News India Live, Digital Desk: भारतीय टेलीविजन के इतिहास में जब भी सबसे सफल पौराणिक धारावाहिकों की चर्चा होती है, तो बी.आर. चोपड़ा की ‘महाभारत’ का नाम सबसे ऊपर आता है। इस शो के हर पात्र ने दर्शकों के दिलों पर अपनी अमिट छाप छोड़ी, लेकिन ‘द्रौपदी’ का किरदार निभाने वाली रूपा गांगुली की लोकप्रियता का आलम ही कुछ और था। आज हम आपको उस दौर की यादों में ले जा रहे हैं जब एक बंगाली अभिनेत्री ने अपनी सशक्त अदाकारी से इतिहास रच दिया था।कभी नहीं भूल सकता वो ‘चीरहरण’ का दृश्यमहाभारत में द्रौपदी का किरदार निभाना कोई आसान काम नहीं था। विशेषकर ‘चीरहरण’ वाले दृश्य को फिल्माना रूपा गांगुली के लिए मानसिक और शारीरिक रूप से बेहद थका देने वाला था। बताया जाता है कि उस सीन को करने के बाद रूपा गांगुली इतनी भावुक हो गई थीं कि वह सेट पर ही फूट-फूटकर रोने लगी थीं। उनकी उस जीवंत अदाकारी ने ही द्रौपदी के दुख और क्रोध को घर-घर तक पहुँचा दिया था।ऑडिशन में कैसे मिली थी ‘द्रौपदी’ की भूमिका?बी.आर. चोपड़ा एक ऐसी अभिनेत्री की तलाश में थे जिसमें गरिमा, क्रोध और सुंदरता का सही मिश्रण हो। रूपा गांगुली उस समय बंगाली सिनेमा में सक्रिय थीं। जब उन्होंने ऑडिशन दिया, तो उनकी हिंदी उतनी स्पष्ट नहीं थी, लेकिन उनकी आँखों की चमक और संवाद अदायगी के तरीके ने चोपड़ा साहब को प्रभावित कर लिया। इसके बाद रूपा ने अपनी हिंदी पर कड़ी मेहनत की और खुद को पूरी तरह से द्रौपदी के सांचे में ढाल लिया।रूपा गांगुली: एक अभिनेत्री से राजनेता तक का सफरमहाभारत के बाद रूपा गांगुली ने कई फिल्मों और धारावाहिकों में काम किया। उन्होंने हिंदी के साथ-साथ बंगाली सिनेमा में भी अपनी पहचान बनाई। अभिनय के बाद उन्होंने राजनीति की ओर रुख किया और भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सदस्य बनीं। वह राज्यसभा सांसद भी रहीं। हालांकि, आज भी जब लोग उन्हें देखते हैं, तो उनके मन में ‘द्रौपदी’ की वही छवि उभरती है।बी.आर. चोपड़ा की महाभारत का जादू आज भी बरकरार1988-1990 के बीच प्रसारित हुए इस धारावाहिक के दौरान सड़कों पर सन्नाटा पसर जाता था। रूपा गांगुली के साथ-साथ नीतीश भारद्वाज (कृष्ण), पुनीत इस्सर (दुर्योधन) और मुकेश खन्ना (भीष्म) जैसे कलाकारों ने इस शो को अमर बना दिया। आज के दौर में भी जब महाभारत का पुनः प्रसारण होता है, तो रूपा गांगुली की स्क्रीन उपस्थिति नई पीढ़ी को भी उतना ही प्रभावित करती है।
UK News