
‘भारत जोड़ो यात्रा’के बाद अब कांग्रेस नेता राहुल गांधी भारत से हज़ारों मील दूर,दक्षिण अमेरिका के देश पेरू के दौरे पर हैं। वे वहाँ किसी राजनीतिक कार्यक्रम में नहीं,बल्कि अपनी बेटी के एडमिशन के सिलसिले में एक निजी यात्रा पर गए हैं। लेकिन इस दौरान जब उन्हें पेरू की एक यूनिवर्सिटी में छात्रों से बात करने का मौका मिला,तो उन्होंने भारत के मौजूदा हालातों पर कुछ ऐसा कह दिया,जिसने दिल्ली में एक नई राजनीतिक बहस छेड़ दी है।राहुल गांधी ने विदेश में जाकर क्या कहा?जब राहुल गांधी वहाँ के छात्रों से बात कर रहे थे,तो उन्होंने भारत की एक ऐसी तस्वीर पेश की,जो सरकार के दावों से बिल्कुल अलग थी। उन्होंने दो बहुत बड़ी और गंभीर बातें कहीं:1. “भारत में अच्छी शिक्षा सिर्फ़ कुछ लोगों के लिए है”राहुल ने कहा कि भारत में अच्छी और ऊँची शिक्षा पाना हर किसी के बस की बात नहीं है। यह एक’विशेषाधिकार’ (privilege)बनकर रह गया है,जो सिर्फ़ कुछ ख़ास या अमीर लोगों को ही मिल पाता है। उनका इशारा साफ़ था कि देश में शिक्षा महँगी होती जा रही है और आम आदमी की पहुँच से दूर हो रही है।2. “खुलकर सोचने और बोलने की आज़ादी पर हमला हो रहा है”उनकी दूसरी और ज़्यादा गंभीर बात यह थी कि आज के भारत में खुलकर बोलने, सवाल पूछने और स्वतंत्र रूप से सोचने की आज़ादी पर हमला हो रहा है। उन्होंने कहा कि देश में ऐसा माहौल बना दिया गया है जहाँ आप सरकार की नीतियों या विचारधारा से असहमत नहीं हो सकते।क्यों दिया विदेश में ऐसा बयान?विदेशी धरती पर भारत के आंतरिक मामलों पर बात करना हमेशा से एक संवेदनशील मुद्दा रहा है। भाजपा अक्सर राहुल गांधी पर विदेश जाकर भारत की छवि खराब करने का आरोप लगाती रही है।वहीं, कांग्रेस का कहना है कि राहुल सिर्फ़ सच बोल रहे हैं और लोकतंत्र में सच बोलने का कोई सही या गलत स्थान नहीं होता।राहुल का यह बयान सिर्फ़ पेरू के छात्रों के लिए नहीं था, बल्कि यह एक अंतरराष्ट्रीय मंच से भाजपा सरकार पर सीधा हमला था। उन्होंने यह संदेश देने की कोशिश की है कि भारत में सब कुछ वैसा नहीं है जैसा दिखाया जाता है। अब भारत लौटकर उन्हें इस बयान पर एक नई बहस का सामना करना पड़ेगा।
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