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“सपने देखना बंद करो,” किम जोंग उन की बहन की अमेरिका को सीधी चेतावनी, कहा— कभी नहीं छोड़ेंगे परमाणु हथियार

"सपने देखना बंद करो," किम जोंग उन की बहन की अमेरिका को सीधी चेतावनी, कहा— कभी नहीं छोड़ेंगे परमाणु हथियार

उत्तर कोरिया और अमेरिका के बीच जारी दशकों पुराना तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। प्योंगयांग ने वाशिंगटन को सीधे शब्दों में खुली चुनौती देते हुए साफ कर दिया है कि वह किसी भी कीमत पर अपने परमाणु हथियारों का त्याग नहीं करेगा। उत्तर कोरिया के तानाशाह किम जोंग उन की बेहद शक्तिशाली बहन किम यो जोंग ने रविवार को एक बेहद आक्रामक बयान जारी कर अमेरिका के परमाणु निरस्त्रीकरण (Denuclearization) के प्रयासों को 'बीते जमाने का एक अव्यावहारिक सपना' करार दिया है। किम यो जोंग ने दो टूक कहा कि अमेरिकी धमकियों के आगे झुकने के बजाय उत्तर कोरिया अपनी आत्मरक्षा के लिए एटमी हथियारों के भंडार को और तेजी से बढ़ाता रहेगा।

अमेरिकी दावों में कोई दम नहीं, उत्तर कोरिया एक घोषित परमाणु शक्ति

किम यो जोंग ने अपने तीखे बयान में आगे कहा कि अमेरिका चाहे जितने भी दावे कर ले, लेकिन कोई भी अंतरराष्ट्रीय दबाव उत्तर कोरिया को एक 'परमाणु शक्ति संपन्न देश' के रूप में मिले दर्जे को चुनौती नहीं दे सकता। उन्होंने अमेरिकी बयानों को पूरी तरह से कानूनी महत्व से शून्य और खोखला बताया। उत्तर कोरिया की तरफ से यह आक्रामक रुख ऐसे समय में सामने आया है, जब चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग सोमवार को उत्तर कोरिया की एक बेहद महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक यात्रा पर पहुंच रहे हैं। पिछले सात वर्षों में शी चिनफिंग की यह पहली उत्तर कोरिया यात्रा होगी, जहां वे तानाशाह किम जोंग उन से मिलकर द्विपक्षीय और वैश्विक मुद्दों पर रणनीतिक चर्चा करेंगे।

डोनाल्ड ट्रंप और शी चिनफिंग की वार्ता पर भड़कीं किम यो जोंग

उत्तर कोरिया की इस कद्दावर महिला नेता ने पिछले महीने बीजिंग में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग के बीच हुई हाई-प्रोफाइल शिखर वार्ता के बाद वाइट हाउस द्वारा जारी बयानों को 'पूरी तरह झूठी और भ्रामक जानकारी' करार दिया। दरअसल, अमेरिकी प्रशासन ने दावा किया था कि बीजिंग बैठक में दोनों वैश्विक नेताओं ने उत्तर कोरिया के पूर्ण परमाणु निरस्त्रीकरण के साझा लक्ष्य को दोहराया है। इस दावे पर पलटवार करते हुए किम यो जोंग ने कहा कि कुछ शीर्ष अमेरिकी अधिकारी आज भी जमीनी हकीकत से कोसों दूर हैं और पुराने, बंद हो चुके सपनों की दुनिया से बाहर नहीं आ पा रहे हैं।

2019 की ऐतिहासिक विफलता के बाद मिसाइल कार्यक्रमों में आई भयंकर तेजी

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि साल 2019 में वियतनाम के हनोई में किम जोंग उन और तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच हुई बहुचर्चित वार्ता के बेनतीजा खत्म होने के बाद से ही उत्तर कोरिया ने अपने परमाणु और अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) कार्यक्रमों का अभूतपूर्व विस्तार किया है। रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, किम जोंग उन अब अंतरराष्ट्रीय बिरादरी से उत्तर कोरिया को एक आधिकारिक परमाणु-संपन्न राष्ट्र के रूप में मान्यता दिलाना चाहते हैं, ताकि उनके देश पर लगे कड़े आर्थिक प्रतिबंधों को हमेशा के लिए हटाया जा सके और वैश्विक मंच पर उनकी स्थिति मजबूत हो।

गोला-बारूद कारखाने पहुंचे किम जोंग उन, उत्पादन बढ़ाने का सख्त अल्टीमेटम

उत्तर कोरिया की सरकारी मीडिया एजेंसी केसीएनए (KCNA) की रिपोर्ट के अनुसार, इस सियासी बयानबाजी के बीच तानाशाह किम जोंग उन ने खुद सप्ताहांत में देश के एक मुख्य और बेहद गोपनीय गोला-बारूद कारखाने का औचक निरीक्षण किया। इस दौरे पर उन्होंने सैन्य कमांडरों और वैज्ञानिकों को देश की मिसाइल आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए उत्पादन क्षमता को रिकॉर्ड स्तर तक बढ़ाने के सख्त निर्देश दिए हैं।

अमेरिका और चीन के बीच किसी भी गुप्त समझौते को बताया पूरी तरह बेबुनियाद

किम यो जोंग ने अमेरिका-चीन शिखर सम्मेलन के दौरान उत्तर कोरियाई परमाणु संकट पर हुई कथित सहमतियों की खबरों को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने पुरजोर तरीके से कहा कि अपनी संप्रभुता की रक्षा के लिए परमाणु युद्ध निवारक क्षमता (Nuclear Deterrent) को मजबूत करना सुप्रीम लीडर किम जोंग उन का 'अपरिवर्तनीय अंतिम निष्कर्ष' है, जिसे बिना किसी शर्त के देश में लागू किया जाएगा। दक्षिण कोरिया के 'कोरिया इंस्टीट्यूट फॉर नेशनल यूनिफिकेशन' के मुख्य विश्लेषक हांग मिन ने समाचार एजेंसी एएफपी (AFP) से बात करते हुए कहा कि किम यो जोंग का यह सख्त रुख दिखाता है कि प्योंगयांग अपने भाग्य का फैसला करने वाले किसी भी अमेरिकी-चीनी गुप्त समझौते को लेकर कितना संवेदनशील है और वह दुनिया को संदेश देना चाहता है कि उसके हथियारों पर सौदा करने की सोच महज एक कोरी कल्पना है।