News India Live, Digital Desk: संसद के विशेष सत्र के दौरान शुक्रवार को एक ऐसा वाकया हुआ जिसने सबका ध्यान अपनी ओर खींच लिया। लोकसभा में जब विपक्ष के नेता राहुल गांधी महिला आरक्षण बिल पर बोलने के लिए खड़े हुए, तो उनके हाथ पर बंधी सफेद पट्टी (Bandage) देख सदन में मौजूद सदस्य और खुद स्पीकर ओम बिरला हैरान रह गए। सदन की कार्यवाही के बीच में ही स्पीकर ओम बिरला ने अपनी चिंता जताते हुए राहुल गांधी से उनकी चोट के बारे में पूछ लिया। इसके बाद कुछ देर के लिए सदन का माहौल पूरी तरह बदल गया और पक्ष-विपक्ष की राजनीति से परे मानवीय संवेदनाएं देखने को मिलीं।स्पीकर ने टोका तो मुस्कुरा दिए राहुल गांधीहुआ यूँ कि राहुल गांधी महिला आरक्षण बिल (Women Reservation Bill) को लेकर सरकार की नीतियों की आलोचना कर रहे थे। इसी दौरान स्पीकर ओम बिरला की नजर उनके हाथ पर लगी चोट और उस पर बंधी पट्टी पर पड़ी। स्पीकर ने चर्चा के बीच में ही राहुल गांधी से पूछा, “आपके हाथ में पट्टी लगी है, क्या हुआ? कैसे चोट लग गई?” इस पर राहुल गांधी ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया कि उनके अंगूठे में हल्की चोट लग गई है और यह कोई गंभीर बात नहीं है। उन्होंने स्पीकर का आभार जताते हुए अपना भाषण जारी रखा।चोट के बावजूद ‘मैजिशियन’ वाली कहानी से घेराहाथ में चोट और पट्टी के बावजूद राहुल गांधी के तेवर नरम नहीं पड़े। उन्होंने अपने भाषण के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए एक ‘जादूगर’ (Magician) की कहानी सुनाई, जिस पर सदन में जमकर ठहाके लगे। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि सरकार महिला आरक्षण के नाम पर एक ऐसा जादुई खेल खेल रही है, जिसका फायदा महिलाओं को तुरंत नहीं बल्कि सालों बाद मिलेगा। उन्होंने जनगणना और परिसीमन की शर्तों को आरक्षण में ‘अड़ंगा’ करार दिया।सोशल मीडिया पर वायरल हुई पट्टी वाली तस्वीरराहुल गांधी के हाथ में पट्टी वाली तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं। उनके समर्थक जहाँ उनकी सक्रियता की तारीफ कर रहे हैं, वहीं विपक्षी खेमे में भी स्पीकर ओम बिरला द्वारा हालचाल पूछे जाने की सराहना की जा रही है। राजनीतिक हलकों में इस बात की चर्चा है कि संसद में तीखी नोकझोंक के बीच इस तरह के पल लोकतंत्र की खूबसूरती को दर्शाते हैं।महिला आरक्षण बिल पर विपक्ष का कड़ा रुखराहुल गांधी ने अपने संबोधन में साफ कहा कि कांग्रेस पार्टी महिला आरक्षण का समर्थन करती है, लेकिन वह चाहती है कि इसमें ओबीसी (OBC) महिलाओं के लिए अलग से कोटा सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने सरकार से सवाल किया कि आखिर इस बिल को तुरंत लागू करने में क्या परेशानी है? उन्होंने मांग की कि सरकार जनगणना का इंतजार किए बिना तत्काल प्रभाव से इसे लागू करे, ताकि ‘आधी आबादी’ को उनका वास्तविक प्रतिनिधित्व मिल सके।
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