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News India Live, Digital Desk: कुंभ का मेला हो या हिमालय की कंदराएं, नागा साधुओं का जीवन हमेशा से ही कौतूहल और रहस्य का विषय रहा है। अपनी कठिन तपस्या और वैराग्य के लिए जाने जाने वाले इन साधुओं के पास संपत्ति के नाम पर बहुत कम चीजें होती हैं, जिनमें सबसे महत्वपूर्ण है ‘ब्रह्म पात्र’।11 मार्च 2026 की धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं के अनुसार, ब्रह्म पात्र कोई साधारण बर्तन नहीं है, बल्कि यह नागा साधु के जीवन और उनकी आध्यात्मिक यात्रा का एक अनिवार्य हिस्सा है। आइए जानते हैं आखिर क्या है यह पात्र और साधु इसे अपने पास क्यों रखते हैं।क्या होता है ब्रह्म पात्र?ब्रह्म पात्र एक विशेष प्रकार का पात्र (बर्तन) होता है, जो आमतौर पर लौकी (सूखी हुई), लकड़ी या मिट्टी से बना होता है। सन्यास की दीक्षा लेने के बाद, एक साधु को यह पात्र उनके गुरु द्वारा प्रदान किया जाता है। इसे ‘भिक्षा पात्र’ भी कहा जाता है, लेकिन नागा परंपरा में इसे ‘ब्रह्म’ की संज्ञा दी गई है।नागा साधु क्यों रखते हैं ब्रह्म पात्र? (5 प्रमुख कारण)अपरिग्रह का प्रतीक: सन्यास का अर्थ है मोह-माया का त्याग। नागा साधु धातु (सोना, चांदी या तांबा) के बर्तनों का उपयोग नहीं करते, क्योंकि धातु संचय और ऐश्वर्य का प्रतीक है। ब्रह्म पात्र उनके त्याग और सादगी को दर्शाता है।भिक्षा का एकमात्र साधन: नागा साधु खुद खाना नहीं बनाते। वे अपनी भूख मिटाने के लिए केवल सात घरों से भिक्षा मांगते हैं। भिक्षा में मिला अन्न इसी ब्रह्म पात्र में रखा जाता है।शुद्धता और सात्विकता: सूखी लौकी या लकड़ी से बने पात्र को प्राकृतिक और शुद्ध माना जाता है। साधना के दौरान प्राकृतिक चीजों का सानिध्य मानसिक शांति प्रदान करता है।दीक्षा का हिस्सा: जब कोई व्यक्ति नागा साधु बनता है, तो वह अपना ‘पिंडदान’ स्वयं करता है। इसके बाद उसे जो ब्रह्म पात्र मिलता है, वह उसके पुनर्जन्म और नए जीवन का आधार बनता है।ब्रह्मांड का प्रतीक: आध्यात्मिक दृष्टि से इस पात्र को ‘शून्य’ या ‘ब्रह्मांड’ का प्रतीक माना जाता है, जिसमें सब कुछ समाहित है लेकिन जो स्वयं खाली है।ब्रह्म पात्र से जुड़े कड़े नियमनागा साधुओं के लिए इस पात्र की पवित्रता सर्वोपरि है। यदि यह पात्र टूट जाए या अपवित्र हो जाए, तो साधु को कठिन प्रायश्चित करना पड़ता है। वे इसे कभी जमीन पर नहीं रखते और हमेशा अपने साथ रखते हैं।
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