Saturday , June 13 2026

अंजना ओम कश्यप बनाम खान सर: दिल्ली हाई कोर्ट ने तुरंत वीडियो हटाने से किया इनकार, खान सर को नोटिस जारी कर मांगा जवाब

अंजना ओम कश्यप बनाम खान सर: दिल्ली हाई कोर्ट ने तुरंत वीडियो हटाने से किया इनकार, खान सर को नोटिस जारी कर मांगा जवाब

नीट (NEET) पेपर लीक विवाद के बाद शुरू हुई देश के जाने-माने ऑनलाइन एजुकेटर खान सर (फैसल खान) और सीनियर टीवी पत्रकार अंजना ओम कश्यप की कानूनी लड़ाई में एक नया और बड़ा मोड़ आ गया है। दिल्ली हाई कोर्ट ने सोमवार को इस हाई-प्रोफाइल मानहानि मामले पर सुनवाई करते हुए अंजना ओम कश्यप और टीवी टुडे नेटवर्क को तुरंत कोई अंतरिम राहत देने से साफ इनकार कर दिया है।

न्यूज एंकर अंजना ओम कश्यप ने अदालत से गुहार लगाई थी कि यूट्यूब, इंस्टाग्राम और एक्स (ट्विटर) जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर उनके खिलाफ चल रही तमाम आपत्तिजनक और मानहानिकारक सामग्री को तुरंत हटाने (Take Down) का अंतरिम आदेश जारी किया जाए। हालांकि, अदालत ने पहले ही दिन इस सामग्री पर रोक लगाने से मना कर दिया।

जस्टिस नीना बंसल कृष्णा की पीठ ने लिया यह फैसला

इस मामले की गंभीरता को देखते हुए दिल्ली हाई कोर्ट की न्यायमूर्ति नीना बंसल कृष्णा की एकल पीठ ने इस पर विचार किया। कोर्ट ने कहा कि किसी भी सामग्री को एकतरफा हटाने का आदेश देने से पहले दूसरे पक्ष की बात सुनना भी उतना ही जरूरी है।

अदालत ने बीच का रास्ता अपनाते हुए खान सर और उनके साथ नामजद अन्य यूट्यूब एजुकेटर्स के खिलाफ कानूनी नोटिस जारी किया है। इस नोटिस के जरिए कोर्ट ने खान सर से उनके खिलाफ की गई टिप्पणियों और वीडियो को लेकर अपना आधिकारिक पक्ष और जवाब दाखिल करने को कहा है।

कानूनी लड़ाई का पूरा घटनाक्रम: एक नजर में

इस विवाद की शुरुआत से लेकर अदालत के ताजा रुख को हम नीचे दी गई समय-सारणी से आसानी से समझ सकते हैं:

क्या है पूरा विवाद?

आपको बता दें कि यह पूरी कानूनी जंग मुख्य रूप से पेशेवर साख और अभिव्यक्ति की आजादी के बीच फंसी हुई है। एंकर अंजना ओम कश्यप का दावा है कि एक पत्रकार के रूप में सवाल उठाना उनका काम था, लेकिन उसके जवाब में खान सर और अन्य यूट्यूबर्स ने जिस तरह की अभद्र और मानहानिकारक भाषा का इस्तेमाल किया, उसने समाज में उनकी और उनके चैनल की विश्वसनीयता को गहरी चोट पहुँचाई है। इसी के एवज में उन्होंने २ करोड़ रुपये के हर्जाने की मांग की है।

दूसरी तरफ, सोशल मीडिया पर मौजूद लाखों छात्र और शिक्षक इस लड़ाई को अपनी आवाज दबाने की कोशिश के रूप में देख रहे हैं। अब जब हाई कोर्ट ने तुरंत वीडियो हटाने पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है, तो सबकी नजरें 17 जून को होने वाली अगली सुनवाई पर टिक गई हैं। उस दिन यह साफ हो पाएगा कि खान सर अदालत में अपनी टिप्पणियों के बचाव में क्या दलीलें पेश करते हैं।