
विशेष रिपोर्टर, नई दिल्ली: भारतीय कृषि, अर्थव्यवस्था और देश के करोड़ों किसानों के लिए एक बहुत बड़ी और राहत देने वाली खबर सामने आई है। पिछले कुछ समय से प्रशांत महासागर में पनप रहे 'अल-नीनो' (El Niño) के खतरे को लेकर जो चिंताएं जताई जा रही थीं, अब उस पर काफी हद तक विराम लगता दिख रहा है। विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) और अंतरराष्ट्रीय मौसम पूर्वानुमान एजेंसियों की ताजा रिपोर्ट में दावा किया गया है कि हिंद महासागर में बन रहा 'पॉजिटिव इंडियन ओशन डिपोल' (Positive Indian Ocean Dipole – Positive IOD) अल-नीनो के दुष्परिणामों का डटकर मुकाबला करने के लिए पूरी तरह तैयार है।
मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि एक तरफ जहां अल-नीनो आमतौर पर भारत में मानसूनी हवाओं को कमजोर करके सूखे या कम बारिश का संकट पैदा करता है, वहीं दूसरी तरफ शक्तिशाली 'पॉजिटिव आईओडी' भारतीय उपमहाद्वीप में नमी से भरी तूफानी हवाएं भेजकर झमाझम बारिश कराने की क्षमता रखता है। इसे आम भाषा में 'इंडियन नीनो' (Indian Niño) भी कहा जाता है। WMO के इस आकलन के बाद भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) और देश के कृषि विशेषज्ञों ने राहत की सांस ली है।
अल-नीनो का खौफ: भारतीय मानसून और खेती पर क्यों मंडराता है खतरा?
मौसम विज्ञान की दुनिया में अल-नीनो को भारतीय मानसून का सबसे बड़ा दुश्मन माना जाता है। जब मध्य और पूर्वी भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर (Pacific Ocean) की सतह का तापमान सामान्य से अधिक गर्म हो जाता है, तो उस स्थिति को 'अल-नीनो' कहते हैं।
यह समुद्री घटना वैश्विक वायुमंडलीय परिसंचरण पैटर्न को पूरी तरह से उलट-पुलट देती है। ऐतिहासिक रूप से देखा गया है कि जब-जब अल-नीनो का प्रभाव मजबूत हुआ है, तब-तब भारत में मानसून की बारिश औसत से कम दर्ज की गई है या देश के कई राज्यों को भीषण सूखे का सामना करना पड़ा है। चूंकि भारत की लगभग आधे से अधिक कृषि भूमि सीधे तौर पर मानसूनी बारिश पर निर्भर करती है, इसलिए अल-नीनो की आहट मात्र से ही शेयर बाजार, जिंस बाजार (Commodity Market) और सरकार के माथे पर बल पड़ जाते हैं।
अल-नीनो का 'गेम चेंजर' बना पॉजिटिव IOD: जानिए कैसे कराएगा झमाझम बारिश?
अल-नीनो के इस बड़े खतरे के बीच हिंद महासागर (Indian Ocean) में एक चमत्कारिक मौसमी घटना जन्म ले रही है, जिसे 'पॉजिटिव आईओडी' कहा जाता है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, यह भारत के लिए किसी वरदान से कम नहीं है।
आईओडी (Indian Ocean Dipole) दरअसल हिंद महासागर के पश्चिमी हिस्से (अरब सागर के पास) और पूर्वी हिस्से (इंडोनेशिया के पास) के समुद्री सतह के तापमान का अंतर होता है। जब हिंद महासागर का पश्चिमी हिस्सा पूर्वी हिस्से की तुलना में अधिक गर्म हो जाता है, तो उसे 'पॉजिटिव आईओडी' की स्थिति कहा जाता है।
यह स्थिति अरब सागर और बंगाल की खाड़ी के ऊपर जबरदस्त नमी और मानसूनी बादलों का निर्माण करती है। यही नमी से भरे बादल हवा के कम दबाव का क्षेत्र बनाते हुए भारतीय मुख्य भूमि की ओर बढ़ते हैं और देश के मैदानी व पहाड़ी इलाकों में मूसलाधार बारिश कराते हैं। अतीत के मौसमी आंकड़े गवाह हैं कि जब भी अल-नीनो के साथ-साथ पॉजिटिव आईओडी सक्रिय हुआ है, तब-तब अल-नीनो का नकारात्मक असर बेअसर साबित हुआ है और भारत में सामान्य या सामान्य से अधिक बारिश दर्ज की गई है।
WMO रिपोर्ट के बड़े दावे: विश्व मौसम विज्ञान संगठन ने क्या दी राहत की खबर?
विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) की हालिया क्लाइमेट अपडेट रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि हिंद महासागर में समुद्र की सतह का तापमान (Sea Surface Temperature) पॉजिटिव आईओडी के अनुकूल बना हुआ है। WMO के वैश्विक संकेतकों से पता चलता है कि आगामी मानसूनी महीनों के दौरान आईओडी का सकारात्मक सूचकांक और अधिक मजबूत हो सकता है।
रिपोर्ट में बताया गया है कि यद्यपि प्रशांत महासागर में अल-नीनो की स्थितियां बनी हुई हैं, लेकिन हिंद महासागर से उठने वाली मजबूत नमी युक्त हवाएं अल-नीनो द्वारा पैदा की जाने वाली सुष्कता (Dryness) को पूरी तरह दबा देंगी। इसके परिणामस्वरूप, दक्षिण एशियाई क्षेत्रों, विशेषकर भारत, नेपाल और बांग्लादेश के बड़े हिस्सों में मानसून की सक्रियता बनी रहेगी और जून से सितंबर के दौरान अच्छी वर्षा देखने को मिलेगी।
भारतीय कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए क्यों साबित होगी यह संजीवनी?
भारत में मानसूनी बारिश केवल मौसम का मिजाज तय नहीं करती, बल्कि यह देश की आर्थिक सेहत का सबसे बड़ा पैमाना है। पॉजिटिव आईओडी के कारण अच्छी बारिश की उम्मीद से देश के कृषि क्षेत्र में खुशी की लहर है।
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खरीफ फसलों की बंपर बुआई: धान (चावल), सोयाबीन, मक्का, कपास, अरहर, उड़द और गन्ने जैसी मुख्य खरीफ फसलों की बुआई पूरी तरह से मानसूनी बारिश के समय और मात्रा पर निर्भर करती है। पर्याप्त बारिश से बुआई का दायरा बढ़ेगा और पैदावार रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने की उम्मीद है।
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जलाशयों और भूजल का पुनर्भरण: देश के प्रमुख बांधों और जलाशयों में पानी का स्तर सही बना रहेगा, जिससे आगामी रबी सीजन (गेहूं, सरसों, चना) के लिए सिंचाई और पीने के पानी की समस्या पैदा नहीं होगी।
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महंगाई पर लगाम: खाद्य वस्तुओं और खाद्यान्न के उत्पादन में बढ़ोतरी होने से खाद्य मुद्रास्फीति (Food Inflation) नियंत्रण में रहेगी, जिससे आम आदमी की जेब पर अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ेगा।
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ग्रामीण मांग में उछाल: अच्छी फसल का सीधा मतलब है किसानों की बेहतर आय। इससे ट्रैक्टर, टू-व्हीलर, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स और एफएमसीजी (FMCG) सामानों की ग्रामीण मांग में जबरदस्त सुधार देखने को मिलेगा।
देश के किन हिस्सों में होगी झमाझम बारिश? क्षेत्रीय मौसम का हाल
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, पॉजिटिव आईओडी का सबसे अनुकूल प्रभाव मध्य भारत, दक्षिण भारत के प्रायद्वीपीय भागों और उत्तर-पश्चिम भारत के राज्यों में देखने को मिलेगा।
महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, गुजरात, राजस्थान, छत्तीसगढ़, ओडिशा, कर्नाटक, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों में मानसूनी हवाएं काफी मजबूत रहेंगी। इन राज्यों में समय-समय पर मूसलाधार बारिश का दौर जारी रहेगा, जो खेती-किसानी के लिए बेहद फायदेमंद रहेगा। इसके अलावा, उत्तर भारत के मैदानी इलाकों जैसे उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब और बिहार में भी मानसूनी बारिश का पैटर्न संतुलित रहने की संभावना है।
कुल मिलाकर, अल-नीनो की काली छाया के बावजूद 'पॉजिटिव आईओडी' भारत के लिए ढाल बनकर खड़ा हो गया है। WMO की इस रिपोर्ट ने यह साफ कर दिया है कि प्रकृति का संतुलन भारतीय मानसून की रक्षा करने में सक्षम है और इस साल देश में झमाझम बारिश का दौर जारी रहने की पूरी उम्मीद है।
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