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राज्यसभा चुनाव: मीनाक्षी नटराजन की याचिका पर आज सुनवाई करेगा सुप्रीम कोर्ट

देश के राजनैतिक गलियारों से लेकर कानूनी हलकों तक इस समय मध्य प्रदेश के राज्यसभा चुनाव को लेकर भारी हलचल मची हुई है। मध्य प्रदेश से कांग्रेस की कद्दावर नेता और राज्यसभा उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रिटर्निंग ऑफिसर द्वारा खारिज किए जाने के बाद यह पूरा हाई-प्रोफाइल विवाद देश की सबसे बड़ी अदालत यानी सुप्रीम कोर्ट के मुख्य दरवाजे पर पहुंच चुका है। कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन ने अपने नामांकन को रद्द किए जाने के फैसले को पूरी तरह गैर-कानूनी बताते हुए सुप्रीम कोर्ट में विशेष याचिका दायर की है। गुरुवार को इस संवेदनशील मामले पर तुरंत सुनवाई करने का विशेष अनुरोध किया गया था, जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट इस मामले की गंभीरता को देखते हुए आज यानी शुक्रवार 12 जून 2026 को विस्तृत सुनवाई करने के लिए पूरी तरह राजी हो गया है। संपादक जीत कुमार की इस विशेष डिजिटल रिपोर्ट में जानिए कि कैसे यह कानूनी लड़ाई मध्य प्रदेश की राज्यसभा सीट के चुनावी गणित को पूरी तरह बदल सकती है।

अभिषेक मनु सिंघवी ने दी तीखी दलीलें, चुनाव परिणामों की घोषणा पर अंतरिम रोक लगाने से सुप्रीम कोर्ट का इनकार

सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ और माननीय न्यायाधीश जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्र और जस्टिस अतुल एस. चंदुरकर की खंडपीठ के समक्ष मीनाक्षी नटराजन की ओर से देश के दिग्गज और जाने-माने वकील डॉक्टर अभिषेक मनु सिंघवी ने पैरवी की। अदालत में बहस के दौरान सिंघवी ने पुरजोर तरीके से मांग रखी कि जब तक देश की सर्वोच्च अदालत इस पूरे मामले की कानूनी जांच नहीं कर लेती, तब तक इस सीट के लिए हो रहे राज्यसभा चुनाव के अंतिम नतीजे घोषित करने पर पूरी तरह से अंतरिम रोक लगा दी जाए। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव परिणामों की घोषणा पर तुरंत कोई भी अंतरिम रोक लगाने से साफ इनकार कर दिया। अदालत ने याचिकाकर्ता को यह साफ निर्देश दिया कि बशर्ते याचिका की सभी तकनीकी खामियों और कमियों को सुबह तक पूरी तरह से दूर कर लिया जाए, तो कोर्ट आज इस पर विस्तृत सुनवाई करेगा।

चुनाव प्रक्रिया के बीच में अदालती हस्तक्षेप पर उठे गंभीर सवाल, सुप्रीम कोर्ट ने पूछा- कैसे होगी यह याचिका सुनवाई योग्य

गुरुवार को हुई इस प्रारंभिक सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने इस याचिका की पोषणीयता यानी कानूनी वैधता पर बेहद गंभीर और कड़े सवाल खड़े किए। खंडपीठ ने मीनाक्षी नटराजन के वकील से सीधे शब्दों में पूछा कि जब देश में चुनाव की पूरी संवैधानिक प्रक्रिया अपने बीच सफर में चल रही हो, तो ऐसी स्थिति में चुनावी प्रक्रिया के ठीक बीच में लाई गई यह विशेष याचिका कानून के तहत कैसे सुनवाई योग्य (मेंटेनेबल) मानी जा सकती है। हालांकि, वरिष्ठ वकील सिंघवी द्वारा मामले की तात्कालिकता और इसके राजनैतिक महत्व को पूरी तरह समझाने के बाद अदालत ने इस पूरे विवाद पर आज शुक्रवार को अंतिम रूप से सुनवाई करने की अपनी सहमति दे दी।

आपराधिक मामले के स्पष्टीकरण की आड़ में नामांकन खारिज करना गलत, सिंघवी ने जनप्रतिनिधित्व कानून का दिया हवाला

कांग्रेस उम्मीदवार की तरफ से अदालत में दलीलें पेश करते हुए अभिषेक मनु सिंघवी ने रिटर्निंग ऑफिसर (RO) के फैसले को सिरे से खारिज करते हुए इसे कानून की गलत व्याख्या बताया। उन्होंने मुख्य रूप से दलील दी कि रिटर्निंग ऑफिसर द्वारा एक कथित आपराधिक मामले के स्पष्टीकरण न देने की आड़ में नामांकन फॉर्म को रद्द करना पूरी तरह से अनुचित और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ है। सिंघवी ने देश के 'जनप्रतिनिधित्व कानून' (Representation of the People Act) की धाराओं का स्पष्ट रूप से हवाला देते हुए अदालत को बताया कि कानून के मुताबिक किसी भी उम्मीदवार को अपने चुनावी हलफनामे में केवल और केवल उन्हीं आपराधिक मामलों का अनिवार्य रूप से जिक्र करना होता है, जिनमें कानूनन कम से कम दो वर्ष या उससे अधिक की जेल की सजा का कड़ा प्रावधान हो। उन्होंने दावा किया कि मीनाक्षी नटराजन के मामले में तो दूर-दूर तक कोई आपराधिक मुकदमा या केस भी दर्ज नहीं है, बल्कि संबंधित अदालत ने केवल एक शिकायत के आधार पर सामान्य समन जारी किया है।

जानिए किस शिकायत के आधार पर बीजेपी उम्मीदवार महेश केवट की आपत्ति पर रिटर्निंग अफसर ने लिया था बड़ा एक्शन

इस पूरे हाई-प्रोफाइल राजनैतिक विवाद की शुरुआत तब हुई थी जब राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकनों की स्क्रूटनी (जांच) के दौरान रिटर्निंग ऑफिसर ने मीनाक्षी नटराजन का नामांकन पत्र यह कहकर पूरी तरह खारिज कर दिया था कि उन्होंने चुनाव आयोग को एक अधूरा हलफनामा सौंपकर जानकारी छुपाई है। दरअसल, नामांकन के साथ जमा किए जाने वाले अनिवार्य 'फार्म 26' में तेलंगाना की एक स्थानीय अदालत में दर्ज हुई किसी पुरानी शिकायत का कोई उल्लेख नहीं किया गया था। मध्य प्रदेश की सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (BJP) के उम्मीदवार महेश केवट ने इस तकनीकी खामी को पकड़ते हुए रिटर्निंग अफसर के पास लिखित रूप से एक गंभीर शिकायत दर्ज कराई थी। इसी शिकायत को आधार बनाते हुए चुनाव अधिकारी ने कांग्रेस उम्मीदवार का पर्चा खारिज कर दिया था। दूसरी तरफ, चुनाव आयोग की ओर से पेश हुए वकील ने भी कोर्ट में इस मेंशनिंग का कड़ा विरोध करते हुए कहा कि कांग्रेस की तरफ से चुनाव आयोग को इस याचिका की कोई एडवांस कॉपी नहीं सौंपी गई है। अब पूरे देश की नजरें आज सुप्रीम कोर्ट से आने वाले फैसले पर टिकी हैं।