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मोटा अनाज कोदों की वैज्ञानिक खेती से श्री बलजीत सिंह को मिली नई पहचान

किसान श्री बलजीत सिंह पुत्र श्री राम किशोर सिंह जनपद सीतापुर के विकास खण्ड हरगाँव के अंतर्गत आने वाले ग्राम क्योटिकला के मूल निवासी हैं और उनकी शैक्षिक योग्यता इंटरमीडिएट है। वे कृषि संबंधी नवीन जानकारियों को समझकर व्यवहार में लाने में सक्षम रहे हैं। सीमित संसाधनों के बावजूद वे स्वभाव से जिज्ञासु, मेहनती और प्रगतिशील किसान हैं, इन्होने खेती को पारम्परिक उपार्जन के बजाय आधुनिक वैज्ञानिक तकनीकों के साथ लाभदायक व्यवसाय के रूप में अपनाया है।
उत्तर प्रदेश की डबल इंजन सरकार माननीय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी के नेतृत्व में, मोटे अनाजों (मिलेट्स) सहित कोदों जैसी पौष्टिक फसलों के क्षेत्रफल एवं उत्पादकता बढ़ाने, किसानों की आय दोगुनी करने तथा “अन्नदाता से उद्यमी” बनाने की दिशा में निरन्तर प्रयासरत है। राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं, कृषि यंत्रों पर अनुदान, फसल बीमा, मृदा परीक्षण एवं संवर्धन कार्यक्रमों तथा मोटे अनाजों के प्रचार-प्रसार से जनपद सीतापुर सहित प्रदेश में कोदों उत्पादन में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। विकास खण्ड हरगाँव के ग्राम क्योटिकला के लगनशील कृषक श्री बलजीत सिंह की यह सफलता गाथा इन्हीं प्रयासों का प्रेरक उदाहरण है, जिन्होंने वैज्ञानिक खेती अपनाकर कोदों उत्पादन में नया कीर्तिमान स्थापित किया।
श्री बलजीत सिंह लघु श्रेणी के कृषक हैं। उनके पास कुल लगभग 1.840 हेक्टेयर कृषि योग्य भूमि है, जिसे उन्होंने समुचित योजना के साथ कोदों उत्पादन के लिए उपयोग में लिया। इतनी सीमित भूमि होने के बावजूद उन्होंने खेती को अपना मुख्य व्यवसाय मानते हुए भूमि के सूक्ष्म प्रबंधन, उचित फसल चक्र और उन्नत किस्मों के चयन के माध्यम से प्रति इकाई क्षेत्र में अधिकतम उत्पादन का लक्ष्य निर्धारित किया। वे नियमित रूप से कृषि विभाग के अधिकारियों से संपर्क कर नवीनतम खेती विधा की जानकारी प्राप्त किये और कृषि विभाग द्वारा उन्हें निःशुल्क बीज किट, कीट रसायन, कृषि यन्त्र और उर्वरक दिये गये।
खेत की तैयारी में श्री बलजीत सिंह गहरी जुताई, पाटा तथा समतलीकरण पर विशेष ध्यान देते हैं, जिससे नमी संरक्षण, जल निकास और जड़ विकास बेहतर होता है। कोदों की बुवाई उन्होंने अनुशंसित कतार पद्धति से की, जिससे पौधे से पौधे तथा कतार से कतार की उचित दूरी बनी रही। वायु संचार एवं सूर्य प्रकाश की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित हुई और पौधों की वृद्धि सुदृढ़ रही। मृदा परीक्षण की रिपोर्ट के आधार पर उन्होंने संतुलित उर्वरक प्रबंधन अपनाया, जिसमें नत्रजन, फास्फोरस, पोटाश के साथ-साथ जैविक खाद और वर्मी कम्पोस्ट का समावेश किया। जिससे मृदा की उर्वराशक्ति में वृद्धि के साथ दीर्घकालिक स्थिरता भी बनी रहती है।
कृषि विभाग द्वारा आयोजित गोष्ठियों, प्रशिक्षणों एवं खेत दिवसों में नियमित भाग लेकर श्री बलजीत सिंह ने कोदों की उन्नत किस्मों, ट्राइकोडर्मा से बीजोपचार, उर्वरक प्रबंधन तथा कीट‑रोग नियंत्रण के वैज्ञानिक तरीकों की जानकारी अर्जित की। उन्होंने फसल चक्र, अवशेष प्रबंधन, वर्मी कम्पोस्ट तथा जैविक विधियों को भी अपनी खेती में सम्मिलित किया, जिससे रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम हुई और उत्पादन लागत नियंत्रित रही। कोदों में कीटों तथा रोगों से बचाव हेतु उन्होंने अनुशंसित कीटनाशकों एवं फफूंदनाशकों का समयबद्ध प्रयोग किया, जिससे फसल स्वस्थ रहकर अपनी पूर्ण क्षमता से उत्पादन दे सकी।
डबल इंजन सरकार के प्रोत्साहन तथा कृषि विभाग के तकनीकी मार्गदर्शन के बाद श्री बलजीत सिंह ने कोदों की उन्नत प्रजाति ‘सी०जी० कोदो-3’ को अपनाया, जो उच्च उपज क्षमता वाली प्रमाणित किस्म है। उन्होंने समय पर खेत की तैयारी, गुणवत्तायुक्त एवं शुद्ध बीज का उपयोग, अनुशंसित बीज दर, संतुलित उर्वरक एवं नमी प्रबंधन, निराई‑गुड़ाई तथा कीट‑रोग नियंत्रण की सम्पूर्ण वैज्ञानिक पैकेज ऑफ प्रैक्टिस को खेत में लागू किया। परिणामस्वरूप उनके खेतों में कोदों की फसल समान, मजबूत, लम्बी बालियों वाली तथा दाना भराई से परिपूर्ण दिखाई दी, जो सामान्य किसानों की फसलों की तुलना में कहीं अधिक थी।
श्री बलजीत सिंह ने राज्य स्तरीय फसल प्रतियोगिता में भाग लेकर कोदों फसल श्रेणी में अपनी मेहनत और वैज्ञानिक खेती का उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। क्रॉप कटिंग के आधार पर उनकी कोदों किस्म ‘सी०जी० कोदो-3’ से 22 कुंतल प्रति हेक्टेयर की उल्लेखनीय उपज दर्ज की गई, जो प्रदेश के औसत उत्पादन से काफी अधिक है और मोटे अनाजों की श्रेणी में एक प्रेरक उपलब्धि है। इस उत्कृष्ट उत्पादकता के आधार पर उन्हें “कोदों उत्पादन” वर्ग में प्रथम पुरस्कार के लिए चयनित किया गया, जिसने न केवल उनके व्यक्तिगत आत्मविश्वास को बढ़ाया, बल्कि पूरे ग्राम क्योटिकला एवं विकास खण्ड हरगाँव का मान भी बढ़ाया।
राज्य स्तरीय फसल प्रतियोगिता में प्रथम स्थान प्राप्त करने पर उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा श्री बलजीत सिंह को 75,000 रुपये की धनराशि, प्रशस्ति पत्र एवं शाल प्रदान कर सम्मानित किया गया। सरकार द्वारा दी गई यह सम्मान राशि उन्होंने अपनी खेती के आधुनिकीकरण, जैसे उन्नत कृषि यंत्र, बेहतर सिंचाई सुविधाएँ तथा जैविक खाद इकाई स्थापित करने में लगाने का निश्चय किया, जिससे आगे भी उनकी उत्पादकता और लाभ में वृद्धि की पूरी संभावना है। यह सम्मान ग्राम स्तर पर अन्य किसानों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बना, जो अब कोदों सहित अन्य फसलों में भी प्रतियोगिताओं के माध्यम से अपनी क्षमता साबित करने के लिए उत्साहित हैं।
कानपुर देहात के किसान श्री दिग्विजय सिंह ने मक्का उत्पादन में लहराया सफलता का परचम
उत्तर प्रदेश की ’डबल इंजन सरकार’, माननीय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी के नेतृत्व में, किसानों की आय में वृद्धि, आधुनिक तकनीक के प्रसार तथा “अन्नदाता से उद्यमी” बनाने की दिशा में निरंतर प्रयास कर रही है। राज्य सरकार की समयबद्ध योजनाओं, अनुदानों और वैज्ञानिक खेती के प्रचार-प्रसार से कानपुर देहात सहित समूचे प्रदेश में मक्का, धान एवं अन्य फसलों के उत्पादन में सकारात्मक परिवर्तन देखने को मिला है। विकास खण्ड रसूलाबाद के ग्राम पोवा के लगनशील किसान श्री दिग्विजय सिंह की यह सफलता गाथा इन्हीं प्रयासों का एक प्रेरणादायक उदाहरण है।
श्री दिग्विजय सिंह, पुत्र श्री धनीराम ग्राम पोवा, विकास खण्ड रसूलाबाद, जनपद कानपुर देहात के मूल निवासी हैं। वे स्नातक तक शिक्षित हैं और लघु श्रेणी के कृषक होते हुए भी कृषि को ही अपना प्रमुख व्यवसाय मानते हैं। लगभग 1.60 हेक्टेयर कृषि योग्य भूमि पर निर्भर रहकर उन्होंने कठिन परिश्रम, सीखने की इच्छा और नई तकनीकों को अपनाने के साहस के बल पर अपने क्षेत्र में एक जागरूक और प्रगतिशील किसान के रूप में पहचान बनाई है।
श्री दिग्विजय सिंह के पास कुल 1.60 हेक्टेयर कृषि योग्य भूमि है, जिस पर वे मुख्य रूप से मक्का, आलू एवं मूंगफली की खेती वैज्ञानिक विधि से करते हैं। सिंचाई हेतु उन्होंने स्वयं का नलकूप स्थापित किया है। सीमित जोत के बावजूद वे हर फसल के लिए वैज्ञानिक अनुशंसाओं के अनुसार जुताई, प्रमाणित बीज का प्रयोग तथा कतारों (लाइन) में बुआई की पद्धति अपनाते हैं। वे खेत की तैयारी से लेकर फसल कटाई तक हर चरण में समय और तकनीक का विशेष समन्वय रखते हैं।
विशेष कार्य, तकनीक और प्रशिक्षण’ प्राप्त करते हुए श्री दिग्विजय सिंह लगातार कृषि विभाग के दिशा-निर्देशों का पालन करते हैं। उन्होंने मृदा परीक्षण के आधार पर ही संतुलित उर्वरक एवं कम्पोस्ट का प्रयोग सुनिश्चित किया है। वे जैविक खेती की ओर विशेष ध्यान देते हुए वर्मी कम्पोस्ट, पी.एस.बी. कल्चर एवं ट्राइकोडर्मा का नियमित उपयोग करते हैं। प्रमाणित बीज का प्रयोग और वैज्ञानिक पद्धति से की गई खेती ने उन्हें लागत नियंत्रित रखते हुए उत्पादन बढ़ाने में बड़ी सफलता दिलाई है।
उत्कृष्ट उत्पादन और कीर्तिमान’ स्थापित करने के लिए प्रोत्साहन और विभागीय मार्गदर्शन के बाद श्री दिग्विजय सिंह ने मक्का फसल की उन्नत प्रजाति ’एन.एम.एच.-920’ का चयन किया। वैज्ञानिक विधि से बुआई और उचित पोषक तत्व प्रबंधन के परिणामस्वरूप, उन्हें मक्का की उक्त प्रजाति में 58.40 कुंतल प्रति हेक्टेयर की उत्कृष्ट उपज प्राप्त हुई। क्रॉप कटिंग के आधार पर प्राप्त यह उत्पादन क्षेत्र के सामान्य उत्पादन से कहीं अधिक है और अन्य कृषकों के लिए एक मानक बन गया है।
श्री दिग्विजय सिंह ने राज्य स्तरीय फसल प्रतियोगिता में भाग लेकर मक्का फसल की श्रेणी में अपनी मेहनत का उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। 58.40 कुंतल प्रति हेक्टेयर उत्पादन हासिल कर उन्होंने ’तृतीय स्थान’ प्राप्त किया। उनकी इस उल्लेखनीय उपलब्धि के लिए उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा उन्हें ’50,000 रुपये’ की धनराशि, प्रशस्ति पत्र एवं शाल प्रदान कर सम्मानित किया गया है। श्री दिग्विजय सिंह इस सफलता का श्रेय राज्य सरकार की किसान-हितैषी नीतियों और विभाग से मिले तकनीकी सहयोग को देते हैं। अपनी इस सफलता के लिए श्री सिंह ने प्रदेश सरकार द्वारा दी गई सहायता की भूरि-भूरि प्रसंसा की है।