Tuesday , June 9 2026

Earthquake Update: ५.६ की तीव्रता वाले भूकंप से हिली हिमालयन बेल्ट; जानिए क्यों और कैसे आते हैं धरती में ये झटके

Earthquake Update: ५.६ की तीव्रता वाले भूकंप से हिली हिमालयन बेल्ट; जानिए क्यों और कैसे आते हैं धरती में ये झटके

कल देर रात यानी रविवार, ७ जून २०२६ की रात को हिमालयन क्षेत्र में बसे पड़ोसी देश भूटान में भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए। जर्मन रिसर्च सेंटर फॉर जियोसाइंसेज (GFZ) और अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, इस भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर ५.६ मापी गई है। राहत की बात यह रही कि इतनी तेज तीव्रता के बावजूद फिलहाल किसी भी तरह के जान-माल के नुकसान या किसी के हताहत होने की कोई खबर सामने नहीं आई है।

लेकिन देर रात ११:०६ बजे आए इस भूकंप ने सीमा से सटे भारतीय राज्यों और इलाकों में रहने वाले लोगों को पूरी तरह से डरा दिया।

भूटान में था मुख्य केंद्र, भारत और बांग्लादेश तक महसूस हुई धमक

मौसम और भूगर्भीय रिपोर्टों के अनुसार, इस भूकंप का मुख्य केंद्र (Epicenter) भूटान के पुणखा (Punakha) इलाके में जमीन से करीब १० किलोमीटर की गहराई पर स्थित था। यह क्षेत्र भारत के पश्चिम बंगाल राज्य के उत्तरी हिस्से के ठीक ऊपर पड़ता है। यही वजह रही कि इस झटके का सीधा और तेज असर भारत के पूर्वोत्तर राज्यों और पड़ोसी देश बांग्लादेश में भी बड़े पैमाने पर देखा गया।

  • सिक्किम का हाल: राजधानी गंगटोक समेत सिक्किम के कई पहाड़ी इलाकों में लोगों ने कुछ सेकंड तक जमीन और घरों को हिलते हुए साफ महसूस किया। सिक्किम स्टेट डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी (सिक्किम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण) के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि स्थिति पूरी तरह से नियंत्रण में है और प्रशासन हर हलचल पर पैनी नजर रख रहा है। सावधानी के तौर पर लोग तुरंत अपने घरों और इमारतों से बाहर सुरक्षित खुले स्थानों पर आ गए थे।

  • उत्तर बंगाल में दहशत: पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी शहर के साथ-साथ भूटान सीमा से सटे कूच बिहार, जलपाईगुड़ी और अलीपुरदुआर जिलों में भी इस भूकंप की वजह से लोग सहम गए। रात के समय अचानक पंखे और बर्तन हिलने की वजह से लोग अपनी सोई हुई नींद से जागकर सड़कों पर आ गए। स्थानीय प्रशासन ने पुष्टि की है कि उत्तर बंगाल के इन सीमावर्ती क्षेत्रों में कहीं से भी किसी अप्रिय घटना या संपत्ति के नुकसान की खबर नहीं है।

वैज्ञानिक नजरिया: आखिर क्यों और कैसे आता है भूकंप?

भूकंप आने की घटना पूरी तरह से एक प्राकृतिक और भूगर्भीय प्रक्रिया है। हमारी धरती ऊपर से भले ही एक ठोस गेंद जैसी दिखती हो, लेकिन इसके भीतर लगातार बदलाव होते रहते हैं।

 

ऊपर दिए गए वैज्ञानिक रेखाचित्र की मदद से हम समझ सकते हैं कि जमीन के नीचे यह पूरा खेल कैसे काम करता है:

  • टेक्टॉनिक प्लेट्स की गति (Tectonic Plates): पृथ्वी की सबसे बाहरी परत कई विशाल टुकड़ों में बंटी हुई है, जिन्हें हम टेक्टॉनिक प्लेट्स कहते हैं। ये प्लेट्स हमेशा बहुत ही धीमी रफ्तार से एक-दूसरे की तरफ खिसकती, टकराती या दूर जाती रहती हैं।

  • कन्वेक्शन करंट्स (Convection Currents): पृथ्वी के गर्भ (मैंटल) में मौजूद अत्यधिक गर्मी के कारण लावा में संवहन तरंगें यानी कन्वेक्शन करंट्स उठते हैं, जो इन विशाल प्लेट्स को हिलाने का काम करते हैं।

  • तनाव और ऊर्जा का रिलीज होना: जब दो प्लेट्स आपस में टकराती हैं, तो उनकी सीमाओं पर सालों तक भारी दबाव और तनाव (Stress) जमा होने लगता है। जब यह दबाव एक सीमा से पार हो जाता है, तो चट्टानें अचानक टूटती हैं या फॉल्ट लाइन (Fault) के सहारे खिसक जाती हैं।

  • फोकस और एपिसेंटर (Focus & Epicenter): पृथ्वी के अंदर जिस सटीक जगह से यह ऊर्जा सबसे पहले निकलती है, उसे फोकस (Focus) या हाइपोसेंटर कहा जाता है। इस फोकस के ठीक ऊपर धरती की सतह पर जो बिंदु होता है, उसे ही हम भूकंप का केंद्र या एपिसेंटर (Epicenter) कहते हैं।

जब यह रुकी हुई ऊर्जा अचानक बाहर निकलती है, तो वह तरंगों (Wave Fronts) के रूप में चारों तरफ फैलती है, जिससे सतह पर मौजूद इमारतें और जमीन तेजी से कांपने लगती हैं। भारत का उत्तर-पूर्वी हिस्सा और पूरी हिमालयन बेल्ट (जिसमें भूटान, नेपाल और सिक्किम शामिल हैं) इसी तरह की दो बड़ी प्लेटों के टकराने वाले मुख्य जोन में स्थित है, जिसके कारण इन इलाकों में बार-बार भूकंप के झटके देखने को मिलते हैं।