News India Live, Digital Desk: हिंदू धर्म में संक्रांति का विशेष महत्व होता है, लेकिन ‘मेष संक्रांति’ का स्थान सबसे ऊपर माना जाता है। इस दिन सूर्य देव मीन राशि से निकलकर अपनी उच्च राशि मेष में प्रवेश करते हैं। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जब सूर्य अपनी उच्च राशि में होते हैं, तो उनका प्रभाव अत्यंत शक्तिशाली और शुभ हो जाता है। साल 2026 में मेष संक्रांति का पर्व उन जातकों के लिए वरदान साबित हो सकता है जो लंबे समय से करियर में मंदी, नौकरी में राजनीति या प्रमोशन न मिलने जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं। इस दिन किए गए कुछ विशेष दान आपकी किस्मत की लकीरें बदल सकते हैं।सौर नववर्ष का आगाज़ और सूर्य का पराक्रममेष संक्रांति को भारतीय ज्योतिष में ‘सौर नववर्ष’ की शुरुआत माना जाता है। सूर्य को ग्रहों का राजा और सफलता, मान-सम्मान व करियर का कारक माना गया है। मेष राशि में सूर्य का गोचर जातक के भीतर साहस और नेतृत्व क्षमता (Leadership) भर देता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन पवित्र नदियों में स्नान और सूर्य देव को अर्घ्य देने से कुंडली के कई दोष शांत हो जाते हैं। विशेष रूप से प्रशासनिक सेवाओं और राजनीति से जुड़े लोगों के लिए यह समय स्वर्णिम अवसर लेकर आता है।करियर की बाधाएं दूर करने के अचूक दानअगर आप कड़ी मेहनत के बाद भी कार्यक्षेत्र में अपनी पहचान नहीं बना पा रहे हैं, तो मेष संक्रांति के दिन ये दान जरूर करें:गुड़ और तांबे का दान: सूर्य देव को प्रसन्न करने के लिए गुड़ और तांबे के बर्तन का दान सबसे श्रेष्ठ माना जाता है। इससे यश और कीर्ति में वृद्धि होती है।लाल वस्त्र और चंदन: लाल रंग सूर्य का प्रिय रंग है। किसी जरूरतमंद को लाल कपड़े या लाल चंदन का दान करने से नौकरी में आ रही रुकावटें दूर होती हैं।सत्तू और जल का दान: इस दिन को सत्तू संक्रांति भी कहा जाता है। गर्मी की शुरुआत में सत्तू और शीतल जल का दान करने से करियर में स्थिरता आती है और मानसिक शांति मिलती है।गेहूं का दान: अन्न दान महादान है। सवा किलो या अपनी शक्ति अनुसार गेहूं का दान करने से आर्थिक तंगी दूर होती है।इन विशेष उपायों से चमकेगा भाग्यदान के साथ-साथ यदि आप कुछ विशेष ज्योतिषीय उपाय भी अपनाते हैं, तो सफलता की संभावना दोगुनी हो जाती है। मेष संक्रांति के दिन सुबह जल्दी उठकर तांबे के लोटे में जल, लाल फूल और अक्षत डालकर सूर्य देव को अर्घ्य दें। अर्घ्य देते समय ‘ॐ घृणि सूर्याय नमः’ मंत्र का जाप करें। इसके अलावा, आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करना करियर के दुश्मनों को परास्त करने और उच्च पद की प्राप्ति के लिए रामबाण माना जाता है।दान का सही समय और सावधानीमेष संक्रांति पर दान का पुण्य फल तभी मिलता है जब वह ‘पुण्य काल’ के भीतर किया जाए। इस दिन सवेरे से ही शुभ मुहूर्त शुरू हो जाता है। दान देते समय मन में सात्विक भाव रखें और अहंकार से बचें। ज्योतिषियों का मानना है कि संक्रांति के दिन किया गया दान न केवल इस जन्म के पापों को काटता है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी सौभाग्य का मार्ग प्रशस्त करता है। अगर आपकी कुंडली में सूर्य कमजोर स्थिति में है, तो यह दिन उसे बलवान करने का सबसे सटीक मौका है।
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