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पेंटागन की नस-नस तक पहुंच चुका था मोसाद, अमेरिकी सरकार में अंदर तक थी पैठ

पेंटागन की नस-नस तक पहुंच चुका था मोसाद, अमेरिकी सरकार में अंदर तक थी पैठ

वाशिंगटन/तेल अवीव: अंतरराष्ट्रीय खुफिया और कूटनीति के गलियारों से एक ऐसी सनसनीखेज खबर सामने आ रही है जिसने महाशक्ति अमेरिका और उसके सबसे भरोसेमंद सहयोगी इजरायल के रिश्तों में भूचाल ला दिया है। एक खुफिया रिपोर्ट में यह चौंकाने वाला दावा किया गया है कि इजरायल की बदनाम और बेहद खतरनाक खुफिया एजेंसी 'मोसाद' (Mossad) अमेरिकी रक्षा मंत्रालय यानी पेंटागन (Pentagon) के सबसे सुरक्षित कमरों और फाइलों तक अपनी पहुंच बना चुकी थी। रिपोर्टर के हाथ लगे इनपुट्स के मुताबिक, मोसाद की पैठ अमेरिकी सरकार के शीर्ष स्तरों पर इतनी गहरी थी कि वाशिंगटन के बंद कमरों में होने वाली हर बड़ी हलचल की खबर सीधे यरुशलम पहुंच रही थी।

अमेरिकी सत्ता के केंद्र में इजरायली जासूसों का जाल

इस चौंकाने वाले खुलासे ने पेंटागन की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। खुफिया सूत्रों का कहना है कि मोसाद ने अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद और पेंटागन के उच्च अधिकारियों के बीच अपने ऐसे 'एजेंट्स' या 'सोर्सेज' प्लांट कर रखे थे, जिनकी मदद से अमेरिका की टॉप सीक्रेट जानकारियां लीक हो रही थीं। यह पहली बार नहीं है जब किसी मित्र देश पर जासूसी के आरोप लगे हों, लेकिन पेंटागन की नस-नस तक मोसाद की पहुंच होने की बात ने अमेरिकी खुफिया एजेंसियों एफबीआई (FBI) और सीआईए (CIA) के भी होश उड़ा दिए हैं। आंतरिक जांच में कुछ ऐसे सुराग मिले हैं जो सीधे तौर पर इजरायली इनपुट से जुड़े होने का इशारा करते हैं।

आखिर ट्रंप का वो कौन सा राज जानना चाहते थे बेंजामिन नेतन्याहू

इस पूरी जासूसी और पैठ के पीछे सबसे बड़ा और पेचीदा सवाल यह उठ रहा है कि आखिर इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का ऐसा कौन सा गुप्त राज जानना चाहते थे? रणनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि नेतन्याहू प्रशासन डोनाल्ड ट्रंप की मिडिल ईस्ट (मध्य पूर्व) को लेकर बनाई गई गुप्त रणनीतियों, ईरान के साथ बैक-चैनल वार्ताओं और अमेरिकी सेना की मूवमेंट से जुड़े उन फैसलों की सटीक जानकारी चाहता था, जो सीधे तौर पर इजरायल के अस्तित्व और उसकी सुरक्षा को प्रभावित कर सकते थे। व्हाइट हाउस की हर गुप्त फाइल पर नजर रखना नेतन्याहू की एक बड़ी राजनीतिक और सैन्य मजबूरी बन चुका था।

वाशिंगटन से लेकर यरुशलम तक मचा हड़कंप

इस सनसनीखेज खुलासे के बाद वाशिंगटन और तेल अवीव के बीच कूटनीतिक मोर्चे पर तनाव चरम पर पहुंच गया है। अमेरिकी सांसदों ने इस मामले पर गहरी चिंता जताते हुए पेंटागन से तुरंत एक उच्च स्तरीय रिपोर्ट तलब की है। वहीं दूसरी ओर, इजरायल ने हमेशा की तरह इन दावों को सिरे से खारिज किया है, लेकिन बैकडोर डिप्लोमेसी में दोनों देशों के बीच तल्खी साफ देखी जा रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि अगर यह जासूसी कांड पूरी तरह साबित हो जाता है, तो डोनाल्ड ट्रंप और नेतन्याहू के व्यक्तिगत संबंधों के साथ-साथ दोनों देशों के बीच होने वाले अरबों डॉलर के सैन्य समझौतों और खुफिया सूचनाओं के आदान-प्रदान पर हमेशा के लिए ब्रेक लग सकता है।