News India Live, Digital Desk: जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटने के बाद अब भारतीय राजनीति के गलियारों में ‘PoK’ यानी पाक अधिकृत कश्मीर को लेकर सरगर्मियां तेज हो गई हैं। भारतीय जनता पार्टी के एक वरिष्ठ नेता के ताजा दावे ने यह संकेत दे दिए हैं कि मोदी सरकार अब ‘मिशन PoK’ की ओर कदम बढ़ाने वाली है। दावा किया जा रहा है कि आगामी परिसीमन और विधायी प्रक्रियाओं के माध्यम से PoK को वापस लेने या वहां की सीटों को लेकर संसद में कोई बड़ा कदम उठाया जा सकता है।संसद में आएगा परिसीमन का नया ड्राफ्ट?बीजेपी नेता के बयानों के बाद यह चर्चा आम हो गई है कि सरकार PoK के लिए आरक्षित सीटों को लेकर कोई बड़ा कानूनी बदलाव कर सकती है। गौरतलब है कि जम्मू-कश्मीर विधानसभा में PoK के लिए सीटें पहले से ही खाली छोड़ी जाती हैं। लेकिन अब चर्चा है कि परिसीमन के नए नियमों के तहत इन सीटों पर प्रतिनिधियों के मनोनयन या निर्वाचन को लेकर कोई ठोस रूपरेखा तैयार की जा रही है। अगर ऐसा होता है, तो यह भारत की अखंडता और कूटनीति के लिहाज से एक ऐतिहासिक मोड़ होगा।PoK पर भारत का रुख और वैश्विक दबावभारत हमेशा से यह कहता रहा है कि PoK भारत का अभिन्न अंग है और पाकिस्तान ने वहां अवैध कब्जा कर रखा है। पिछले कुछ वर्षों में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और गृह मंत्री अमित शाह कई बार सार्वजनिक मंचों से कह चुके हैं कि PoK को वापस लेना हमारा लक्ष्य है। बीजेपी नेता के इस दावे को उसी संकल्प की अगली कड़ी के रूप में देखा जा रहा है। जानकारों का मानना है कि इस कदम से न केवल पाकिस्तान पर अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ेगा, बल्कि देश के भीतर भी राष्ट्रवाद की एक नई लहर पैदा होगी।कश्मीर की बदली तस्वीर और भविष्य की रणनीतिघाटी में शांति और विकास के दावों के बीच अब सरकार का पूरा ध्यान उस हिस्से पर है जो अभी भी पड़ोसी देश के कब्जे में है। सियासी पंडितों का कहना है कि विधानसभा चुनावों के बाद अब दिल्ली की सत्ता में बैठे दिग्गज PoK को लेकर किसी बड़े बिल की तैयारी में हैं। यदि संसद में इस तरह का कोई प्रस्ताव आता है, तो विपक्षी दलों के लिए भी इसका विरोध करना मुश्किल होगा, क्योंकि यह सीधे तौर पर देश की संप्रभुता से जुड़ा मामला है।
UK News