
ईरान ने एक बार फिर सीमा पार जाकर आतंकवाद के खिलाफ सर्जिकल स्ट्राइक जैसी बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। ईरानी सुरक्षा बलों ने पाकिस्तान की सीमा से सटे रास्क (Rask) इलाके में आतंकी संगठन जैश-अल-अदल के कई खूंखार आतंकियों को मार गिराया है। यह वही आतंकी संगठन है जिस पर भारतीय नागरिक कुलभूषण जाधव के अपहरण और उन्हें पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI को सौंपने का गंभीर आरोप है। ईरान की इस कार्रवाई ने न केवल जाधव के गुनहगारों को सबक सिखाया है, बल्कि पाकिस्तान के आतंकी सुरक्षित ठिकानों की पोल भी खोल दी है।रास्क में खूनी मुठभेड़: ईरान का ‘रिवेंज’ ऑपरेशनईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) के मुताबिक, खुफिया जानकारी मिली थी कि जैश-अल-अदल के आतंकी रास्क क्षेत्र में एक बड़े हमले की योजना बना रहे हैं। इसके बाद ईरानी बलों ने घेराबंदी कर आतंकियों पर धावा बोल दिया। घंटों चली इस मुठभेड़ में संगठन के कई टॉप कमांडर ढेर हो गए। ईरान ने साफ कर दिया है कि वह अपनी सीमाओं की सुरक्षा के लिए किसी भी हद तक जाएगा। बता दें कि जैश-अल-अदल लंबे समय से ईरान के सिस्तान-बलूचिस्तान प्रांत में आतंकी गतिविधियों को अंजाम देता रहा है, जिसे पाकिस्तान का मौन समर्थन प्राप्त है।कुलभूषण जाधव केस से जुड़ा है इस संगठन का काला इतिहासभारतीय खुफिया एजेंसियों का मानना है कि साल 2016 में कुलभूषण जाधव का ईरान के चाबहार से अपहरण जैश-अल-अदल (जिसे पहले जुंदुल्लाह के नाम से भी जाना जाता था) के गुर्गों ने ही किया था। इन आतंकियों ने जाधव को अगवा कर पाकिस्तान सीमा में धकेल दिया था, जहाँ से उनकी गिरफ्तारी दिखाई गई। ईरान द्वारा इस संगठन के खात्मे को भारत के नजरिए से भी एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है, क्योंकि जाधव को झूठे केस में फंसाने वाले मोहरे अब एक-एक कर मिट्टी में मिल रहे हैं।’पाकिस्तानी सरजमीं का इस्तेमाल बर्दाश्त नहीं’ – तेहरान की दोटूकइस हमले के बाद तेहरान ने इस्लामाबाद को कड़ी चेतावनी दी है। ईरान ने स्पष्ट किया है कि वह बार-बार पाकिस्तान को अपनी जमीन का इस्तेमाल आतंकी गतिविधियों के लिए न होने देने की चेतावनी दे चुका है। पिछले कुछ समय में ईरान ने कई बार पाकिस्तानी सीमा के भीतर मिसाइल और ड्रोन हमले किए हैं, जिससे दोनों देशों के बीच तनाव चरम पर है। ईरान का आरोप है कि जैश-अल-अदल जैसे संगठनों को पाकिस्तानी सेना का संरक्षण मिलता है, जो ईरानी सीमा रक्षकों पर घात लगाकर हमले करते हैं।आतंकियों के पास मिले अमेरिकी हथियार और विदेशी फंडिंग के सबूतमुठभेड़ के बाद मारे गए आतंकियों के पास से भारी मात्रा में विदेशी हथियार, नाइट विजन डिवाइस और सैटेलाइट फोन बरामद हुए हैं। ईरानी मीडिया के अनुसार, ये आतंकी न केवल धार्मिक कट्टरपंथ फैला रहे थे, बल्कि इन्हें पश्चिम से भारी फंडिंग भी मिल रही थी ताकि ईरान में अस्थिरता पैदा की जा सके। इस कार्रवाई के बाद पाकिस्तान की शहबाज शरीफ सरकार बैकफुट पर है, क्योंकि वह अंतरराष्ट्रीय मंच पर खुद को आतंकवाद का पीड़ित बताती रही है, जबकि उसके अपने घर में ईरान के दुश्मन फल-फूल रहे हैं।
UK News