
News India Live, Digital Desk: दक्षिण भारतीय सिनेमा के सुपरस्टार जोसेफ विजय, जिन्हें उनके प्रशंसक प्यार से ‘थलापति’ बुलाते हैं, अब फिल्मी पर्दे से निकलकर राजनीति के अखाड़े में अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। साल 2026 के तमिलनाडु विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक गलियारों में अभी से सुगबुगाहट तेज हो गई है। चर्चा इस बात की है कि क्या विजय अपनी पार्टी ‘तमिलगा वेत्री कड़गम’ (TVK) के जरिए वही करिश्मा दोहरा पाएंगे जो कभी एमजी रामचंद्रन (MGR) और जे. जयललिता ने किया था। शुरुआती रुझान और विशेषज्ञों का आकलन उन्हें राज्य की राजनीति में एक निर्णायक भूमिका यानी ‘किंगमेकर’ के रूप में देख रहा है।एमजीआर और जयललिता की विरासत का ‘विजय’ अवतार?तमिलनाडु की राजनीति हमेशा से फिल्मी सितारों और द्रविड़ विचारधारा के इर्द-गिर्द घूमती रही है। एमजीआर और जयललिता ने फिल्मी पर्दे की अपनी लोकप्रियता को जिस तरह से वोट बैंक में बदला, विजय की राह भी कुछ वैसी ही नजर आती है। उनकी रैलियों में उमड़ने वाली लाखों की भीड़ यह बताने के लिए काफी है कि युवाओं और महिलाओं के बीच उनका जबरदस्त क्रेज है। जानकारों का मानना है कि यदि विजय डीएमके (DMK) और एआईएडीएमके (AIADMK) के पारंपरिक वोट बैंक में सेंध लगाने में कामयाब रहे, तो 2026 के नतीजे चौंकाने वाले हो सकते हैं।क्या कहते हैं शुरुआती समीकरण और सर्वे?हालांकि चुनाव में अभी समय है, लेकिन हालिया राजनीतिक चर्चाओं और एग्जिट पोल के ऐतिहासिक आंकड़ों के आधार पर यह विश्लेषण किया जा रहा है कि विजय की पार्टी ‘वोट कटवा’ नहीं, बल्कि ‘सीट विजेता’ बनकर उभर सकती है। अगर राज्य में किसी भी बड़े गठबंधन (DMK या AIADMK) को पूर्ण बहुमत नहीं मिलता है, तो ऐसी स्थिति में विजय की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण हो जाएगी। उनकी पार्टी का स्टैंड यह तय करेगा कि चेन्नई के ‘सेंट जॉर्ज फोर्ट’ पर किसका झंडा फहराएगा।द्रविड़ राजनीति के बीच नई चुनौतीविजय के सामने सबसे बड़ी चुनौती तमिलनाडु की गहरी जड़ें जमा चुकी द्रविड़ राजनीति और भ्रष्टाचार विरोधी दावों के बीच अपनी जगह बनाना है। जहां सत्ताधारी डीएमके अपने ‘द्रविड़ मॉडल’ पर टिकी है, वहीं विपक्षी एआईएडीएमके अपनी वापसी की कोशिश में है। इन सबके बीच विजय का ‘साफ-सुथरी राजनीति’ का नारा कितना असर करता है, यह देखने वाली बात होगी। उनके प्रशंसक उन्हें सिर्फ एक अभिनेता के तौर पर नहीं, बल्कि एक ऐसे नेता के रूप में देख रहे हैं जो राज्य की राजनीति की दिशा और दशा बदल सकता है।
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