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बिहार राजनीति में भूचाल आरजेडी में टूट के संकेत, तेज प्रताप यादव के बयानों ने बढ़ाई हलचल

News India Live, Digital Desk: बिहार की राजनीति में एक बार फिर राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के भीतर बड़ी फूट की खबरें सुर्खियां बटोर रही हैं। लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव के हालिया बयानों और उनकी गतिविधियों ने इन चर्चाओं को हवा दे दी है कि आरजेडी किसी भी समय दो फाड़ हो सकती है।तेज प्रताप यादव पिछले कुछ समय से अपनी ही पार्टी के कुछ शीर्ष नेताओं के खिलाफ मोर्चा खोले हुए हैं, जिन्हें वे ‘जयचंद’ (गद्दार) करार देते हैं।तेज प्रताप के ‘बागी’ तेवर: मुख्य कारणआरजेडी में इस संभावित टूट के पीछे कई गहरे कारण और हालिया घटनाक्रम बताए जा रहे हैं:’जयचंदों’ के खिलाफ युद्ध: तेज प्रताप यादव ने खुलकर एमएलए मुकेश रोशन, संजय यादव (तेजस्वी के सलाहकार), रमीज और शक्ति सिंह जैसे नेताओं पर उन्हें बदनाम करने और परिवार में दरार डालने का आरोप लगाया है। उनका दावा है कि ये लोग पार्टी को ‘खोखला’ कर रहे हैं।जनशक्ति जनता दल (JJD): तेज प्रताप ने पहले ही अपनी अलग विचारधारा वाली संस्था ‘जनशक्ति जनता दल’ को सक्रिय कर दिया है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि यदि आरजेडी में उनकी अनदेखी जारी रही, तो वह इस संगठन को पूर्ण राजनीतिक दल के रूप में मैदान में उतार सकते हैं।तेजस्वी से बढ़ती दूरियां: भाई तेजस्वी यादव के साथ उनके रिश्तों में कड़वाहट की खबरें अक्सर आती रहती हैं। हाल के कई सार्वजनिक कार्यक्रमों में दोनों भाइयों के बीच ‘कोल्ड वॉर’ साफ देखी गई, जहां तेज प्रताप ने तेजस्वी को पूरी तरह इग्नोर किया।गंभीर आरोप: फरवरी 2026 में एक विस्फोटक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान तेज प्रताप ने यहां तक आरोप लगाया था कि पार्टी के कुछ लोग उनकी हत्या की साजिश रच रहे हैं और उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित कर ‘डिप्रेशन’ की ओर धकेल रहे हैं।बिहार की नई सत्ता संरचना का असरबिहार में सत्ता परिवर्तन (नीतीश कुमार के युग के अंत और सम्राट चौधरी के मुख्यमंत्री बनने) के बाद आरजेडी विपक्ष में है।बीजेपी की नजर: राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि सत्ता से बाहर होने के बाद आरजेडी के भीतर असंतोष बढ़ रहा है। बीजेपी और एनडीए गठबंधन इस आंतरिक कलह का फायदा उठाकर आरजेडी के ‘बागी’ गुट को साधने की कोशिश कर सकते हैं।लालू यादव की चुप्पी: हालांकि लालू प्रसाद यादव ने दोनों भाइयों को एकजुट रखने की कोशिश की है, लेकिन तेज प्रताप के तीखे हमले रुकने का नाम नहीं ले रहे हैं।क्या वाकई टूट जाएगी आरजेडी?वर्तमान स्थिति को देखते हुए तीन संभावित रास्ते नजर आते हैं:तेज प्रताप का निष्कासन: यदि विवाद बढ़ता है, तो पार्टी अनुशासन बनाए रखने के लिए तेज प्रताप पर कड़ी कार्रवाई कर सकती है।नया गठबंधन: तेज प्रताप अपने समर्थकों के साथ अलग होकर किसी नए गठबंधन या निर्दलीय गुट के रूप में उभर सकते हैं।पारिवारिक सुलह: जैसा कि अतीत में हुआ है, लालू यादव एक बार फिर दखल देकर मामले को शांत कर सकते हैं।