News India Live, Digital Desk: बिहार में जमीन-जायदाद से जुड़े कामों के लिए अभी आम जनता को और इंतजार करना पड़ सकता है। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग द्वारा 200 से अधिक निलंबित राजस्व कर्मचारियों को बहाल करने के आदेश के बावजूद, कर्मचारी संघ ने हड़ताल खत्म करने से इनकार कर दिया है। विभाग और कर्मचारियों के बीच जारी इस तकरार से राज्य के सभी अंचल कार्यालयों (Block Offices) में सन्नाटा पसरा हुआ है।सरकार ने वापस लिया निलंबन, फिर भी क्यों अड़ा है संघ?मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली सरकार ने जनगणना 2027 के महत्वपूर्ण कार्यों को देखते हुए उदारता दिखाई और 11 फरवरी से 19 अप्रैल के बीच निलंबित किए गए 224 राजस्व कर्मियों का निलंबन रद्द करने का निर्देश दिया। विभाग के अपर सचिव ने सभी जिलाधिकारियों को पत्र लिखकर इन कर्मियों को ड्यूटी पर वापस लेने को कहा था। हालांकि, ‘बिहार राज्य भूमि सुधार कर्मचारी संघ’ का कहना है कि सरकार ने केवल निलंबन वापस लिया है, लेकिन उनकी मुख्य मांगों (ग्रेड पे में वृद्धि, स्थानांतरण और भत्ता) पर अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है।अधिकारियों के ‘मार्गदर्शन’ के फेर में फंसा मामलासंघ के नेताओं का आरोप है कि विभाग ने निलंबन वापसी का आदेश तो दे दिया, लेकिन जिलों में समाहर्ता (DM) और उनके नीचे के अधिकारी इस विभागीय पत्र को केवल एक ‘मार्गदर्शन’ मान रहे हैं। कर्मचारियों का कहना है कि जब तक जमीनी स्तर पर बहाली की प्रक्रिया पूरी नहीं होती और उनकी मांगों पर लिखित आश्वासन नहीं मिलता, वे कलमबंद हड़ताल जारी रखेंगे। संघ ने साफ किया कि दो महीने से अधिक समय से जारी इस संघर्ष को वे बिना किसी ठोस नतीजे के खत्म नहीं करेंगे।आम जनता बेहाल: दाखिल-खारिज और प्रमाण पत्र अटकेफरवरी महीने से जारी इस अनिश्चितकालीन हड़ताल के कारण बिहार के लाखों लोग परेशान हैं। अंचलों में दाखिल-खारिज (Mutation), एलपीसी (LPC), जाति-आय और निवास प्रमाण पत्र जैसे जरूरी काम पूरी तरह ठप हैं। जमीन की रजिस्ट्री के बाद होने वाली कागजी कार्रवाई न होने से लोग कार्यालयों के चक्कर काट रहे हैं। जनगणना के शुरुआती सर्वे का काम भी इस हड़ताल की वजह से प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।सियासी मोड़: पूर्व मंत्री के फैसले को पलटने पर चर्चानिलंबन वापसी के इस फैसले को बिहार की राजनीति में एक बड़े प्रशासनिक बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है। दरअसल, पिछला निलंबन आदेश तत्कालीन विभाग के कड़े रुख का नतीजा था, जिसे नई सरकार ने ‘जनहित’ में पलट दिया है। अब देखना यह होगा कि क्या सरकार कर्मचारियों की अन्य मांगों को मानकर इस गतिरोध को समाप्त कर पाती है या फिर राजस्व कार्यालयों में तालाबंदी और लंबी खिंचेगी।
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