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News India Live, Digital Desk: हिंदू पंचांग के अनुसार, चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से नव संवत्सर 2083 की शुरुआत होने जा रही है। इस दिन को महाराष्ट्र में गुड़ी पड़वा के रूप में बड़े ही उत्साह के साथ मनाया जाता है। यह पर्व न केवल नए साल का प्रतीक है, बल्कि वसंत ऋतु के आगमन और सुख-समृद्धि का भी सूचक है।11 मार्च 2026 की ताजा गणना के अनुसार, इस साल गुड़ी पड़वा की तिथि और मुहूर्त को लेकर कुछ विशेष जानकारियां सामने आई हैं।गुड़ी पड़वा 2026: तिथि और शुभ मुहूर्त (Shubh Muhurat)इस साल चैत्र प्रतिपदा तिथि की शुरुआत और समापन का समय नीचे दिया गया है:गुड़ी पड़वा तिथि: 19 मार्च 2026 (गुरुवार)प्रतिपदा तिथि प्रारंभ: 18 मार्च 2026 को रात 08:15 PM सेप्रतिपदा तिथि समाप्त: 19 मार्च 2026 को रात 09:40 PM तकउदया तिथि के अनुसार: गुड़ी पड़वा का पर्व 19 मार्च को ही मनाया जाएगा।गुड़ी पड़वा का महत्व (Importance)मान्यता है कि इसी दिन ब्रह्मा जी ने सृष्टि की रचना की थी। महाराष्ट्र में लोग अपने घरों के बाहर ‘गुड़ी’ (एक विशेष पताका) फहराते हैं, जिसे विजय और सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है। इसी दिन से चैत्र नवरात्रि की भी शुरुआत होती है।कैसे करें पूजा और क्या लगाएं भोग?गुड़ी सजाना: एक ऊंचे डंडे में रेशमी कपड़ा, नीम की पत्तियां, फूलों की माला और तांबे या चांदी का लोटा उल्टा रखकर गुड़ी तैयार की जाती है।पूजा विधि: सुबह जल्दी स्नान कर सूर्योदय के समय गुड़ी फहराई जाती है और सुख-शांति की प्रार्थना की जाती है।विशेष भोग: इस दिन श्रीखंड और पूरी का विशेष भोग लगाया जाता है। साथ ही नीम की कोमल पत्तियों और गुड़ का मिश्रण खाने की परंपरा है, जो अच्छे स्वास्थ्य का प्रतीक है।
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