
अंतरराष्ट्रीय व्यापार और सुरक्षा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माने जाने वाले लाल सागर (Red Sea) के रूट पर एक बार फिर महायुद्ध जैसी गंभीर स्थिति पैदा हो गई है। यमन के हूती लड़ाकों ने इस पूरे समुद्री क्षेत्र में अपनी आक्रामक गतिविधियों को बढ़ाते हुए एक बहुत बड़ा और चौंकाने वाला ऐलान किया है। हूती विद्रोहियों ने साफ कर दिया है कि वे अब इस वीआईपी समुद्री मार्ग से किसी भी इस्राइली जहाज को गुजरने नहीं देंगे। इस घोषणा के बाद से ही वैश्विक सुरक्षा एजेंसियों और दुनिया भर के नौसैनिक बलों में हड़कंप मच गया है, क्योंकि इस फैसले से अंतरराष्ट्रीय शिपिंग रूट पूरी तरह ठप होने की कगार पर पहुंच गया है।
हूती लड़ाकों का इस्राइली जहाजों पर मुकम्मल बैन हूती लड़ाकों के सैन्य प्रवक्ता की ओर से जारी एक आधिकारिक बयान में कहा गया है कि लाल सागर, अरब सागर और अदन की खाड़ी से होकर गुजरने वाले सभी इस्राइली जहाजों या इस्राइल से संबंध रखने वाली कंपनियों के कार्गो शिप पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है। विद्रोहियों का दावा है कि जब तक गाजा पट्टी में सैन्य कार्रवाई और फिलिस्तीनी नागरिकों पर हो रहे हमले पूरी तरह से नहीं रुकते, तब तक उनका यह कड़ा रुख जारी रहेगा। हूतियों के इस सख्त फैसले ने स्वेज नहर के रास्ते होने वाले दुनिया के बड़े हिस्से के व्यापारिक जहाजों की आवाजाही को भारी संकट में डाल दिया है।
समंदर में दागीं मिसाइलें, जहाजों को निशाना बनाने का दावा सिर्फ प्रतिबंध की घोषणा ही नहीं, बल्कि हूती लड़ाकों ने लाल सागर में व्यावहारिक तौर पर भी दहशत फैला दी है। विद्रोहियों ने दावा किया है कि उन्होंने इस्राइली और उनके सहयोगी देशों के जहाजों को निशाना बनाते हुए कई घातक बैलिस्टिक और क्रूज मिसाइलें दागी हैं। इसके साथ ही ड्रोन हमलों के जरिए भी जहाजों को भारी नुकसान पहुंचाने की बात कही गई है। हालांकि, अमेरिकी और ब्रिटिश नौसेना की टीमें इस पूरे इलाके में मुस्तैद हैं और उन्होंने कई मिसाइलों को हवा में ही मार गिराने का दावा किया है, लेकिन इसके बावजूद समंदर में व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा को लेकर एक बड़ा सवालिया निशान खड़ा हो गया है।
ग्लोबल सप्लाई चेन और दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा सीधा असर लाल सागर में लगातार बढ़ते इस तनाव के कारण अब पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था के लिए एक नया सिरदर्द पैदा हो गया है। इस रूट पर बढ़ते हमलों के डर से दुनिया की बड़ी-बड़ी शिपिंग कंपनियों ने अपने जहाजों के रास्ते बदल दिए हैं। अब जहाजों को अफ्रीका के नीचे से लंबा चक्कर लगाकर यूरोप और अमेरिका जाना पड़ रहा है। इस लंबे रास्ते की वजह से समुद्री मालभाड़े (Freight Charges) में भारी बढ़ोतरी हो गई है, जिसका सीधा असर आने वाले दिनों में कच्चे तेल की कीमतों और रोजमर्रा के सामानों की महंगाई के रूप में पूरी दुनिया को भुगतना पड़ सकता है।
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