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यूपी में नौकरियों की बौछार, महिला, दिव्यांग और ट्रांसजेंडर उद्यमियों के लिए सीएम योगी का महाप्लान, अफसरों को दिए नई स्टार्टअप नीति के सख्त निर्देश

यूपी में नौकरियों की बौछार, महिला, दिव्यांग और ट्रांसजेंडर उद्यमियों के लिए सीएम योगी का महाप्लान, अफसरों को दिए नई स्टार्टअप नीति के सख्त निर्देश

उत्तर प्रदेश को देश का सबसे बड़ा औद्योगिक और आर्थिक केंद्र बनाने की दिशा में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक और ऐतिहासिक कदम उठाया है। रविवार को एक उच्च स्तरीय बैठक में सीएम योगी ने प्रस्तावित 'उत्तर प्रदेश स्टार्टअप नीति-2026' (UP Startup Policy 2026) के विभिन्न प्रावधानों की गहन समीक्षा की और अधिकारियों को सख्त दिशा-निर्देश जारी किए। इस नई नीति का सबसे अनोखा और संवेदनशील पहलू यह है कि इसमें समाज के हर वर्ग को साथ लेकर चलने की तैयारी की गई है। योगी सरकार ने अब प्रदेश की महिला उद्यमियों, आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों (EWS), दिव्यांगजनों और ट्रांसजेंडर (किन्नर) समाज के उद्यमियों को व्यापार के क्षेत्र में आगे बढ़ाने के लिए विशेष वित्तीय प्रोत्साहन और रियायतें देने का मास्टरप्लान तैयार किया है। इसके साथ ही, पिछड़े माने जाने वाले पूर्वांचल और बुंदेलखंड क्षेत्रों के स्टार्टअप्स पर भी सरकार विशेष मेहरबानी बरसाने जा रही है।

युवाओं को 'नौकरी मांगने वाला नहीं, नौकरी देने वाला' बनाएगी नई नीति

समीक्षा बैठक के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उत्तर प्रदेश के पास आज देश की सबसे बड़ी युवा शक्ति, एक विशाल बाजार, मजबूत डिजिटल व औद्योगिक आधार और निवेशकों के अनुकूल बेहतरीन माहौल मौजूद है। ये सभी कारक मिलकर यूपी को देश की अर्थव्यवस्था का राष्ट्रीय केंद्र बनाने की पूरी क्षमता रखते हैं। उन्होंने अफसरों से कहा कि नई स्टार्टअप नीति-2026 का स्वरूप ऐसा होना चाहिए जो हमारे प्रदेश के युवाओं को केवल रोजगार खोजने वाला (Job Seeker) न बनाकर, बल्कि खुद का उद्यम स्थापित कर दूसरों को रोजगार देने वाला (Job Creator) बनाए। यह नीति उत्तर प्रदेश को वैश्विक स्तर पर नवाचार (Innovation) और नए उद्योगों के क्षेत्र में एक नई और मजबूत पहचान दिलाएगी।

भरण-पोषण भत्ता और सीड कैपिटल सहायता होगी और ज्यादा मजबूत

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि नई नीति के तहत दिए जाने वाले भरण-पोषण भत्ते, प्रोटोटाइप अनुदान, सीड कैपिटल सहायता (Seed Capital Support) तथा पेटेंट एवं गुणवत्ता प्रमाणन से जुड़े सरकारी प्रोत्साहनों को पहले से कहीं अधिक प्रभावी, सुलभ और पारदर्शी बनाया जाए। इसके साथ ही, पूरे प्रदेश में स्टार्टअप गतिविधियों के सुचारू संचालन, वित्तीय प्रबंधन, सटीक निगरानी, क्षमता निर्माण और अलग-अलग हितधारकों (Stakeholders) के बीच बेहतर तालमेल सुनिश्चित करने के लिए एक समर्पित 'उत्तर प्रदेश स्टार्टअप मिशन' का गठन करने का भी आदेश दिया गया है। आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग के प्रमुख सचिव ने सीएम को बताया कि यूपी ने पिछले कुछ वर्षों में स्टार्टअप इकोसिस्टम में अभूतपूर्व प्रगति की है। साल 2018 में जहां यूपी 'एस्पायरिंग लीडर' की श्रेणी में था, वहीं साल 2025 में भारत सरकार की रैंकिंग में उत्तर प्रदेश देश का 'टॉप परफॉर्मर' राज्य बन चुका है।

डीप-टेक, एआई और स्पेस टेक्नोलॉजी में यूपी बनेगा देश का लीडर

सीएम योगी ने दूरगामी सोच दिखाते हुए कहा कि प्रदेश के स्टार्टअप्स को शुरुआती चरण से लेकर उनके वैश्विक विस्तार तक सरकार हर कदम पर जरूरी सहयोग देगी। उन्होंने कहा कि यूपी के नए उद्यमियों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए उन्हें दुनिया के उत्कृष्ट एक्सेलेरेटर कार्यक्रमों, बड़े निवेशकों, उद्योग जगत और चोटी के अनुसंधान संस्थानों से सीधे जोड़ा जाना चाहिए। नई नीति में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), मशीन लर्निंग (ML), क्वांटम प्रौद्योगिकी, रोबोटिक्स, सेमीकंडक्टर, एयरोस्पेस, स्पेस टेक्नोलॉजी और हेल्थ-टेक जैसी भविष्य की उभरती हुई तकनीकों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इन क्षेत्रों में काम करने वाले डीप-टेक स्टार्टअप्स को सरकार विशेष वित्तीय मदद और मेंटरशिप प्रदान करेगी।

लखनऊ और नोएडा में बनेंगे यू-हब, प्रयोगशाला से बाजार तक पहुंचेगा रिसर्च

नवाचार और शोध को बढ़ावा देने के लिए मुख्यमंत्री ने राज्य में 'सेंटर ऑफ एक्सीलेंस' (Center of Excellence) की संख्या में भारी बढ़ोतरी करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने विश्वविद्यालयों, तकनीकी शिक्षण संस्थानों, बड़े अनुसंधान केंद्रों और कॉर्पोरेट जगत के बीच एक मजबूत नेटवर्क स्थापित करने को कहा है ताकि लैब में होने वाले नए प्रयोग और आविष्कार सीधे बाजार तक पहुंचकर व्यावसायिक रूप ले सकें। सीएम योगी ने एलान किया कि लखनऊ और नोएडा में प्रस्तावित 'यू-हब' (U-Hub) को डीप-टेक नवाचार के प्रमुख और सबसे आधुनिक केंद्रों के रूप में विकसित किया जाएगा। उन्होंने अंत में साफ कहा कि नवगठित स्टार्टअप मिशन पूरी तरह से पेशेवर, पारदर्शी और जवाबदेह व्यवस्था के साथ काम करेगा, ताकि यूपी में एक मजबूत और समावेशी व्यापारिक माहौल तैयार हो सके।