
अमेरिका में स्थायी रूप से बसने और अपने परिवार के भविष्य को सुरक्षित करने की इच्छा रखने वाले भारतीय उद्यमियों, कारोबारियों और निवेशकों के लिए एक बेहद निराशाजनक और चिंताजनक खबर सामने आई है। अमेरिका ने लोकप्रिय 'ईबी-5 इमिग्रेंट इन्वेस्टर प्रोग्राम' (EB-5 Immigrant Investor Program) के तहत आवेदन शुल्क में भारी-भरकम और ऐतिहासिक बढ़ोतरी कर दी है। इस नए और सख्त फैसले के बाद अमेरिका में भारी पूंजी निवेश के जरिए ग्रीन कार्ड (Green Card) हासिल करने का रास्ता अब और अधिक खर्चीला और कठिन हो गया है, जिससे निवेशकों के बीच बेचैनी साफ तौर पर देखी जा सकती है।
अमेरिकी नागरिकता और आप्रवासन सेवा (USCIS) द्वारा जारी किए गए नए नियमों के अनुसार, कई प्रमुख और अनिवार्य याचिकाओं की फीस को दोगुने से भी अधिक कर दिया गया है। यह बदला हुआ शुल्क ढांचा आगामी 30 नवंबर से आधिकारिक रूप से प्रभावी हो जाएगा। इस अचानक हुए बदलाव से उन अनगिनत भारतीय परिवारों और प्रोफेशनल्स के अरमानों पर पानी फिरता नजर आ रहा है, जिन्होंने अमेरिका में निवेश कर वहां बसने की लंबी योजनाएं बनाई थीं।
अमेरिकी नागरिकता और आप्रवासन सेवा (USCIS) ने क्यों लिया यह फैसला?
अमेरिकी कांग्रेस द्वारा वर्ष 1990 में शुरू किए गए इस ईबी-5 कार्यक्रम के तहत विदेशी निवेशकों, उनके जीवनसाथी और उनके आश्रित बच्चों को अमेरिका में वाणिज्यिक उद्यम स्थापित करने का अवसर मिलता है। इसके बदले में निवेशकों को वहां के स्थानीय नागरिकों के लिए कम से कम 10 पूर्णकालिक नौकरियां सृजित करनी होती हैं। इस प्रक्रिया के तहत टारगेटेड एम्प्लायमेंट एरिया (TEA) या बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में लगभग 8 लाख डॉलर और अन्य क्षेत्रों के लिए 10.5 लाख डॉलर की न्यूनतम निवेश सीमा तय की गई है।
इस अप्रत्याशित बढ़ोतरी पर स्पष्टीकरण देते हुए USCIS ने कहा है कि इमिग्रेशन एजेंसी अमेरिकी करदाताओं के धन पर निर्भर रहने के बजाय पूरी तरह से आवेदकों द्वारा दी जाने वाली फीस से संचालित होती है। एजेंसी के मुताबिक, भारी संख्या में आने वाले आवेदनों की गहन समीक्षा, पात्रता का सत्यापन, सुरक्षा और बैकग्राउंड चेक, धोखाधड़ी रोकने तथा प्रशासनिक परिचालन के खर्चों को उठाने के लिए यह शुल्क वृद्धि करना अत्यंत आवश्यक हो गया था।
प्रमुख शुल्कों और आंकड़ों में हुआ यह बड़ा बदलाव
नए नियमों के लागू होने के बाद विभिन्न श्रेणियों के आवेदन शुल्कों में भारी उछाल आया है, जिसका सीधा असर निवेशकों की जेब पर पड़ेगा:
-
फॉर्म I-526 (स्टैंडअलोन निवेशक): इस आवेदन की फीस 3,675 डॉलर से सीधे बढ़ाकर 7,615 डॉलर कर दी गई है।
-
फॉर्म I-526E (रीजनल सेंटर के जरिए आवेदन): इसका शुल्क 3,675 डॉलर से बढ़ाकर 7,850 डॉलर कर दिया गया है, जिसमें 75 डॉलर का तकनीकी शुल्क और इन्वेस्टर इंटीग्रिटी फीस अलग से शामिल है।
-
फॉर्म I-829 (शर्तें हटाने के लिए आवेदन): इस प्रक्रिया की फीस 3,750 डॉलर से बढ़ाकर 5,000 डॉलर कर दी गई है।
-
रीजनल सेंटर के शुल्कों में भारी उछाल: प्रारंभिक फॉर्म I-956 की फीस 17,795 डॉलर से सीधे 44,115 डॉलर और फॉर्म I-956F की फीस 42,675 डॉलर कर दी गई है। इसके अलावा पुराने आवेदनों में संशोधन के लिए लाए गए नए फॉर्म I-526 की लागत 10,330 डॉलर होगी।
इसके अतिरिक्त, इंटीग्रिटी फंड पेमेंट को भी छोटे केंद्रों के लिए 10 हजार डॉलर से बढ़ाकर 11 हजार डॉलर तथा बड़े केंद्रों के लिए 20 हजार डॉलर से बढ़ाकर 22 हजार डॉलर कर दिया गया है, जिसमें भुगतान में देरी होने पर 10 से 20 प्रतिशत तक का अतिरिक्त जुर्माना भी वसूला जाएगा। इन कड़े और महंगे प्रावधानों के बाद अब अमेरिका में निवेश आधारित स्थायी निवास पाना पहले की तुलना में काफी ज्यादा चुनौतीभरा हो गया है।
UK News