News India Live, Digital Desk: आस्था, शुद्धता और सूर्य उपासना का महापर्व चैती छठ 2026 अपने चरम पर है। नहाय-खाय के बाद आज, 23 मार्च 2026 को व्रती ‘खरना’ का अनुष्ठान कर रहे हैं। खरना का अर्थ है शुद्धिकरण, जहाँ व्रती पूरे दिन उपवास रखकर शाम को मिट्टी के चूल्हे पर बनी गुड़ की खीर और रोटी का प्रसाद ग्रहण करते हैं। इसके साथ ही 36 घंटे के अत्यंत कठिन निर्जला व्रत का संकल्प शुरू हो जाता है। इस बार चैती छठ पर विशेष ग्रहों का संयोग बन रहा है, जो छठ व्रतियों के लिए अत्यंत फलदायी माना जा रहा है।खरना का समय और पूजा विधि: शुद्धता का विशेष महत्वआज शाम सूर्यास्त के बाद खरना का प्रसाद ग्रहण किया जाएगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, खरना का प्रसाद एकांत में ग्रहण करना चाहिए और उस समय घर में पूर्ण शांति होनी चाहिए। प्रसाद में गाय के दूध और गुड़ से बनी ‘रसिया’ (खीर) और गेहूं की रोटी का भोग लगाया जाता है। व्रती इस प्रसाद को ग्रहण करने के बाद अगले 36 घंटों तक अन्न और जल का त्याग कर देते हैं। खरना के बाद से ही घर में छठी मइया के गीतों की गूंज और प्रसाद बनाने की तैयारी तेज हो जाती है।सूर्य अर्घ्य 2026: कब है डूबते और उगते सूर्य को अर्घ्य?छठ महापर्व के सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव यानी ‘अर्घ्य’ की तिथियों को लेकर श्रद्धालुओं में खासा उत्साह है। पंचांग के अनुसार मुख्य तिथियां इस प्रकार हैं:संध्या अर्घ्य (डूबते सूर्य को अर्घ्य): कल, 24 मार्च 2024 की शाम को अस्ताचलगामी सूर्य को पहला अर्घ्य दिया जाएगा। व्रती नदियों और तालाबों के घाट पर पहुंचकर छठी मइया की आराधना करेंगे।उषा अर्घ्य (उगते सूर्य को अर्घ्य): परसों, 25 मार्च 2024 की सुबह उगते सूर्य को अर्घ्य देने के साथ ही चार दिवसीय इस महापर्व का समापन और पारण होगा।छठ व्रत के कड़े नियम और सावधानीचैती छठ का व्रत नियमों के पालन में अत्यंत कठोर माना जाता है। खरना के दिन से ही व्रती जमीन पर सोते हैं और सात्विकता का पूर्ण पालन करते हैं। पूजा में उपयोग होने वाले फलों, सूप और दउरा की सफाई का विशेष ध्यान रखा जाता है। चैती छठ का महत्व इसलिए भी अधिक है क्योंकि यह तपती गर्मी की शुरुआत में शरीर और मन को अनुशासित करने का संदेश देता है। मान्यता है कि जो भी भक्त पूरी निष्ठा से सूर्य देव और छठी मइया की पूजा करते हैं, उनकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और संतान सुख की प्राप्ति होती है।
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