
News India Live, Digital Desk: Calculus Invention : हम सभी ने स्कूल में पढ़ा है कि आइजैक न्यूटन ने कैलकुलस का आविष्कार किया था. लेकिन अगर आपसे कोई कहे कि न्यूटन के जन्म से सदियों पहले भारत में केरल के विद्वानों ने कैलकुलस जैसे गणितीय सिद्धांतों को खोज लिया था, तो क्या आप हैरान नहीं होंगे? शिक्षा मंत्रालय की एक किताब में कुछ ऐसा ही चौंकाने वाला दावा किया गया है, जिसने भारतीय इतिहास और गणित के क्षेत्र में एक नई बहस छेड़ दी है.इस किताब में यह बात सामने आई है कि केरल के कुछ गणितज्ञ और खगोलविद, जिन्हें अक्सर ‘केरल स्कूल ऑफ एस्ट्रोनॉमी एंड मैथमेटिक्स’ कहा जाता है, ने 14वीं से 16वीं शताब्दी के बीच ऐसे सिद्धांत विकसित किए थे जो आज के कैलकुलस (Calculus) के सिद्धांतों से काफी मिलते-जुलते हैं. सोचिए, जिस गणित को हम पश्चिमी देशों की देन मानते आए हैं, शायद उसकी जड़ें हमारे अपने देश में पहले से मौजूद थीं!इन विद्वानों ने त्रिकोणमिति (Trigonometry) और इन्फिनिटी सीरीज़ (Infinite series) जैसे विषयों पर गहन काम किया था. उनके निष्कर्षों में वे विचार शामिल हैं, जिन्हें बाद में न्यूटन और लाइबनिज (Leibniz) ने 17वीं शताब्दी में स्वतंत्र रूप से यूरोप में विकसित किया. यह खोज न केवल हमारे देश के समृद्ध बौद्धिक इतिहास पर गर्व करने का मौका देती है, बल्कि यह भी दिखाती है कि कैसे प्राचीन भारत विज्ञान और गणित के क्षेत्र में कितना आगे था.अगर शिक्षा मंत्रालय की इस किताब का दावा सच साबित होता है, तो यह गणित के इतिहास को एक नई दिशा देगा और दुनिया के सामने भारत के गौरवशाली वैज्ञानिक विरासत को और भी मजबूती से पेश करेगा. यह एक ऐसी जानकारी है जो हमारी पाठ्यपुस्तकों और सोच, दोनों को बदलने की क्षमता रखती है.
UK News