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ममता बनर्जी को लगा अब तक का सबसे बड़ा झटका! सोनिया गांधी के साथ चल रही थी सीक्रेट मीटिंग

ममता बनर्जी को लगा अब तक का सबसे बड़ा झटका! सोनिया गांधी के साथ चल रही थी सीक्रेट मीटिंग

पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर एक ऐसा सियासी तूफान खड़ा हो गया है जिसने पूरे देश की राजनीति में भूचाल ला दिया है। मुख्यमंत्री और टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी की पार्टी में अब तक की सबसे बड़ी और ऐतिहासिक टूट की खबर आ रही है। राजनीतिक गलियारों से मिल रही जानकारी के मुताबिक, पार्टी के भीतर लंबे समय से सुलग रही असंतोष की चिंगारी ने अब एक बड़ा रूप ले लिया है। इस पूरे घटनाक्रम की टाइमिंग इतनी सटीक और चौंकाने वाली है कि इसने टीएमसी के शीर्ष नेतृत्व के होश उड़ा कर रख दिए हैं।

वहां दिल्ली में बैठक, यहां सांसदों का बड़ा विद्रोह इस पूरे सियासी ड्रामे की सबसे हैरान करने वाली बात इसकी टाइमिंग रही। एक तरफ जहां टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी देश की राजधानी दिल्ली में कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी के साथ विपक्ष की एकजुटता और आगामी रणनीतियों को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण और सीक्रेट मीटिंग कर रही थीं, ठीक उसी वक्त पीछे से उनकी खुद की पार्टी के भीतर एक बड़ी बगावत की स्क्रिप्ट लिख दी गई। जब तक दिल्ली में चल रही बैठक खत्म होती, तब तक कोलकाता से लेकर दिल्ली तक टीएमसी के खेमे में यह खबर फैल चुकी थी कि पार्टी के 12 लोकसभा और राज्यसभा सांसदों ने मिलकर एक बड़ा खेला कर दिया है।

टीएमसी के 12 सांसदों ने बगावत कर बदला समीकरण पार्टी सूत्रों और राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, इन 12 बागी सांसदों ने एक साथ आकर पार्टी नेतृत्व के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। बताया जा रहा है कि ये सभी सांसद पिछले काफी समय से पार्टी के भीतर कुछ आंतरिक फैसलों और संगठनात्मक बदलावों से बेहद नाराज चल रहे थे। इन सांसदों का एक साथ आना ममता बनर्जी के लिए किसी बड़े झटके से कम नहीं है, क्योंकि इतनी बड़ी संख्या में सांसदों का बागी होना संसद के भीतर और बाहर टीएमसी की ताकत को आधा कर सकता है। इस बड़ी टूट के बाद अब कयास लगाए जा रहे हैं कि क्या ये सांसद किसी अन्य बड़ी राजनीतिक पार्टी का दामन थामेंगे या फिर अपना एक अलग गुट तैयार करेंगे।

पश्चिम बंगाल और राष्ट्रीय राजनीति पर पड़ेगा गहरा असर ममता बनर्जी की पार्टी में हुई इस अप्रत्याशित टूट का सीधा असर न सिर्फ पश्चिम बंगाल की क्षेत्रीय राजनीति पर पड़ेगा, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर बनने वाले विपक्षी गठबंधन की साख पर भी एक बड़ा सवालिया निशान लग गया है। इस बगावत ने ममता बनर्जी की उस छवि को बड़ा नुकसान पहुंचाया है जिसमें उन्हें एक बेहद कड़क और अनुशासनप्रिय नेता माना जाता है। अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि दिल्ली से वापस लौटने के बाद ममता बनर्जी अपनी पार्टी को बिखरने से बचाने के लिए क्या कड़ा एक्शन लेती हैं और इस राजनीतिक संकट से उबरने के लिए उनके पास क्या नया मास्टरस्ट्रोक है।