
हिंदू धर्म में मृत्यु के बाद ‘अग्नि संस्कार’ को सबसे पवित्र और अनिवार्य माना गया है। यह मान्यता है कि अग्नि शरीर को पंचतत्वों में विलीन कर आत्मा को मोह-माया के बंधनों से मुक्त करती है। लेकिन, आपने गौर किया होगा कि छोटे बच्चों की मृत्यु होने पर उन्हें मुखाग्नि देने के बजाय दफनाया जाता है। गरुड़ पुराण और अन्य शास्त्रों में इसके पीछे गहरे आध्यात्मिक और तार्किक कारण बताए गए हैं।क्यों नहीं दिया जाता बच्चों को मुखाग्नि?1. आत्मा की शुद्धता और मासूमियत:शास्त्रों के अनुसार, अग्नि संस्कार का उद्देश्य शरीर की अशुद्धियों को जलाना और कर्मों के बंधन से आत्मा को मुक्त करना होता है। छोटे बच्चे निष्कपट और निर्मल होते हैं। उन्होंने संसार में आकर न तो कोई पाप किया होता है और न ही वे सांसारिक मोह (जैसे धन, संपत्ति या रिश्ते) में फंसे होते हैं। उनकी आत्मा पहले से ही शुद्ध और मुक्त मानी जाती है, इसलिए उन्हें अग्नि के माध्यम से ‘शुद्ध’ करने की आवश्यकता नहीं होती।2. शरीर और आत्मा का कमजोर जुड़ाव:आध्यात्मिक दृष्टि से मनुष्य के तीन शरीर होते हैं— स्थूल, सूक्ष्म और कारण शरीर। व्यस्कों में ये तीनों शरीर आपस में बहुत मजबूती से जुड़े होते हैं, जिन्हें अलग करने के लिए अग्नि की ऊर्जा चाहिए होती है। इसके विपरीत, बच्चों में यह जुड़ाव बहुत कच्चा और सरल होता है। उनकी आत्मा बिना किसी बाहरी बल के आसानी से शरीर छोड़ देती है।गरुड़ पुराण का क्या है नियम?गरुड़ पुराण के अनुसार, जिस बच्चे के अभी दूध के दांत भी न निकले हों, उसका दाह संस्कार वर्जित है। विभिन्न समुदायों में 2 से 5 साल तक के बच्चों को दफनाने की परंपरा है। माना जाता है कि इस उम्र तक बच्चों में ‘मैं’ और ‘मेरा’ (अहंकार) का भाव विकसित नहीं होता, जिससे उनकी आत्मा का शरीर के प्रति कोई लगाव नहीं रहता।वैज्ञानिक और प्राकृतिक दृष्टिकोणकोमल शरीर और ब्रह्मरंध्र: वैज्ञानिक रूप से छोटे बच्चों का शरीर अत्यंत कोमल होता है। उनके सिर का ऊपरी हिस्सा, जिसे ब्रह्मरंध्र कहा जाता है, पूरी तरह बंद नहीं होता। प्राणों के बाहर निकलने के लिए यह मार्ग पहले से सुलभ होता है, इसलिए बड़ों की तरह ‘कपाल क्रिया’ जैसी कठिन प्रक्रिया की जरूरत नहीं पड़ती।प्रकृति से निकटता: हमारा शरीर मिट्टी से बना है और अंत में मिट्टी में ही मिल जाता है। चूंकि बच्चों का अस्तित्व प्रकृति के सबसे करीब और सात्विक माना जाता है, इसलिए उन्हें सीधे मिट्टी (धरती मां) को सौंपना सबसे स्वाभाविक और शांतिपूर्ण तरीका माना गया है।भावनात्मक पहलूएक छोटे बच्चे की मृत्यु परिवार के लिए असहनीय होती है। दफनाने की प्रक्रिया अग्नि संस्कार की तुलना में कम भयावह और शांत महसूस होती है। यह परिजनों को यह मनोवैज्ञानिक सांत्वना देती है कि उनका बच्चा सुरक्षित रूप से धरती मां की गोद में विश्राम कर रहा है।
UK News