Saturday , April 25 2026

पंजाब की राजनीति में बड़ा भूचाल अमित शाह की रैली और आप में बगावत की इनसाइड स्टोरी, क्या गिर जाएगी सरकार?

News India Live, Digital Desk: पंजाब की सियासत में इन दिनों शांत दिखने वाली सतह के नीचे एक बड़ा तूफान पक रहा है। मोगा में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की रैली के बाद आम आदमी पार्टी (AAP) के भीतर मची रार अब बगावत की दहलीज पर खड़ी है। सियासी गलियारों में यह चर्चा जोरों पर है कि शाह की रैली के दौरान मिले ‘ग्रीन सिग्नल’ ने केजरीवाल और भगवंत मान की नींद उड़ा दी है। सूत्रों की मानें तो ‘आप’ के कई दिग्गज विधायक और नेता पाला बदलने की फिराक में हैं, जिसने राज्य की राजनीति में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है।अमित शाह की रैली और बगावत का ‘सीक्रेट कनेक्शन’मोगा में हुई रैली में अमित शाह के तेवरों ने साफ कर दिया था कि भाजपा अब पंजाब में ‘बैकफुट’ पर रहने के मूड में नहीं है। खबर है कि इस रैली के पर्दे के पीछे ‘आप’ के असंतुष्ट धड़े के साथ एक गुप्त बैठक हुई थी। सूत्रों का दावा है कि ‘आप’ के कई विधायक अपनी ही सरकार की कार्यप्रणाली और अफसरशाही के हावी होने से नाराज हैं। अमित शाह द्वारा पंजाब की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था पर उठाए गए सवालों ने इन असंतुष्ट नेताओं को एक मंच प्रदान कर दिया है। कहा जा रहा है कि दिल्ली और पंजाब के बीच बढ़ती दूरियों का फायदा उठाने के लिए भाजपा ने बिसात बिछा दी है।’आप’ के भीतर क्यों सुलग रही है असंतोष की आग?आम आदमी पार्टी के भीतर इस बगावत की पटकथा रातों-रात नहीं लिखी गई। पंजाब में सरकार बनने के बाद से ही कई विधायकों को लग रहा है कि उन्हें किनारे किया जा रहा है। ट्रांसफर-पोस्टिंग से लेकर नीतिगत फैसलों तक में उनकी अनदेखी की जा रही है। मोगा रैली के दौरान कुछ विधायकों की भाजपा नेताओं के साथ बढ़ती नजदीकियों ने पार्टी आलाकमान के माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी हैं। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि यह केवल कुछ नेताओं का जाना भर नहीं है, बल्कि पंजाब में ‘आप’ के मजबूत किले में बड़ी सेंधमारी की तैयारी है।क्या पंजाब में होगा ‘ऑपरेशन लोटस’ का आगाज?विपक्ष जहां इसे सरकार की विफलता बता रहा है, वहीं ‘आप’ नेतृत्व इसे भाजपा की साजिश करार दे रहा है। हालांकि, अमित शाह की रैली के बाद जिस तरह से बगावती सुर तेज हुए हैं, उससे “ऑपरेशन लोटस” की चर्चाएं फिर से तेज हो गई हैं। अगर ये असंतुष्ट विधायक कोई बड़ा कदम उठाते हैं, तो भगवंत मान सरकार के लिए बहुमत का आंकड़ा बचाए रखना एक बड़ी चुनौती बन सकता है। फिलहाल, पंजाब की जनता और सियासी पंडितों की नजरें उन ‘चेहरों’ पर टिकी हैं जो जल्द ही झाड़ू छोड़ कमल थाम सकते हैं।