
आज 12 जून 2026 का दिन भारतीय विमानन इतिहास के सबसे काले और दर्दनाक पन्नों में से एक की याद दिलाता है। आज से ठीक एक साल पहले, यानी 12 जून 2025 को अहमदाबाद इंटरनेशनल एयरपोर्ट से लंदन के लिए उड़ान भरने के चंद सेकंडों बाद ही एअर इंडिया का चमचमाता बोइंग-787 ड्रीमलाइनर विमान एक भयानक हादसे का शिकार हो गया था। इस दिल दहला देने वाली दुर्घटना में विमान में सवार सभी 260 यात्रियों और क्रू मेंबर्स की अकाल मौत हो गई थी। इस भीषण त्रासदी की पहली बरसी पर देश के विमानन विशेषज्ञों और पायलटों के सबसे बड़े संगठन 'फेडरेशन ऑफ इंडियन पायलट्स' (FIP) ने मौजूदा जांच प्रक्रिया पर बेहद सनसनीखेज सवाल खड़े कर दिए हैं। संगठन ने हादसे की निष्पक्ष न्यायिक जांच कराने की मांग करते हुए सीधे तौर पर विमान निर्माता अमेरिकी कंपनी बोइंग को कटघरे में खड़ा किया है। संपादक जीत कुमार की इस विशेष खोजी रिपोर्ट में जानिए कि आखिर एक साल बाद भी इस हादसे का असली सच सामने क्यों नहीं आ सका है।
बोइंग और जनरल इलेक्ट्रिक को मिले थे गुप्त कोड: 15 मिनट के सेटेलाइट डेटा में छुपा है तबाही का असली राज
फेडरेशन ऑफ इंडियन पायलट्स के अध्यक्ष कैप्टन सीएस रंधावा ने इस पूरे मामले में विमान बनाने वाली अमेरिकी कंपनी बोइंग पर बेहद गंभीर और चौंकाने वाले आरोप लगाए हैं। कैप्टन रंधावा के मुताबिक, जब भी कोई विमान टेक-ऑफ करने वाला होता है, तो उसकी तकनीकी स्थिति और इंजनों की सेहत के बारे में सेटेलाइट के जरिए रीयल-टाइम डेटा कोड ट्रांसमिट किए जाते हैं। यह गुप्त कोड सीधे तौर पर बोइंग कंपनी, इंजन निर्माता 'जनरल इलेक्ट्रिक' और एअर इंडिया के पास जाते हैं। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि इन कोड्स को डिकोड करने की तकनीक सिर्फ और सिर्फ बोइंग कंपनी के पास ही मौजूद है। विमानन विशेषज्ञों का दावा है कि टेक-ऑफ से ठीक 15 मिनट पहले के इन कोड्स को अगर सार्वजनिक कर दिया जाए, तो इस विनाशकारी हादसे की असली तकनीकी वजह तुरंत दुनिया के सामने आ जाएगी।
ब्लैक बॉक्स और सीवीआर को दो बार अमेरिका भेजने पर भारी आपत्ति, निष्पक्षता पर खड़े हुए बड़े सवाल
इस संवेदनशील मामले की जांच भारत सरकार की मुख्य एजेंसी एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (AAIB) कर रही है, लेकिन पायलटों के संगठन ने इसकी कार्यप्रणाली पर भी गंभीर उंगलियां उठाई हैं। शुरुआत में भारत सरकार की ओर से दावा किया गया था कि भारतीय एजेंसियां इस तरह के बड़े क्रैश की जांच करने में पूरी तरह सक्षम हैं। इसके बावजूद, विमान के मलबे से मिले कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर (CVR) और डिजिटल फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर (ब्लैक बॉक्स) को जांच के बहाने दो बार अमेरिका भेजा गया। कैप्टन रंधावा ने इस कदम पर सख्त ऐतराज जताते हुए कहा कि जिस देश की कंपनी (बोइंग) का विमान हादसे का शिकार हुआ है, उसी देश की प्रयोगशाला में जांच के लिए मुख्य सबूतों को भेजना पूरी तरह गलत है। ऐसे में जांच की निष्पक्षता पर सवाल उठना लाजिमी है और सच के दबाए जाने की पूरी आशंका है।
दिवंगत मुख्य पायलट सभरवाल को बलि का बकरा बनाने की कोशिश? अधिकारियों की 'कुत्सित' हरकत का खुलासा
जांच समिति के रवैये पर सबसे बड़ा और तीखा हमला बोलते हुए कैप्टन रंधावा ने एक बेहद शर्मनाक वाकये का पर्दाफाश किया। उन्होंने बताया कि जांच समिति के इशारे पर दो बेहद रसूखदार अधिकारियों ने गुपचुप तरीके से हादसे में अपनी जान गंवाने वाले मुख्य पायलट कैप्टन सभरवाल के घर का दौरा किया था। वहां जाकर अधिकारियों ने पायलट के परिजनों से उनकी मानसिक स्थिति को लेकर अजीबोगरीब पूछताछ की। पायलट संगठन ने इस हरकत की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए इसे 'कुत्सित प्रयास' करार दिया है। संगठन का आरोप है कि यह पूरी कवायद तकनीकी खराबी को छुपाकर सारा दोष मृत पायलट के सिर मढ़ने और उसे बलि का बकरा बनाने के लिए की जा रही है, जबकि रिकॉर्ड बताते हैं कि कैप्टन सभरवाल ने आखिरी सेकंड तक कॉकपिट में जूझते हुए विमान को नियंत्रित करने और यात्रियों को बचाने का सर्वोच्च प्रयास किया था।
उड्डयन विशेषज्ञों की संख्या बढ़ाने और अंतिम विस्तृत रिपोर्ट को तुरंत सार्वजनिक करने की मांग
वर्तमान में इस हाई-प्रोफाइल हादसे की जांच कर रही सरकारी समिति में कुल पांच सदस्य शामिल हैं। फेडरेशन ऑफ इंडियन पायलट्स का कहना है कि इतने बड़े और जटिल अंतरराष्ट्रीय हादसे की जांच के लिए यह संख्या बेहद कम है। इस समिति में स्वतंत्र उड्डयन विशेषज्ञों और वरिष्ठ पायलटों की संख्या को तुरंत बढ़ाया जाना चाहिए। इसके साथ ही, एएआईबी (AAIB) से मांग की गई है कि वह अब और देरी किए बिना इस हादसे की पूरी और विस्तृत फाइनल रिपोर्ट देश के सामने रखे। कैप्टन रंधावा ने स्पष्ट किया कि हालांकि एक साल के भीतर इतने बड़े विमान हादसे के सभी तकनीकी पहलुओं की बारीकी से जांच करना आसान नहीं होता और इसमें समय लगता है, लेकिन अंतरिम रिपोर्टों के कारण जो गलतफहमियां और अफवाहें फैल रही हैं, उन्हें रोकने के लिए पारदर्शी जांच रिपोर्ट का आना बेहद जरूरी है ताकि भविष्य में किसी अन्य निर्दोष यात्री या पायलट को अपनी जान न गंवानी पड़े।
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