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जम्मू-कश्मीर में कार्रवाई जमात-ए-इस्लामी से जुड़े 58 स्कूलों पर सरकार का कब्जा, छात्रों के भविष्य के लिए लिया गया फैसला

News India Live, Digital Desk: जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने घाटी में सक्रिय प्रतिबंधित संगठन जमात-ए-इस्लामी (JeI) और उससे जुड़े फलाह-ए-आम ट्रस्ट (FAT) के खिलाफ एक और सर्जिकल स्ट्राइक की है। शनिवार (18 अप्रैल) को जारी एक आधिकारिक आदेश के तहत, प्रशासन ने जमात से सीधे या परोक्ष रूप से जुड़े 58 निजी स्कूलों की प्रबंधन समितियों को अपने नियंत्रण में ले लिया है। सरकार का यह कदम इन संस्थानों में होने वाली संदिग्ध गतिविधियों को रोकने और शिक्षा व्यवस्था को मुख्यधारा में लाने की दिशा में बड़ा प्रहार माना जा रहा है।खुफिया इनपुट के बाद लिया गया एक्शनशिक्षा विभाग के सचिव द्वारा जारी आदेश के अनुसार, खुफिया एजेंसियों की रिपोर्ट में इन 58 स्कूलों के जमात-ए-इस्लामी के साथ संगठनात्मक और परिचालन संबंध पाए गए थे।मैनेजमेंट टेकओवर: इन स्कूलों की पुरानी प्रबंधन समितियों को भंग कर दिया गया है। अब संबंधित जिलों के डिप्टी कमिश्नर (DC) इन स्कूलों के प्रबंधन की कमान संभालेंगे।बाधित नहीं होगी पढ़ाई: सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह कार्रवाई केवल प्रबंधन के खिलाफ है। स्कूलों में कक्षाएं और परीक्षाएं सुचारू रूप से चलती रहेंगी ताकि छात्रों का शैक्षणिक भविष्य प्रभावित न हो।जिलावार आंकड़ों में बारामूला सबसे आगेप्रशासन द्वारा अधिग्रहित किए गए 58 स्कूलों में से सबसे अधिक संख्या उत्तरी कश्मीर के बारामूला जिले में है।बारामूला: 29 स्कूलपुलवामा: 07 स्कूलकुलगाम और कुपवाड़ा: 05-05 स्कूलअन्य जिले: शेष स्कूल अनंतनाग और बडगाम सहित अन्य हिस्सों में स्थित हैं।क्यों बैन है जमात-ए-इस्लामी?गृह मंत्रालय (MHA) ने 2019 में ही जमात-ए-इस्लामी जम्मू और कश्मीर को गैर-कानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत एक प्रतिबंधित संगठन घोषित किया था। आरोप है कि यह संगठन अलगाववादी विचारधारा को बढ़ावा देने और आतंकी फंडिंग में शामिल रहा है। करीब आठ महीने पहले भी सरकार ने ऐसे ही 215 स्कूलों पर नियंत्रण किया था।नई शिक्षा नीति (NEP) के तहत होगा संचालनडिप्टी कमिश्नरों को निर्देश दिए गए हैं कि वे इन स्कूलों में राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के मानकों को लागू करें। सरकार का लक्ष्य इन संस्थानों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करना और किसी भी प्रकार की कट्टरपंथी शिक्षा या अलगाववादी विचारधारा के प्रचार-प्रसार को जड़ से खत्म करना है। प्रशासन जल्द ही इन स्कूलों के लिए नई और सत्यापित प्रबंधन समितियों का प्रस्ताव पेश करेगा।