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वाराणसी में अब शहर के भीतर नहीं मिलेगा मीट-मांस और मछली, सभी दुकानें होंगी बाहर शिफ्ट

वाराणसी में अब शहर के भीतर नहीं मिलेगा मीट-मांस और मछली, सभी दुकानें होंगी बाहर शिफ्ट

धर्म और अध्यात्म की नगरी काशी (वाराणसी) से इस वक्त की सबसे बड़ी और ऐतिहासिक खबर सामने आ रही है, जो पूरे शहर की भौगोलिक और व्यापारिक व्यवस्था को बदलने वाली है। वाराणसी नगर निगम ने शहर के सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व को ध्यान में रखते हुए एक बेहद कड़ा और बड़ा फैसला लिया है। इस नए मास्टर प्लान के तहत अब वाराणसी शहर की सीमा के भीतर मीट, मांस और मछली की बिक्री पर पूरी तरह से पाबंदी लगाने की तैयारी कर ली गई है। नगर निगम की सदन में इस नए प्रस्ताव और कार्ययोजना पर अंतिम मुहर लगा दी गई है, जिसके बाद से ही पूरे शहर में इस फैसले को लेकर सरगर्मियां तेज हो गई हैं।

धार्मिक और रिहायशी इलाकों से हटेगा नॉन-वेज का कारोबार

नगर निगम के इस नए मेगा प्लान के मुताबिक, काशी विश्वनाथ मंदिर कॉरिडोर के आसपास के क्षेत्रों के साथ-साथ शहर के अन्य प्रमुख धार्मिक, ऐतिहासिक और घने रिहायशी इलाकों से नॉन-वेज की दुकानों को पूरी तरह से साफ किया जाएगा। अधिकारियों का कहना है कि पवित्र नगरी में आने वाले देश-विदेश के श्रद्धालुओं की धार्मिक भावनाओं, आस्था और शहर की स्वच्छता को बनाए रखने के लिए यह कदम उठाना बेहद जरूरी हो गया था। अब तक जो दुकानें गलियों या मुख्य चौराहों पर धड़ल्ले से चल रही थीं, उनके लाइसेंस और संचालन को लेकर नए और कड़े नियम लागू किए जा रहे हैं।

शहर के बाहर बनेगा अत्याधुनिक मीट मार्केट और वेंडिंग जोन

इस फैसले से मांस-मछली के कारोबार से जुड़े व्यापारियों को नुकसान न हो, इसके लिए प्रशासन ने एक बीच का रास्ता भी निकाला है। नगर निगम शहर के मुख्य रिहायशी और कमर्शियल इलाकों से बाहर, आउटर रिंग रोड या शहर के बाहरी छोर पर एक डेडिकेटेड और अत्याधुनिक 'मीट एंड फिश वेंडिंग जोन' तैयार करने जा रहा है। शहर के भीतर चल रही सभी वैध और अवैध दुकानों को इसी बाहरी जोन में शिफ्ट किया जाएगा। इस नए वेंडिंग जोन में साफ-सफाई, वेस्ट मैनेजमेंट और कोल्ड स्टोरेज जैसी आधुनिक सुविधाएं होंगी, ताकि पर्यावरण और स्वास्थ्य संबंधी नियमों का पूरी तरह पालन हो सके।

स्थानीय दुकानदारों और जनता के बीच छिड़ी बड़ी बहस

नगर निगम की मुहर लगने के बाद इस फैसले को धरातल पर उतारने के लिए सर्वे का काम शुरू कर दिया गया है। बिना लाइसेंस और अवैध रूप से चल रही दुकानों को बंद करने के सख्त निर्देश जारी किए जा चुके हैं। इस ऐतिहासिक फैसले का जहां एक तरफ स्थानीय संतों, पुजारियों और सनातन प्रेमियों ने दिल खोलकर स्वागत किया है, वहीं दूसरी तरफ मांस और मछली के व्यापार से जुड़े स्थानीय संगठनों ने इस पर चिंता जताई है। व्यापारियों का कहना है कि शहर से दूर शिफ्ट होने के कारण उनके रोजगार और दैनिक कमाई पर इसका सीधा असर पड़ेगा, जिसके लिए वे प्रशासन से राहत की मांग कर रहे हैं।