्लादेश का आंतरिक मुद्दा नहीं रह गया है। अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता आयोग और दुनिया भर के हिंदू संगठनों ने इस मामले पर कड़ा रुख अख्तियार किया है। नई दिल्ली स्थित विदेश मंत्रालय इस पूरे घटनाक्रम पर पैनी नजर बनाए हुए है। जानकारों का मानना है कि इस मामले का हल ही बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के प्रति अंतरिम सरकार के असली रवैये को स्पष्ट करेगा।
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