News India Live, Digital Desk : हिंदू कैलेंडर के अनुसार, प्रत्येक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मासिक शिवरात्रि मनाई जाती है। साल 2026 में 17 मार्च को चैत्र मास की मासिक शिवरात्रि पड़ रही है। मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने और रात्रि जागरण कर शिव स्तुति करने से साधक को अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है। हालांकि, अनजाने में की गई कुछ गलतियां आपकी पूजा के फल को कम कर सकती हैं।मासिक शिवरात्रि पर क्या ‘न’ करें? (सावधानियां)महादेव की पूजा में सरलता और शुद्धि का बहुत महत्व है। इस दिन इन बातों से परहेज करें:शिवलिंग पर केतकी का फूल: भगवान शिव की पूजा में कभी भी केतकी के फूल का प्रयोग न करें, उन्हें यह फूल वर्जित है।तुलसी दल न चढ़ाएं: भगवान विष्णु को प्रिय तुलसी, शिवजी की पूजा में इस्तेमाल नहीं की जाती। इसके बजाय बेलपत्र का उपयोग करें।हल्दी का निषेध: शिवलिंग पुरुष तत्व का प्रतीक माना जाता है, इसलिए इस पर हल्दी नहीं चढ़ाई जाती। आप चंदन का लेप लगा सकते हैं।खंडित बेलपत्र: पूजा में उपयोग किए जाने वाले बेलपत्र कहीं से भी कटे-फटे या सूखे नहीं होने चाहिए।शंख से जल: शिव पुराण के अनुसार, शंखचूड़ वध के कारण महादेव की पूजा में शंख से जल अर्पित करना वर्जित माना गया है।शिव कृपा के लिए प्रभावशाली मंत्रपूजा के दौरान इन मंत्रों का जाप करने से मानसिक शांति और बाधाओं से मुक्ति मिलती है:पंचाक्षरी मंत्र: ॐ नमः शिवाय (सबसे सरल और शक्तिशाली)।महामृत्युंजय मंत्र: ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥रुद्र गायत्री मंत्र: ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि तन्नो रुद्रः प्रचोदयात्॥पूजा का श्रेष्ठ समय (निशिता काल मुहूर्त)मासिक शिवरात्रि की पूजा मुख्य रूप से मध्यरात्रि (निशिता काल) में की जाती है।17 मार्च 2026 की रात को भगवान शिव का अभिषेक करना सर्वोत्तम रहेगा। इस समय शांत मन से किया गया ध्यान सीधे शिव तत्व से जोड़ता है।
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