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पाकिस्तान के ऑयल रिफाइनरी पर हमला बलूचिस्तान में बंदूकधारियों का तांडव, क्या भारत और अमेरिका के डर से कांप रहा है इस्लामाबाद?

News India Live, Digital Desk: पड़ोसी देश पाकिस्तान एक बार फिर भीषण आतंकी हमले से दहल उठा है। इस बार निशाना बनी है पाकिस्तान की ‘नेशनल रिफाइनरी लिमिटेड’ (NRL)। बलूचिस्तान के दारीगवान (Darigwan) स्थित रिफाइनरी साइट पर अज्ञात बंदूकधारियों ने अंधाधुंध फायरिंग कर भारी तबाही मचाने की कोशिश की। इस हमले ने न केवल पाकिस्तान की सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर उसकी बदहाली को भी उजागर कर दिया है। हमले के बाद से पूरे इलाके को छावनी में तब्दील कर दिया गया है और सेना का ‘क्लीयरेंस ऑपरेशन’ जारी है।आधी रात को रिफाइनरी पर धावा: गोलियों की तड़तड़ाहट से गूंजा बलूचिस्तानमिली जानकारी के अनुसार, हमलावर अत्याधुनिक हथियारों से लैस थे और उन्होंने रिफाइनरी के सुरक्षा घेरे को तोड़ते हुए भीतर घुसने का प्रयास किया। सूत्रों का कहना है कि आतंकियों का मकसद रिफाइनरी को उड़ाकर पाकिस्तान की पहले से चरमराई अर्थव्यवस्था की कमर तोड़ना था। रिफाइनरी साइट पर हुए इस हमले के बाद पाकिस्तानी सुरक्षा बलों और बंदूकधारियों के बीच घंटों तक मुठभेड़ चली। हालांकि, अभी तक किसी भी संगठन ने इस हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है, लेकिन शक की सुई बलूच अलगाववादी समूहों की ओर घूम रही है।भारत और अमेरिका का डर: क्या है असली ‘खौफ’?दिलचस्प बात यह है कि इस हमले के बाद पाकिस्तानी मीडिया और हुकूमत में भारत और अमेरिका को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। पाकिस्तान अक्सर अपने यहाँ होने वाले आतंकी हमलों के लिए भारत पर आरोप लगाता रहा है, जबकि हकीकत यह है कि उसकी अपनी दमनकारी नीतियों के कारण बलूचिस्तान में विद्रोह भड़का हुआ है। वहीं, अमेरिका द्वारा बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA) को वैश्विक आतंकी संगठन घोषित किए जाने के बावजूद वहां हमलों का सिलसिला नहीं रुक रहा है। पाकिस्तान को डर है कि अगर वह अपने ऊर्जा संस्थानों की सुरक्षा नहीं कर पाया, तो विदेशी निवेश पूरी तरह बंद हो जाएगा।चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) पर मंडराया खतरायह हमला उस समय हुआ है जब पाकिस्तान चीन के साथ मिलकर अरबों डॉलर के CPEC प्रोजेक्ट को बचाने की कोशिश कर रहा है। बलूचिस्तान वह इलाका है जहाँ चीन का सबसे ज्यादा निवेश है। रिफाइनरी पर हमले ने चीनी इंजीनियरों और निवेशकों में खौफ पैदा कर दिया है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इसी तरह तेल और गैस के भंडारों पर हमले होते रहे, तो पाकिस्तान अंधेरे में डूब सकता है। रिफाइनरी लिमिटेड ने एक बयान जारी कर कहा है कि वे नुकसान का आकलन कर रहे हैं, लेकिन फिलहाल कामकाज ठप है।गृहयुद्ध की ओर बढ़ता पाकिस्तान: असुरक्षित है तेल भंडारबलूचिस्तान में बीते कुछ महीनों में सेना, खदानों और अब रिफाइनरी पर हुए हमलों ने यह साबित कर दिया है कि वहां गृहयुद्ध जैसी स्थिति है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि इस्लामाबाद उनके प्राकृतिक संसाधनों को लूट रहा है, जिसके जवाब में ये हमले हो रहे हैं। इस ताजा हमले ने शहबाज शरीफ सरकार की नींद उड़ा दी है, क्योंकि एक तरफ महंगाई की मार है और दूसरी तरफ देश के भीतर सुरक्षित रहना भी नामुमकिन होता जा रहा है।