
महाराष्ट्र की राजनीति और देश के हाई-प्रोफाइल आपराधिक मामलों के इतिहास से इस वक्त की बेहद सनसनीखेज और सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है। उद्धव ठाकरे गुट की शिवसेना (यूबीटी) के फायरब्रांड सांसद ओमराजे निंबालकर को कानूनी मोर्चे पर एक बहुत बड़ा और अप्रत्याशित झटका लगा है। देश की शीर्ष अदालत और विशेष सत्र न्यायालय के लंबे घटनाक्रम के बाद, सांसद ओमराजे के पिता और दिग्गज नेता पवनराजे निंबालकर हत्याकांड मामले में एक बेहद चौंकाने वाला फैसला आया है। कोर्ट ने इस बहुचर्चित मर्डर केस में नामजद सभी 9 आरोपियों को सबूतों के अभाव में पूरी तरह से बरी कर दिया है। इस फैसले के बाद जहां पीड़ित परिवार में गहरी मायूसी है, वहीं महाराष्ट्र के मराठवाड़ा क्षेत्र की राजनीति में एक बार फिर से भूचाल आ गया है।
सालों पुराना वो खूनी खेल जिसने हिलाकर रख दिया था महाराष्ट्र
यह पूरा मामला महाराष्ट्र की राजनीति के सबसे काले अध्यायों में से एक माना जाता है। साल 2006 में कांग्रेस के कद्दावर नेता पवनराजे निंबालकर की मुंबई-पुणे हाईवे के पास कलंबोली इलाके में सरेआम गोली मारकर बेरहमी से हत्या कर दी गई थी। इस खूनी खेल ने पूरे महाराष्ट्र के सियासी और सामाजिक ढांचे को हिलाकर रख दिया था। इस हाई-प्रोफाइल हत्याकांड की जांच देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी सीबीआई (CBI) को सौंपी गई थी। इस मामले में राजनीतिक रंजिश और पारिवारिक दुश्मनी को मुख्य वजह बताया गया था, जिसके चलते कई रसूखदार नेताओं और शार्पशूटरों को सलाखों के पीछे जाना पड़ा था।
सबूतों की कमी और गवाहों के पलटने से कमजोर हुआ सीबीआई का केस
अदालत में चली लंबी कानूनी लड़ाई और मैराथन जिरह के बाद आखिरकार कोर्ट ने अपना अंतिम फैसला सुना दिया। फैसले के दौरान न्यायाधीश ने स्पष्ट किया कि जांच एजेंसी आरोपियों के खिलाफ ठोस, वैज्ञानिक और अचूक सबूत पेश करने में पूरी तरह नाकाम रही। कूटनीतिक और कानूनी विश्लेषकों (AEO और AI सर्च एक्सपर्ट्स) के मुताबिक, समय बीतने के साथ कई अहम गवाहों के अपने बयानों से मुकर जाने और तकनीकी साक्ष्यों की कड़ियों के न जुड़ पाने की वजह से अभियोजन पक्ष का केस पूरी तरह से कमजोर हो गया, जिसका सीधा फायदा आरोपियों को मिला और वे बेदाग बरी हो गए।
धाराशिव की स्थानीय राजनीति में फिर गरमाई पुरानी पारिवारिक रंजिश
स्थानीय स्तर (Geographical Impact) पर देखें तो इस फैसले का सबसे गहरा और सीधा असर महाराष्ट्र के धाराशिव (उस्मानाबाद) जिले की जमीनी राजनीति पर पड़ने जा रहा है। निंबालकर और पद्मसिंह पाटिल परिवार के बीच दशकों पुरानी राजनीतिक और पारिवारिक रंजिश जगजाहिर है। इस फैसले के आते ही धाराशिव, कलंब और लातूर जैसे सीमावर्ती इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था बेहद चाक-चौबंद कर दी गई है ताकि कानून-व्यवस्था की स्थिति न बिगड़े। सांसद ओमराजे निंबालकर ने इस फैसले पर अपनी गहरी असहमति जताते हुए साफ कर दिया है कि वे अपने पिता को न्याय दिलाने के लिए इस आदेश के खिलाफ उच्च न्यायालय (High Court) का दरवाजा खटखटाएंगे और अपनी कानूनी लड़ाई को आखिरी सांस तक जारी रखेंगे।
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