News India Live, Digital Desk: देश की न्यायपालिका के शीर्ष पर बैठे चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) डीवाई चंद्रचूड़ की कार्यक्षमता और ऊर्जा ने एक बार फिर सबको हैरान कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस एमएम सुंदरेश ने मदुरै में एक कोर्ट भवन के उद्घाटन समारोह के दौरान सीजेआई के समर्पण को लेकर एक बड़ा खुलासा किया है। जस्टिस सुंदरेश ने बताया कि सीजेआई चंद्रचूड़ केवल न्याय की कुर्सी पर ही नहीं बैठते, बल्कि पर्दे के पीछे वह एक ऐसी मेहनत करते हैं जिसकी कल्पना करना भी मुश्किल है।17-18 घंटे का वर्किंग शेड्यूल: छुट्टियों में भी नहीं मिलता आरामजस्टिस सुंदरेश ने सार्वजनिक मंच से कहा कि सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ हर दिन लगभग 17 से 18 घंटे काम करते हैं। उन्होंने बताया कि चाहे वर्किंग डे हो या छुट्टियां, सीजेआई का ध्यान हमेशा न्यायिक सुधारों और लंबित मामलों के निस्तारण पर रहता है। जस्टिस सुंदरेश के मुताबिक, जब अन्य लोग आराम कर रहे होते हैं, तब भी सीजेआई फाइलों के अंबार और कोर्ट के प्रशासनिक कार्यों में व्यस्त रहते हैं।तकनीकी क्रांति और न्यायपालिका का आधुनिक चेहरासमारोह के दौरान जस्टिस सुंदरेश ने सीजेआई के विजन की तारीफ करते हुए कहा कि न्यायपालिका में तकनीक का समावेश उन्हीं की देन है। उन्होंने कहा कि 17-18 घंटे काम करने के बावजूद सीजेआई हमेशा नई ऊर्जा के साथ न्यायिक प्रणाली को डिजिटल बनाने की कोशिश करते हैं। मदुरै में नए कोर्ट परिसर का उद्घाटन इसी कड़ी का एक हिस्सा है, जिसका उद्देश्य आम आदमी तक न्याय की पहुंच को और अधिक सुलभ और तेज बनाना है।कानून के क्षेत्र में काम करने वालों के लिए बने प्रेरणास्रोतजस्टिस सुंदरेश ने युवा वकीलों और न्यायिक अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि सीजेआई चंद्रचूड़ का जीवन एक उदाहरण है। यदि देश का प्रधान न्यायाधीश इतनी कड़ी मेहनत कर सकता है, तो कानूनी पेशे से जुड़े हर व्यक्ति को उसी ईमानदारी और लगन के साथ काम करना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि सीजेआई का यह समर्पण ही है जिसने भारतीय न्यायपालिका के प्रति लोगों के विश्वास को और अधिक मजबूत किया है।
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