
दुनिया भर में जारी भू-राजनीतिक उथल-पुथल, लाल सागर से लेकर होर्मुज जलडमरूमध्य तक लॉजिस्टिक्स की रुकावटों और महंगे समुद्री मालभाड़े के बावजूद भारतीय इंजीनियरिंग उद्योग ने वैश्विक बाजार में अपना लोहा मनवाया है। इंजीनियरिंग एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल ऑफ इंडिया (EEPC India) द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, जुलाई महीने में देश का इंजीनियरिंग निर्यात सालाना आधार पर 18 प्रतिशत की जोरदार छलांग लगाकर 12.24 अरब डॉलर (लगभग ₹1.02 लाख करोड़) के स्तर पर पहुंच गया है। पिछले वर्ष समान अवधि (जुलाई 2025) में यह आंकड़ा 10.40 अरब डॉलर था। यह लगातार चौथा महीना है जब देश का इंजीनियरिंग शिपमेंट 10 अरब डॉलर के बेंचमार्क से ऊपर बना हुआ है, जो भारतीय विनिर्माण क्षेत्र की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता को दर्शाता है।
चार महीने में $46.38 अरब का आंकड़ा पार: देश के कुल निर्यात में 27.7% की हिस्सेदारी
वाणिज्य मंत्रालय के त्वरित अनुमानों के मुताबिक, जुलाई में देश के कुल व्यापारिक निर्यात में इंजीनियरिंग सेक्टर का दबदबा पूरी तरह कायम रहा। भारत के कुल 44.24 अरब डॉलर के वस्तु निर्यात में से 27.7 प्रतिशत हिस्सा अकेले इंजीनियरिंग उत्पादों का रहा है।
चालू वित्त वर्ष (FY27) के पहले चार महीनों यानी अप्रैल से जुलाई की संचयी (Cumulative) अवधि की बात करें तो कुल इंजीनियरिंग निर्यात 18.21 प्रतिशत बढ़कर 46.38 अरब डॉलर दर्ज किया गया, जबकि पिछले वित्त वर्ष की इसी अवधि में यह 39.24 अरब डॉलर था। इस तरह भारतीय निर्यातकों ने चार महीनों के भीतर पिछले साल के मुकाबले 7.14 अरब डॉलर का अतिरिक्त कारोबार वैश्विक बाजारों से हासिल किया है।
अमेरिका और चीन बने सबसे बड़े ग्रोथ ड्राइवर
भारतीय इंजीनियरिंग उत्पादों के लिए संयुक्त राज्य अमेरिका (US) सबसे बड़ा और पसंदीदा गंतव्य बना हुआ है। जुलाई में अमेरिका को होने वाले इंजीनियरिंग निर्यात में 20 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई और यह 2.18 अरब डॉलर पर पहुंच गया। अप्रैल-जुलाई के दौरान अमेरिका को कुल 7.78 अरब डॉलर का निर्यात हुआ, जो 11.8 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि दर्शाता है।
वहीं, चीन के बाजार से भी भारतीय इंजीनियरिंग सामानों के लिए जबरदस्त मांग देखने को मिली। जुलाई में चीन को किया जाने वाला इंजीनियरिंग निर्यात 32 प्रतिशत उछलकर 34.9 करोड़ डॉलर (349 मिलियन डॉलर) पर पहुंच गया। इसके अलावा जर्मनी, यूनाइटेड किंगडम (UK), संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और सिंगापुर जैसे विकसित व रणनीतिक बाजारों में भी भारतीय औद्योगिक मशीनरी, ऑटो कंपोनेंट्स और इलेक्ट्रिकल इक्विपमेंट्स की मजबूत खपत दर्ज की गई।
34 में से 27 प्रमुख प्रोडक्ट कैटेगरीज में दर्ज हुई शानदार तेजी
ईईपीसी इंडिया के विश्लेषण के अनुसार, जुलाई में यह बढ़त किसी एक खास उत्पाद तक सीमित नहीं थी बल्कि इसका दायरा बेहद व्यापक रहा। इंजीनियरिंग काउंसिल के कुल 34 प्रमुख उत्पाद पैनलों में से 27 पैनलों ने सकारात्मक वृद्धि दर्ज की। इनमें इंडस्ट्रियल मशीनरी, ऑटो पार्ट्स, इलेक्ट्रिकल मशीनरी, नॉन-फेरस मेटल्स, कॉपर व एल्युमिनियम उत्पाद और मेडिकल डिवाइसेज के शिपमेंट में तेज उछाल देखा गया।
हालांकि, 7 प्रमुख श्रेणियों में वैश्विक आर्थिक मंदी और स्थानीय मांग में नरमी के कारण गिरावट देखी गई। इनमें लोहा एवं इस्पात उत्पाद (Iron & Steel), सीसा व संबंधित उत्पाद, मशीन टूल्स, एयरक्राफ्ट व स्पेसक्राफ्ट के पुर्जे, भारी क्रेन, लिफ्ट और कार्यालय उपकरण शामिल रहे। इसके अलावा, मध्य पूर्व में चल रहे तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य के लॉजिस्टिक्स संकट के चलते सऊदी अरब को होने वाले प्रोजेक्ट-आधारित इंजीनियरिंग निर्यात में कुछ दबाव दर्ज किया गया।
वैश्विक चुनौतियां और एक्सपोर्टर्स के सामने मौजूद बाधाएं
ईईपीसी इंडिया के चेयरमैन पंकज चड्ढा ने इस मजबूत प्रदर्शन की सराहना करते हुए वैश्विक स्तर पर उभरती चुनौतियों के प्रति सतर्क भी किया। उन्होंने रेखांकित किया कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ती ऊर्जा लागत, ऊंचे कंटेनर भाड़े, विकसित देशों की संरक्षणवादी व्यापार नीतियां (Protectionist Measures) और यूरोपीय संघ द्वारा लगाए जा रहे कड़े तकनीकी व कार्बन अनुपालन मानक (जैसे CBAM) भारतीय निर्यातकों के लिए लॉजिस्टिक्स लागत को बढ़ा रहे हैं।
संगठन का मानना है कि इस मजबूत निर्यात गति को पूरे वित्त वर्ष में बनाए रखने के लिए भारतीय मैन्युफैक्चरर्स को उत्पादन के पैमाने (Scale) का विस्तार करना होगा, आधुनिक R&D और टेक्नोलॉजी अपग्रेडेशन पर निवेश बढ़ाना होगा और अफ्रीकी व लैटिन अमेरिकी जैसे गैर-पारंपरिक बाजारों में अपने निर्यात बास्केट का विविधीकरण करना होगा। सरकार द्वारा निर्यात प्रोत्साहन योजनाओं (जैसे RoDTEP) और नए मुक्त व्यापार समझौतों (FTAs) का समय पर क्रियान्वयन इस रफ्तार को टिकाऊ बनाए रखने में गेम-चेंजर साबित हो सकता है।
UK News